सीधी में मातृ मृत्यु दर का संकट: एक साल में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत
समझें क्या है पूरा मामला
- सीधी जिले में एक वर्ष में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत हुई।
- सीधी में मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा 211 तक पहुंच गया है।
- जिला अस्पताल में रात के लिए कोई एनेस्थेसियोलॉजिस्ट नहीं है।
- जीवन रक्षक दवाओं और खून की कमी से प्रसूताएं दम तोड़ रही हैं।
- खराब सड़कों के कारण गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लाते हैं।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच यहां 53 महिलाओं की मौत हो गई। ये सभी मौतें प्रसव के पहले, प्रसव दौरान या प्रसव के बाद में हुईं। मरने वाली महिलाओं की औसत आयु मात्र 26 वर्ष दर्ज की गई। सबसे कम उम्र की मृत प्रसूता की उम्र 19 साल थी। इस गंभीर स्थिति ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
राष्ट्रीय औसत से बहुत खराब हैं यहां के आंकड़े
भारत में मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार घट रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार देश में यह आंकड़ा अब 87 हो गया है। मध्य प्रदेश इस मामले में देश का दूसरा सबसे खराब राज्य है। राज्य में यह दर घटकर 159 पर पहुंच सकी है। लेकिन सीधी जिले में मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा 211 दर्ज हुआ।
यह आंकड़ा राष्ट्रीय और राज्य स्तर से बेहद चिंताजनक है। मृत्यु दर के आंकड़ों की समीक्षा करने पर डराने वाले तथ्य मिले हैं। 16 महिलाओं की जान रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में गई। वहीं 13 महिलाओं ने अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
कुछ एम्बुलेंस की कमी के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकीं, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। वहीं 13 प्रसूताओं की मौत बुनियादी सुविधाओं के अभाव में घर पर ही हुई। वहीं पांच मौतें सीधी के जिला अस्पताल में दर्ज की गईं।
समय पर इलाज से बच सकती थीं कई जानें
जांच में 40 मामलों में मौतों के सटीक कारणों की पहचान ही नहीं हो पाई। प्रसव के दौरान अत्यधिक खून बहने से 12 महिलाओं की मौत हुई। हाई ब्लडप्रेसर और एक्लेम्प्सिया (गर्भावस्था की एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है) के कारण सात महिलाओं की जान चली गई।
गंभीर एनीमिया के कारण पांच महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। डॉक्टरों के मुताबिक इन सभी प्रसूताओं की जान बचाई जा सकती थी। समय पर सही इलाज मिलने से ये मौतें रोकी जा सकती थीं, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं और प्रसूताओं की मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया नोटिस
बढ़ती मौतों पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने कड़ी नाराजगी जताई है। विभाग ने सीधी के मुख्य सिविल सर्जन को नोटिस जारी किया। नोटिस में खराब निर्णय लेने और अधूरी तैयारी की निंदा की गई। सरकारी मातृत्व योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाया है।
सीधी जिला स्वास्थ्य ग्रेडिंग में लगातार सबसे नीचे बना हुआ है। इससे स्वास्थ्य विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है। सीधी जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में हालात बेहद खराब हैं।
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच यहां भारी भीड़ रही। इस दौरान वार्ड में 10 हजार 22 गर्भवती महिलाएं भर्ती की गईं। अस्पताल में कुल 5 हजार 922 प्रसव सफलतापूर्वक संपन्न कराए गए। अधिक काम के बोझ के कारण स्वास्थ्य कर्मी बेहद तनाव में हैं। संसाधनों की कमी के कारण भी इलाज प्रभावित हो रहा है।
केवल एक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट के भरोसे पूरा अस्पताल
लाखों की आबादी वाले इस जिला अस्पताल में केवल एक ही एनेस्थेसियोलॉजिस्ट तैनात है। वह भी विशेषज्ञ डॉक्टर केवल आठ घंटे की शिफ्ट में काम करता है। वह रात के समय आपातकालीन ड्यूटी करने से साफ मना करता है। इस वजह से रात में सिजेरियन डिलीवरी नहीं हो पाती है। अस्पताल को मजबूरन मरीजों को रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। इस देरी के कारण कई प्रसूताओं की मौत हो जाती है।
कर्मचारियों और डॉक्टरों की कमी से जूझता वार्ड
अस्पताल के प्रसूति वार्ड में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञों के चार पदों की मंजूरी के बाद भी नियुक्तियां नहीं हुई हैं। वार्ड में 40 कर्मचारियों की सख्त जरूरत है, लेकिन वर्तमान में वहां केवल 22 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। अस्पताल में एक ऑपरेशन थिएटर की तुरंत जरूरत है। बच्चों के डॉक्टर और वेंटिलेशन यूनिट का भी अभाव है।
ब्लड बैंक में खून और प्लेटलेट्स की किल्लत
ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की सुविधा नहीं है। इस कारण अस्पताल में प्लेटलेट्स की भारी कमी बनी रहती है। खून की कमी के चलते कई मरीजों को दूसरे शहरों में भेजा जाता है। अप्रैल के निरीक्षण में ब्लड बैंक में सिर्फ सात यूनिट खून था। शिविर लगाने के बाद अब 53 यूनिट खून जुटाया गया है। इस आपूर्ति से प्रतिदिन कुछ मरीजों की मदद हो सकेगी।
रामपुर नैकिन स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल तस्वीर
जिला अस्पताल से करीब 50 किलोमीटर दूर रामपुर नैकिन केंद्र स्थित है। इस वार्ड में संक्रमित मरीजों को अलग रखने तक की कोई सुविधा नहीं है। इस वार्ड के लिए पांच कर्मचारी मंजूर हैं लेकिन तैनात केवल तीन लोग ही हैं।
इतना ही नहीं इस केंद्र में रक्त चढ़ाने तक की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। खून की जरूरत होने पर मरीजों को रीवा भेजा जाता है। रीवा पहुंचने में मरीजों को कम से कम डेढ़ घंटे लगते हैं। इस कारण रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है।
सड़कों के अभाव में चारपाई पर आती हैं महिलाएं
रामपुर नैकिन केंद्र के पास तीन मोबाइल मेडिकल वाहन हैं। इन वाहनों में ड्राइवर होते हैं पर कोई चिकित्सा कर्मी नहीं होता। बारिश के दिनों में गांवों की कच्ची सड़कें पूरी तरह बह जाती हैं। महिलाओं को चारपाई पर लिटाकर एम्बुलेंस तक लाया जाता है। ग्रामीणों को दो से तीन किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि वाहनों की मांग नहीं की गई मांग की गई लेकिन पूर्ति नहीं हुई। आज तक इस तहसील के लिए अतिरिक्त गाड़ियां नहीं मिली।
सीधी जिले की भौगोलिक स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के रास्ते में बड़ी बाधा है। कई आदिवासी गांवों तक पक्की सड़कों का संपर्क बिल्कुल नहीं है। यहां की अधिकांश गर्भवती महिलाएं गंभीर रूप से एनीमिया से पीड़ित हैं।
आदिवासी महिलाओं के खान-पान और पोषण का स्तर बहुत खराब है। इस वजह से प्रसव के समय अचानक कठिनाई बढ़ जाती हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के लिए इन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
सिहावल स्वास्थ्य केंद्र में जीवन रक्षक दवाएं खत्म
सिहावल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जीवन रक्षक दवाएं पूरी तरह खत्म हैं। प्रसव के बाद ब्लीडिंग को रोकने वाले महत्वपूर्ण इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। हाई ब्लड प्रेसर को नियंत्रित करने वाली गोलियों का स्टॉक खाली है। सैनिटरी पैड जैसी बुनियादी चीजें भी यहां उपलब्ध नहीं हैं। जिला के खरीद केंद्रों से दवाइयां समय पर नहीं पहुंच रही हैं। इस वजह से मरीजों को बहुत परेशानी होती है।
इतना ही नहीं सिहावल केंद्र के तीन प्रसव कक्षों में से दो पूरी तरह खराब हैं। प्रसव कराने के लिए केवल एक ही कमरा चालू हालत में है। यहां नौ नर्सों की जगह केवल पांच नर्सें काम कर रही हैं।
केंद्र में कोई भी स्थायी डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। कर्मचारियों की कमी से जूझते हुए प्रसव कार्य कराया जाता है। सुविधाओं की कमी के कारण 120 से अधिक मरीज रेफर हुए।
सरकार का दावा स्थितियां पहले से बेहतर हुई हैं
हेल्थ मिनिस्टर एवं उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने सीधी जिले की मौतों पर सीधी टिप्पणी नहीं की। हालांकि अधिकारियों ने राज्य के आंकड़ों में सुधार का दावा किया है। मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 135 हुई है। सरकार संस्थागत प्रसव को लगातार बढ़ावा देने का काम कर रही है। आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं। फिर भी सीधी जिले की स्थिति गंभीर चुनौती बनी हुई है।
सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस
FAQ
- सीधी जिले में मातृ मृत्यु दर (MMR) इतनी अधिक क्यों है?
डॉक्टरों, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की भारी कमी है। इसके अलावा कठिन भौगोलिक रास्तों के कारण मानसून में एम्बुलेंस गांवों तक नहीं पहुंच पाती। आदिवासी बेल्ट की प्रसूताओं में गंभीर एनीमिया और पोषण की कमी भी मौतों की मुख्य वजह है। - सीधी जिला अस्पताल में प्रसूति सेवाओं की मुख्य कमियां क्या हैं?
अस्पताल में रात की शिफ्ट के लिए एनेस्थेसियोलॉजिस्ट नहीं है, जिससे रात में आपातकालीन सिजेरियन नहीं हो पाते। स्वीकृत पदों के मुकाबले स्टाफ आधा है। अस्पताल में समर्पित ऑपरेशन थिएटर, बाल रोग एक्सपर्ट, वेंटिलेशन यूनिट की कमी से मरीजों को रेफर करना पड़ता है। - ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में क्या मेन समस्याएं सामने आईं?
ग्रामीण केंद्रों में जीवन रक्षक दवाएं, इंजेक्शन और चालू प्रसव कक्षों की भारी किल्लत है। रामपुर नैकिन में खून चढ़ाने की सुविधा नहीं है। जननी वाहनों में मेडिकल स्टाफ नहीं होता, जिससे सड़कों के अभाव में गंभीर प्रसूताओं की जान रास्ते में ही जोखिम में पड़ जाती है।
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