हाई कोर्ट ने रद्द हो चुके आदेश के आधार पर दोबारा फैसला देने वाले तहसीलदार को किया तलब, कल खुद देना होगा जवाब

Neel Tiwari | Oct 27, 2026, 21:18 IST
सीधी में रद्द हो चुके कलेक्टर के आदेश के आधार पर दोबारा फैसला देने वाले तहसीलदार को हाईकोर्ट ने तलब किया है।
Madhya Pradesh High Court summons Churhat Tehsildar for issuing a land mutation order based on an already quashed Collector's order.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सीधी जिले के चुरहट तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। मामला जमीन के नामांतरण से जुड़ा है। तहसीलदार ने कलेक्टर के उस आदेश के आधार पर दोबारा फैसला दिया, जिसे हाई कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका था। जस्टिस विशाल मिश्रा ने इस पर सवाल उठाते हुए तहसीलदार को 28 अक्टूबर को खुद उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया।

कलेक्टर का आदेश हाई कोर्ट पहले ही कर चुका था रद्द

यह मामला संदीप कुमार सुमन बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने तहसीलदार द्वारा 31 जुलाई 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना है कि यह आदेश कलेक्टर, सीधी के 14 अगस्त 2025 के आदेश के आधार पर पारित किया गया था, जबकि हाई कोर्ट 9 जनवरी 2026 को रिट याचिका क्रमांक 50227/2025 में कलेक्टर के उस आदेश को पहले ही निरस्त कर चुका था।



इसी विरोधाभास पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब संबंधित आदेश का कानूनी आधार ही खत्म हो चुका था, तो तहसीलदार ने उस पर भरोसा करके नया आदेश कैसे पारित कर दिया?



जमीन खरीदी, लेकिन नामांतरण आवेदन अटक गया

विवाद की शुरुआत जमीन के नामांतरण से हुई थी। संदीप कुमार सुमन ने 22 जुलाई 2025 को पंजीकृत विक्रय पत्र के जरिए जमीन खरीदी थी। इसके बाद उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया। लेकिन तहसीलदार, चुरहट और कलेक्टर, सीधी ने आवेदन खारिज कर दिया।



इसके पीछे सीतापुर-हनुमना माइक्रो इरिगेशन प्रोजेक्ट के तहत संबंधित जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव होने का हवाला दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जमीन अधिग्रहण की कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई थी, इसलिए केवल प्रस्ताव के आधार पर नामांतरण से इनकार करना उचित नहीं था।



9 जनवरी को हाई कोर्ट ने दोनों आदेश किए थे निरस्त

इस मामले में हाई कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को रिट याचिका क्रमांक 50227/2025 पर सुनवाई करते हुए तहसीलदार के 13 नवंबर 2025 और कलेक्टर के 14 अगस्त 2025 के आदेश निरस्त कर दिए थे।



जस्टिस विशाल मिश्रा ने आदेश में उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता ने कलेक्टर के आदेश से पहले ही पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से जमीन खरीद ली थी। साथ ही, भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 की धारा 11 के तहत अधिसूचना प्रकाशित होने का भी कोई उल्लेख नहीं था।



कोर्ट ने तहसीलदार को निर्देश दिया था कि कानून के अनुसार जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर तीन महीने के भीतर नामांतरण आवेदन पर नए सिरे से विचार करके निर्णय लें।



अब तहसीलदार को खुद कोर्ट में बताना होगा कारण

हाई कोर्ट के 27 अक्टूबर 2026 के ताजा आदेश में सवाल उठाया गया कि जब कलेक्टर का 14 अगस्त 2025 का आदेश पहले ही निरस्त किया जा चुका था, तो तहसीलदार ने 31 जुलाई 2026 का आदेश पारित करते समय उस पर कैसे भरोसा किया?



राज्य की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता ए.एस. बघेल इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित प्रतिवादी क्रमांक 3, यानी आदेश पारित करने वाले तहसीलदार को अगले दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।



अब 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में तहसीलदार को कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखना होगा।

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