सिंहस्थ 2028: उज्जैन से ओंकारेश्वर तक 17 हजार करोड़ का विकास होगा
समझें क्या है पूरा मामला
- सिंहस्थ 2028 आयोजन पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र में फैलेगा।
- उज्जैन सहित 8 जिलों में 16,910 करोड़ रुपए से ज्यादा के विकास कार्य चल रहे हैं।
- ओंकारेश्वर के लिए 160 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को हाल ही में मंजूरी मिली।
- तीर्थस्थलों को श्रद्धालु सुविधाओं के नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
- इंदौर से खंडवा, महेश्वर से मंदसौर तक विकास और कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी।
उज्जैन से आगे, 8 जिलों तक फैला दायरा
अब तक सिंहस्थ की तैयारी का मतलब उज्जैन की तैयारी होती थी। इस बार सरकार ने सोच बदल दी है।
इंदौर, देवास, खंडवा, खरगोन, आगर-मालवा, शाजापुर और मंदसौर जैसे जिलों को भी तैयारियों का हिस्सा बनाया गया है। सरकार का मानना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन में केवल उज्जैन की व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा। इसीलिए इन जिलों में आवास, पार्किंग, सड़क और जनसुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
17 हजार करोड़ से ज्यादा के काम
8 जिलों में अभी 16 हजार 910 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 148 विकास कार्य जारी हैं। इसके अलावा 491.66 करोड़ रुपए की लागत के 17 नए कार्यों को हाल ही में मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में होटल निर्माण से जुड़े लंबित बिल्डिंग परमिशन आवेदनों का जल्द निराकरण किया जाए। होटल, लॉज, धर्मशाला और होम-स्टे की उपलब्ध क्षमता का विस्तृत डेटा भी तैयार करने को कहा गया है।
ओंकारेश्वर को मिले 160 करोड़
सिंहस्थ की तैयारी के तहत ओंकारेश्वर के लिए 160 करोड़ रुपए से अधिक लागत के विभिन्न निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है। इनमें मल्टीलेवल पार्किंग, अस्पताल, प्रशासनिक भवन, फूड कोर्ट और रेलवे ओवरब्रिज जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। बड़वाह, ओंकारेश्वर और खेड़ीघाट क्षेत्र के विकास के लिए एक अलग प्राधिकरण भी बनाया जाएगा। इससे खंडवा और खरगोन जिलों में चल रहे कार्यों का बेहतर समन्वय हो सकेगा।
महेश्वर से मंदसौर तक, तीर्थों का नेटवर्क
सरकार की योजना है कि सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालु केवल उज्जैन और ओंकारेश्वर तक न रुकें। महेश्वर, मंडलेश्वर, नलखेड़ा और मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों को भी श्रद्धालु सुविधाओं के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे पर्यटन का बोझ एक ही शहर पर नहीं पड़ेगा। साथ ही इन क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
इंदौर के लिए क्या है खास
इंदौर इस पूरी योजना में केंद्रीय भूमिका में है। प्रदेश के सबसे बड़े शहर के रूप में यह श्रद्धालुओं के लिए मुख्य प्रवेश द्वार और ठहराव केंद्र बनेगा। होटल और लॉज के लंबित परमिशन आवेदनों का जल्द निपटारा इसीलिए किया जा रहा है। इंदौर से उज्जैन की 55 किलोमीटर की दूरी को देखते हुए यह स्वाभाविक भी है। सिंहस्थ 2028 के लिए अभी दो साल से ज्यादा का समय है, लेकिन तैयारी अभी से पूरे जोर पर है।
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