सिंहस्थ 2028: AI की मदद से ऐतिहासिक बनेगा कुंभ मेला, मिलेंगी हाई-टेक सुविधाएं

Kaushiki | Feb 20, 2025, 10:26 IST
singhasth 2028 ai based management
सिंहस्थ 2028 के लिए मध्यप्रदेश पुलिस नई रणनीति बना रही है। अब जनरल ब्रीफिंग की जगह पुलिसकर्मियों को उनके तय घाट, मंदिर या रूट के हिसाब से खास ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें AI और डेटा एनालिटिक्स का भी इस्तेमाल होगा।

सिंहस्थ 2028: मध्यप्रदेश में होने वाले सिंहस्थ 2028 को भव्य और अच्छे से संचालित करने के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करने की योजना बनाई है।



सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन पुलिस अपनी तैयारी का तरीका पूरी तरह बदल रही है। मध्यप्रदेश पुलिस अब पुलिसकर्मियों को जनरल ब्रीफिंग की जगह उनके तय इलाके के हिसाब से खास ट्रेनिंग देगी।



इसमें व्यवहार विज्ञान और AI आधारित भीड़ प्रबंधन को भी शामिल किया गया है। मकसद है कि पहला श्रद्धालु राम घाट पहुंचे, उससे पहले ही पुलिस को अपने इलाके की पूरी जानकारी हो। यह पूरी रणनीति रिएक्टिव पुलिसिंग की जगह डेटा आधारित, निवारक पुलिसिंग की तरफ बड़ा बदलाव है।



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पहले और अब की तैयारी

अब तक के सिंहस्थ मेलों में पुलिसकर्मियों को सामान्य पूर्व-तैनाती ब्रीफिंग दी जाती थी। यह ब्रीफिंग सभी अधिकारियों के लिए करीब-करीब एक जैसी होती थी, चाहे उनकी तैनाती किसी भी इलाके में हो। इस बार मध्यप्रदेश पुलिस इस तरीके को पूरी तरह बदलने जा रही है। नए मॉडल के तहत पुलिसकर्मियों को उसी घाट, मंदिर, रूट या सेक्टर के हिसाब से प्रशिक्षित किया जाएगा।



यहां उनकी तैनाती तय है। सिंहस्थ को अब एक जैसी पुलिसिंग कवायद के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसकी जगह संवेदनशील स्थानों को अलग-अलग परिचालन क्षेत्रों में बांटा जा रहा है।



हर क्षेत्र के अधिकारियों को वहां की भौगोलिक बनावट और भीड़ के व्यवहार के हिसाब से विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मतलब है कि पहला श्रद्धालु राम घाट पहुंचने से पहले ही तैनात अधिकारी उस इलाके की गलियां, चोक पॉइंट और निकासी के रास्ते अच्छी तरह जान चुके होंगे। साथ ही यह भी समझ लेंगे कि हर आरती के बाद भीड़ कैसे बढ़ती और घटती है।



थ्री-लेयर इलेक्ट्रिक व्हीकल प्लान

श्रद्धालुओं को जाम और प्रदूषण से बचाने के लिए तीन अलग-अलग स्तरों पर ग्रीन व्हीकल्स (Green Vehicles) चलाने का प्रस्ताव है:



  • शहरी और अंदरूनी इलाकों के लिए: संकरी गलियों और घाटों के आसपास श्रद्धालुओं को लाने-ले जाने के लिए सोलर गोल्फ कार्ट्सका इस्तेमाल होगा।
  • शॉर्ट-डिस्टेंस रूट के लिए: शहर के भीतर और नजदीकी पार्किंग लॉट्स से कनेक्ट करने के लिए इलेक्ट्रिक मिनी बसेंदौड़ेंगी।
  • लॉन्ग-डिस्टेंस रूट के लिए: बाहरी शहरों से आने वाले यात्रियों के लिए लंबी इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था की जाएगी।

इंटर-सिटी ग्रीन कॉरिडोर

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन श्रद्धालुओं को मिलेगा जो उज्जैन के पड़ोसी शहरों से यात्रा करेंगे। इसके तहत देवास, इंदौर और ओंकारेश्वर से उज्जैन आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक डेडिकेटेड इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू करने की योजना बनाई गई है। इससे इन भारी ट्रैफिक वाले रूट्स पर प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।



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ई-मिनी बस और सोलर कार्ट सेवा

बैठक में IIT एल्यूमिनाए काउंसिल के प्रतिनिधि सतीश मेहता ने सोलर गोल्फ कार्ट, इलेक्ट्रिक मिनी बसों और लंबी बसों के माध्यम से श्रद्धालुओं के परिवहन की सुविधा का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव के तहत देवास, इंदौर और ओंकारेश्वर से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू करने की योजना है। सीएम मोहन यादव ने इस योजना को पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में पहले इस सेवा का परीक्षण किया जाएगा। यदि यह सफल होती है तो इसे सिंहस्थ 2028 के दौरान बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा।



उज्जैन में तैयार होंगे नए ग्रिड

सिंहस्थ 2028 के दौरान विद्युत आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए उज्जैन में 6 नए ग्रिड तैयार किए जाएंगे। यह कार्य मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और ट्रांसमिशन कंपनी के सामंजस्य से किया जाएगा।


इन 6 नए ग्रिडों में दो 132 केवी ग्रिड इन क्षेत्रों में बनाए जाएंगे:



  • त्रिवेणी विहार
  • चिंतामण हासमपुरा

इसके अलावा, चार 33/11 केवी ग्रिड इन स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे:



  • चारधाम
  • नानाखेड़ा
  • सदावल
  • वाल्मीकि धाम
  • इन ग्रिडों के निर्माण से विद्युत आपूर्ति बाधित नहीं होगी और मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को फ्री बिजली मिलेगी।
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AI से होगा सुरक्षा प्रबंधन

सिंहस्थ 2028 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इनमें



  • ड्रोन कैमरों और AI सेंसरों के माध्यम से भीड़ की निगरानी की जाएगी।
  • रियल-टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा ताकि शहर में जाम की समस्या न हो।
  • स्मार्ट हेल्थकेयर यूनिट्स लगाई जाएंगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके।

उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस ने अपनी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) की रणनीति में एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। इस बार पुलिस पारंपरिक तरीकों को छोड़कर डेटा-आधारित और तकनीक-फ्रेंडली पुलिसिंग पर फोकस कर रही है।



एरिया-स्पेसिफिक खास ट्रेनिंग

उज्जैन सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) मेंअब तक के मेलों में सभी पुलिसकर्मियों को एक जैसी सामान्य ब्रीफिंग दी जाती थी। लेकिन नए मॉडल के तहत, अब अधिकारियों को उनके तय इलाके (घाट, मंदिर या रूट) के हिसाब से एरिया-स्पेसिफिक ट्रेनिंग दी जाएगी। उज्जैन के ADG रकेश गुप्ता के मुताबिक, संवेदनशील स्थानों को अलग-अलग ऑपरेशनल सेक्टर्स में बांटा गया है।



इसका फायदा यह होगा कि पहला श्रद्धालु राम घाट पहुंचे, उससे पहले ही वहां तैनात पुलिस टीम को उस इलाके की भौगोलिक बनावट, गलियों, चोक पॉइंट्स और निकासी के रास्तों की पूरी जानकारी होगी। इस ट्रेनिंग में पुलिसकर्मियों को व्यवहार विज्ञान भी सिखाया जा रहा है।



AI तकनीक और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का इस्तेमाल

इस बार सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक बनाने के लिए AI आधारित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का सहारा लिया जा रहा है। इसके जरिए भीड़ के व्यवहार और हर आरती के बाद होने वाली हलचल का डेटा पहले ही जुटा लिया जाएगा। ताकि पुलिस घटना होने के बाद रिएक्ट करने के बजाय पहले से ही अलर्ट रहे।



पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखने के लिए AI-सक्षम सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन सर्विलांस और रियल-टाइम कंट्रोल रूम तैयार किए जा रहे हैं, जो दुनिया के इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन को सुरक्षित और सुगम बनाएंगे।



सीएम मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 को वैश्विक स्तर पर एक अनोखा और अनुकरणीय आयोजन बनाने की बात कही। इसके लिए सरकार ने पर्यटन, संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व को डिजिटल माध्यमों से प्रचारित करने की योजना बनाई है।



FAQ

  1. सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में कौन-कौन सी नई सुविधाएं दी जाएंगी?
    उज्जैन में 6 नए ग्रिड बनाए जाएंगे, श्रद्धालुओं के लिए इलेक्ट्रिक मिनी बस सेवा शुरू होगी, और AI आधारित भीड़ व सुरक्षा प्रबंधन लागू किया जाएगा।
  2. सिंहस्थ में AI और तकनीक का क्या उपयोग किया जाएगा?
    भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक मैनेजमेंट, सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए ड्रोन कैमरे, AI सेंसर और स्मार्ट हेल्थकेयर यूनिट्स का उपयोग किया जाएगा।
  3. सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं के लिए परिवहन सुविधा कैसी होगी?
    देवास, इंदौर और ओंकारेश्वर से उज्जैन तक इलेक्ट्रिक मिनी बस सेवा शुरू की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा।
  4. उज्जैन में बनाए जा रहे 6 नए ग्रिड कहां स्थित होंगे?
    132 केवी ग्रिड त्रिवेणी विहार और चिंतामण हासमपुरा में, और 33/11 केवी ग्रिड चारधाम, नानाखेड़ा, सदावल और वाल्मीकि धाम में स्थापित किए जाएंगे।
  5. सिंहस्थ को वैश्विक स्तर पर कैसे प्रचारित किया जाएगा?
    सिंहस्थ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को डिजिटल माध्यमों से प्रचारित कर इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की योजना बनाई गई है।

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