सिंगरौली बैंक डकैती : नेपाल से इंटरनेट कॉलिंग के जरिए मिल रहे थे निर्देश, पांचों आरोपी 18 से 22 साल के
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में 17 अप्रैल को बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 15 करोड़ रुपए की डकैती हुई।
- डकैती का मास्टरमाइंड नेपाल में बैठकर इंटरनेट कॉलिंग के जरिए पूरी साजिश को अंजाम दे रहा था।
- गिरोह के पांचों सदस्यों की उम्र 18 से 22 साल के बीच है और सब पेशेवर अपराधी हैं।
- एक महीने पहले से बदमाश किराए के कमरे में रहकर कई बैंकों की रेकी कर रहे थे।
- पुलिस ने 10 विशेष टीमें बनाई हैं और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।
15 करोड़ की डकैती और नेपाल का कनेक्शन
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के बैढ़न इलाके में 17 अप्रैल 2026 को बैंक ऑफ महाराष्ट्र में दिनदहाड़े 15 करोड़ रुपए की डकैती हुई। यह कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी। इसके पीछे एक पूरी योजना थी जो नेपाल से तैयार की गई थी पुलिस जांच में सामने आया कि इस डकैती का मास्टरमाइंड नेपाल में बैठा था। वह इंटरनेट कॉलिंग के जरिए गिरोह को निर्देश दे रहा था। डकैती के दिन भी उसी ने तय किया कि कब और कैसे वारदात को अंजाम देना है।
कैसे रची गई पूरी साजिश?
गिरफ्तार आरोपित कमलेश कुमार ने पुलिस पूछताछ में बताया कि गैंग के सदस्य एक-दूसरे को ठीक से जानते भी नहीं थे। सभी को निर्देश नेपाल में बैठे हैंडलर से मिलते थे। यह पूरी साजिश इस तरह बनाई गई थी कि एक सदस्य के पकड़े जाने पर दूसरे तक पहुंचना मुश्किल हो। वारदात से करीब एक महीने पहले तीन आरोपित सिंगरौली के मोरवा थाना क्षेत्र में बड़ी मस्जिद के पास बदामी देवी का कमरा किराए पर लेकर रहने लगे। वे रोज सुबह निकलते और शाम तक रेकी करके वापस लौट आते।
गार्ड नहीं था, इसीलिए यह बैंक चुना
इन बदमाशों ने कई बैंकों की रेकी की। लेकिन बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में कोई सुरक्षा गार्ड नहीं था। यही कारण रहा कि नेपाल में बैठे आका ने इस बैंक को निशाना बनाने का फैसला किया। उसने 17 अप्रैल की तारीख तय की। उससे पहले दो और बदमाश भी सिंगरौली पहुंच गए। इस तरह पांच सदस्यों का यह गिरोह पूरी तरह तैयार था।
बिहार-झारखंड के पेशेवर अपराधी
इस गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सभी पांचों की उम्र महज 18 से 22 साल के बीच है। लेकिन इतनी कम उम्र में भी ये पेशेवर अपराधी की तरह काम कर रहे थे। वारदात के बाद ये लगातार जगह बदलते रहते हैं।
गिरफ्तार आरोपित कमलेश कुमार बिहार के नालंदा जिले के बाल बिगहा का रहने वाला है। वह हेलमेट पहनकर बैंक में घुसा था। मुख्य आरोपित फंटूश उर्फ ननकी भी नालंदा का ही है। राजेश कुमार झारखंड के गिरीडीह का रहने वाला है और पंकज शर्मा पश्चिमी सिंहभूम जिले का है। पांचवें आरोपित छोटू की उम्र 19 साल है और उसका स्थायी पता अभी नहीं मिल पाया है।
10 टीमें मैदान में, बैंक कर्मचारी भी संदेह के घेरे में
पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री के अनुसार फरार आरोपितों को पकड़ने के लिए 10 विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। साथ ही बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति ने गिरोह की मदद की। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड के जरिए नेपाल में बैठे सरगना तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
सिंगरोली बैंक डकैती सिर्फ एक स्थानीय अपराध नहीं है। यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क की तरफ इशारा करती है। नेपाल से इंटरनेट कॉलिंग के जरिए भारत में बड़े अपराध को अंजाम देना सीमा पार अपराध का नया और खतरनाक तरीका है। यह भारत की आंतरिक सुरक्षा और बैंकिंग व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। 18 से 22 साल के युवाओं का इस तरह के संगठित अपराध में शामिल होना एक बड़ी सामाजिक समस्या की ओर भी ध्यान दिलाता है। बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था की खामियां इस मामले में उजागर हुई हैं जिन पर तत्काल ध्यान देना जरूरी है।
3 जरूरी FAQ
सवाल 1: सिंगरौली बैंक डकैती में नेपाल कनेक्शन कैसे सामने आया?
गिरफ्तार आरोपित कमलेश कुमार की पुलिस पूछताछ में यह खुलासा हुआ। उसने बताया कि गिरोह के सभी सदस्यों को निर्देश नेपाल में बैठे एक हैंडलर से मिलते थे। यह हैंडलर इंटरनेट कॉलिंग के जरिए संपर्क में रहता था। डकैती के दिन भी उसी ने बताया कि कब और कैसे वारदात करनी है। पुलिस अब तकनीकी साक्ष्य और कॉल रिकॉर्ड खंगालकर उस सरगना तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
सवाल 2: बैंक आफ महाराष्ट्र को ही क्यों निशाना बनाया गया?
बदमाशों ने एक महीने तक सिंगरौली के कई बैंकों की रेकी की। बैंक आफ महाराष्ट्र की बैढ़न शाखा में कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था। यही कमजोरी देखकर नेपाल में बैठे मास्टरमाइंड ने इस बैंक को चुना और 17 अप्रैल की तारीख तय की। यह मामला बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
सवाल 3: क्या इस मामले में बैंक के अंदर का कोई कर्मचारी भी शामिल हो सकता है?
पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री ने बताया कि बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है ताकि किसी आंतरिक संलिप्तता का पता लगाया जा सके। अभी तक इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है।
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