सिंगरौली कोयला खदान पर विधानसभा में टकराव, हाथी कॉरिडोर को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

Ramanand Tiwari | Jul 21, 2026, 22:28 IST
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मध्य प्रदेश विधानसभा में सिंगरौली कोयला खदान को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने आए। हाथी कॉरिडोर में खनन का आरोप, एनजीटी का नोटिस और अडानी समूह की भूमिका चर्चा में है।

मुख्य बातें (Key Points)

  • सिंगरौली कोयला खदान पर विधानसभा में तीखी बहस।
  • विपक्ष ने हाथी कॉरिडोर में खनन की अनुमति का आरोप लगाया।
  • सरकार ने कहा- कोल ब्लॉक एलिफेंट कॉरिडोर से 5 किमी दूर है।
  • 1,397.54 हेक्टेयर वन भूमि का आवंटन नियमानुसार हुआ।
  • एनजीटी ने केंद्र, राज्य सरकार और अडानी समूह को नोटिस जारी किया।
  • फर्जी गेहूं-धान खरीदी का मुद्दा भी सदन में उठा।

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सिंगरौली की कोयला खदान का मुद्दा जोरदार बहस का कारण बना। विपक्ष ने आरोप लगाया कि हाथियों के विचरण क्षेत्र में खनन की मंजूरी देकर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की गई है। वहीं सरकार ने साफ कहा कि जिस वन भूमि का आवंटन हुआ है, वह एलिफेंट कॉरिडोर का हिस्सा नहीं है और पूरी प्रक्रिया कानून के मुताबिक पूरी की गई है।



क्या है पूरा विवाद?

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि सिंगरौली की संवेदनशील वन भूमि को कोयला खनन के लिए आवंटित किया गया है। उनका कहना था कि यह इलाका हाथियों के प्राकृतिक आवागमन से जुड़ा है, इसलिए खनन की अनुमति पर्यावरण के लिए खतरा बन सकती है।



सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी पेश कर रहा है। वन विभाग के अनुसार, खदान के लिए आवंटित भूमि और वास्तविक एलिफेंट कॉरिडोर के बीच करीब 5 किलोमीटर की दूरी है।



सरकार ने क्या दी सफाई?

सरकार ने सदन में बताया कि सिंगरौली में कुल 1,397.54 हेक्टेयर वन भूमि को कोयला खनन के लिए आवंटित किया गया है। वन विभाग का कहना है कि यह क्षेत्र अधिसूचित एलिफेंट कॉरिडोर का हिस्सा नहीं है। इसलिए खनन की अनुमति देते समय किसी भी पर्यावरणीय या कानूनी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ।



एनजीटी भी कर रहा है मामले की सुनवाई

इस मामले ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मामले का संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और अडानी समूह को नोटिस जारी किया है। सभी पक्षों से इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।



सदन में दूसरा मुद्दा भी गरमाया

कोयला खदान विवाद के साथ विधानसभा में फर्जी गेहूं और धान खरीदी का मुद्दा भी उठा। विपक्ष ने सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने दोनों मामलों में नियमों के पालन का दावा दोहराया।



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