सिंगरौली विकास प्राधिकरण को भंग करना ही भूली सरकार, फर्जी आदेश वायरल हुआ तब आया होश
फर्जी आदेश पर अध्यक्ष बने वीरेंद्र गोयल, डिप्टी सीएम ने मिठाई भी खिला दी
सच! एमपी गजब है- सबसे अजब है। कभी मंत्रालय में फर्जी आईएएस इंस्पेक्शन कर जाता है तो कभी 90 डिग्री का पुल बनकर तैयार हो जाता है। मगर ये वाला मामला इनसे 21 है। आज thesootr बड़े- बड़े झोल उजागर करने जा रहा है।
भरी गर्मी में निगम- मंडलों में नियुक्तियों का मूसलाधार दौर चला। इसी क्रम में एक मई 2026 को सिंगरौली विकास प्राधिकरण में भी वीरेंद्र गोयल को अध्यक्ष पद से नवाजा गया। वीरेंद्र गोयल भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और सिंगरौली जिले के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उनको नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाइयों का दौर चला। यहां तक कि डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने भी मुंह मीठा कराया। मगर अब यहीं वीरेंद्र गोयल के साथ मोय- मोय हो गई… यह मिठाई उनके मन को खट्टा कर सकती है।
दरअसल वीरेंद्र गोयल की नियुक्ति का आदेश ही फर्जी है...
और इससे भी जोरदार गफलत यह कि जब प्रदेश के सारे निगम-मंडलों को भंग करने का आदेश जारी हुआ, तब सरकार सिंगरौली विकास प्राधिकरण को भंग करना ही भूल गई। अब इस फर्जी नियुक्ति आदेश के वायरल होने के बाद मंत्रालय में हड़कंप मचा है।
दरअसल सिंगरौली विकास प्राधिकरण को लेकर वीरेंद्र गोयल की चिट्ठी तो किसी बाहरी का खेल है। इस खबर की फैक्ट फाइंडिंग में thesootr को एक अलग ही तरह की लापरवाही पता चली है।
हुआ यूं कि 13 फरवरी 2024 को सीएम मोहन यादव के निर्देश के बाद प्रदेश के निगम-मंडल के अशासकीय पदाधिकारियों की नियुक्तियां निरस्त कर दी गई थीं। इस पत्र में भी जिन 46 निगम-मंडलों की सूची लगाई गई थी, तब भी अफसरों ने नियम-कायदों को देखे बिना आंख बंद करके रेरा को इस लिस्ट में शामिल कर दिया था और साहब लोग सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नाम लिखना ही भूल गए।
ऐसे में सिंगरौली विकास प्राधिकरण में तकनीकी तौर पर अभी भी दिलीप शाह ही अध्यक्ष हैं। मजेदार यह है कि दिलीप शाह न सिर्फ अध्यक्ष हैं, बल्कि वे सरकार से फंड लेकर करोड़ों के काम भी करवाते रहे।
(निगम-मंडल भंग करने का पत्र देखिए, सिंगरौली का नाम ही नहीं है)
बताया जा रहा है कि इसी पेंच के चलते सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नए अध्यक्ष का नाम अटका हुआ है; क्योंकि पहले पुराने अध्यक्ष को हटाने का नोटिफिकेशन जारी होगा। ऐसे में अंदर ही अंदर इस गलती को सुधारने की तैयारी चल रही है। इधर फर्जी चिट्ठी के आधार पर वीरेंद्र गोयल के नाम के होर्डिंग-पोस्टर तक लग गए और खुद गोयल वरिष्ठ नेताओं से आशीर्वाद लेते रहे।
इधर…. Thesootr की पड़ताल में फर्जी निकली चिट्ठी
Thesootr सभी तथ्यों की पड़ताल के बाद आपको बता रहा है कि सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष के लिए वीरेंद्र गोयल के नाम का पत्र अभी तक निकला ही नहीं है। बस एक पत्र वायरल हुआ और प्रदेश में लगातार हुई नियुक्तियों की बधाई के शोर में किसी ने जांचने तक की जहमत न उठाई। जबकि इस चिट्ठी में ही कई झोल साफ दिख रहे हैं। आइए हम बताते हैं-
- आदेश को जिस डिजाइन में तैयार करवाया गया है, वह बेहद कैजुअल है।
- सबसे ऊपर आदेश के साथ फॉन्ट हिला हुआ है, जो साफ तौर पर AI या Canva जैसे टूल का कमाल है।
- सबसे बड़ी बात यह कि जिन अवर सचिव अजय कुमार सिंह के नाम से पत्र जारी हुआ है, इस नाम का कोई अधिकारी पूरे मंत्रालय में ही नहीं है।
यह है वीरेंद्र गोयल की नियुक्ति का फर्जी पत्र जो वायरल हो गया
बड़ा सवाल- कहां से जारी हुई चिट्ठी?
जब संबंधित मंत्रालय से वीरेंद्र गोयल के सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष बनने की चिट्ठी जारी ही नहीं हुई, तो यह फर्जी पत्र किसने तैयार करवाया? अब यह सवाल सबसे बड़ा है क्योंकि जिस दिन यानी एक मई को कई और निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर खबरें चल रही थीं, मगर मीडिया में यही चिट्ठी वायरल हुई।
नहीं जारी हुआ कोई पत्र
मैं क्या कह सकता हूं
क्या कहते हैं पूर्व अध्यक्ष दिलीप शाह
सिंगरौली विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष कहते हैं कि मीडिया से ही वीरेंद्र गोयल की नियुक्ति के बारे में सुना है। मेरे पास तो मेरा खुद का कार्यकाल खत्म होने का भी कोई पत्र नहीं आया। मैं तो हाल ही में सरकार से करीब दो करोड़ के विकास कार्यों की सौगात भी लेकर आया हूं। इसके लिए सरकार का धन्यवाद…
ये खबर भी पढ़िए... सिंगरौली बैंक डकैती : नेपाल से इंटरनेट कॉलिंग के जरिए मिल रहे थे निर्देश, पांचों आरोपी 18 से 22 साल के
सिंगरौली बैंक लूट के बाद एक्शन में एमपी पुलिस, होटलों और किराएदारों की कर रही चैकिंग
MP News: मध्यप्रदेश के सिंगरौली की बैंक डकैती का बिहार कनेक्शन, 10 टीमें बनाई तब पकड़े गए दो आरोपी
सिंगरौली के बैंक में दिनदहाड़े डकैती, 5 नकाबपोश 15 मिनट में 15 करोड़ का सोना और 20 लाख कैश ले उड़े