सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में घोटाले का आरोप, पुराने खंभों पर चांदी का रंग; 40 ट्रांसफॉर्मर का रिकॉर्ड गायब

Sumit Kumar | Sept 28, 2026, 08:56 IST
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में बिजली लाइन शिफ्टिंग के कामों पर सवाल उठे हैं। Photograph: (The Sootr)
उज्जैन सिंहस्थ 2028 की बिजली तैयारियों में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। बिजली लाइन शिफ्टिंग के कामों में पुराने पोल, केबल और उपकरणों के इस्तेमाल का दावा किया गया है। वहीं कई ट्रांसफॉर्मर के रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात कही जा रही है।

2028 उज्जैन सिंहस्थ की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इसके लिए हजारों करोड़ रुपए के विकास कार्य किए जा रहे हैं। बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी बड़ी राशि मंजूर की गई है। इसी बीच बिजली लाइन शिफ्टिंग के कामों में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं।



आरोप है कि कई जगह नई सामग्री लगाने के बजाय पुराने पोल, केबल और उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल किया गया है। वहीं कुछ मामलों में पुराने ट्रांसफॉर्मर का रिकॉर्ड भी नहीं मिलने की बात कही जा रही है। बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए करीब 250 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।



250 करोड़ के कामों में जांच के सवाल

सिंहस्थ क्षेत्र में बिजली लाइनों की शिफ्टिंग का काम पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की निगरानी में चल रहा है। करीब 75 लाइनों को नए स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।



जांच में तीन लाइनों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि जहां नए पोल लगाने थे वहां बड़ी संख्या में पुराने पोल लगाए गए हैं। इन पोलों पर सिर्फ नए रंग की पुताई कर दी गई है।



इतना ही नहीं, आरोप यह भी लग रहे हैं कि पुराने तार, केबल और अन्य सामग्री भी दोबारा लगाई गई हैं। जबकि नियमों के अनुसार लाइन शिफ्टिंग में नई सामग्री का उपयोग किया जाता है।



भुगतान और काम के तरीके पर सवाल

इस मामले में आरोप है कि जिन फर्मों के नाम पर काम मंजूर हुआ था, उनके बजाय दूसरे लोगों से काम कराया जा रहा था। यानी काम का ठेका किसी और के नाम था, लेकिन काम कोई और कर रहा था। कुछ अधिकारियों पर भी ऐसी व्यवस्था में भूमिका निभाने के आरोप हैं। हालांकि, इस मामले पर विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।



नियमों का पालन नहीं किया गया

बिजली लाइन शिफ्ट करने के काम के लिए कुछ नियम तय हैं। इसमें योग्य ठेकेदार से काम कराना, काम शुरू करने से पहले मौके का सर्वे करना और पुरानी सामग्री को सुरक्षित रखना शामिल है।



आरोप है कि कई जगह इन नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया।



GIS सर्वे को लेकर भी सवाल

नियमों के मुताबिक बिजली लाइन शिफ्ट करने से पहले GIS सर्वे (जमीन पर मौजूद पोल, तार और उपकरणों की जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया) किया जाना चाहिए। इससे पुराने पोल, तार और दूसरे उपकरणों की स्थिति रिकॉर्ड में रहती है।



जांच में दावा किया गया है कि कई जगह यह सर्वे किया ही नहीं गया। ऐसे में पुरानी सामग्री की सही स्थिति और उसकी जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सकी।



पुरानी सामग्री जमा करने में गड़बड़ी

नियम के मुताबिक बिजली लाइन हटाने के बाद पुराने पोल, केबल और दूसरे सामान को बिजली विभाग के स्टोर में जमा करना होता है।



आरोप है कि कई जगह रिकॉर्ड में जितनी सामग्री जमा दिखाई गई, मौके पर उतनी मिली ही नहीं। कुछ मामलों में पुरानी सामग्री को खराब बताकर दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है।



मौके पर पुराने पोल मिलने का दावा

उज्जैन के कुछ इलाकों में लाइन शिफ्टिंग के बाद भी पुराने पोल लगे होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ पोल पर किया गया सिल्वर पेंट आसानी से निकल रहा है। इससे इन पोलों के पुराने होने की आशंका जताई गई।



कुछ स्थानों पर पोल की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई पोल में कंक्रीट बेस की व्यवस्था नहीं दिखी।



सुरक्षा से भी खिलवाड़

शहर में बिजली की लाइनों को लेकर सुरक्षा के कुछ नियम तय हैं। घरों और दुकानों से लाइन की उचित दूरी रखना और पोल को मजबूत हालत में रखना जरूरी होता है।



जांच में दावा किया गया है कि कुछ जगहों पर 11 केवी की लाइन घरों और दुकानों के काफी करीब मिली। वहीं, कुछ पोल भी कमजोर हालत में मिले।



सिंहस्थ के दौरान इन्हीं रास्तों से वीआईपी लोगों की आवाजाही प्रस्तावित है। ऐसे में बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।



ट्रांसफॉर्मर का रिकॉर्ड भी गायब

सदावल हेलीपैड क्षेत्र के पास पुराने ट्रांसफॉर्मर से जुड़े कुछ पोल मिले हैं, लेकिन मौके पर ट्रांसफॉर्मर नहीं मिला।



आरोप है कि सिंहस्थ क्षेत्र में लगे कई ट्रांसफॉर्मर का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कुछ उपकरणों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया हो सकता है।



क्या है सिंहस्थ मेला?

सिंहस्थ भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। यह उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे आयोजित किया जाता है। जब बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करता है, तब इस मेले का आयोजन होता है। सिंहस्थ करीब 12 साल में एक बार आयोजित होता है। इसमें देशभर से साधु-संत, अखाड़े और लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण इस आयोजन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। उज्जैन सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के काम चल रहे हैं।



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