हे #sircar वतन की गाड़ी है, वतन के काम में लीजिए
- भोपाल के बिट्टन मार्केट में “मप्र शासन” सब्जी खरीद रहा था तो...
- “केंद्र सरकार” 6 नंबर पर मोमोज दबाने में व्यस्त दिखी...
- जबलपुर के समदड़िया मॉल में सरकार मूवी के मजे ले रही थी…
गणतंत्र दिवस पर सरकारी गाड़ियों की ये खबर आखिर क्या है? आप ये भी पूछ सकते हैं कि इसमें क्या खास है?
बिल्कुल सही सोच रहे हैं आप! 'Thesootr' भी यही कहता है- सोचिए और सवाल कीजिए...
- सवाल- जिम्मेदारी तय करने के...
- सवाल- नियम-कायदों को मानने के…
और गणतंत्र दिवस से बेहतर दिन और क्या हो सकता है- जिम्मेदारी पर बात करने के लिए…
क्या वास्तव में ऐसा ही हो रहा है?
याद है आपको इसी महीने राजस्थान के कोटा का वो वीडियो… जहां म्युनिसिपल ऑफिसर वीकेंड पर सरकारी गाड़ी से शॉपिंग करते दिखीं। एक नागरिक ने इसका वीडियो बनाकर साझा किया।
ध्यान दें - एक नागरिक… जिसने अपनी ड्यूटी निभाई- सवाल उठाकर…
मगर ये अकेला मामला नहीं है, 'thesootr' की टीम ने सिर्फ भोपाल, जबलपुर और रायपुर के बड़े मॉल्स को रेंडम चेक किया तो तस्वीर डराने वाली मिलीं… इनमें से कुछ का जिक्र हमने ऊपर किया है तो कुछ तस्वीरें और देखिए-
देखिए फोटो...
देखा आपने- मुफ्त का चंदन, घिस मेरे नंदन…
सरकारी गाड़ियों के मामले में “sir Car” जैसा ट्रीटमेंट हो रहा है।
आपके- हमारे टैक्स के पैसे से गाड़ी साहब को मिली है और मजे साहब की फैमली ले रही हैं…
साहबों के बच्चों को स्कूल छोड़ने से लेकर सब्जी-भाजी और वीकेंड पर आउटिंग तक सरकारी खर्चे से की जा रही है।
देखें वीडियो....
कोई जवाबदेही है?
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कर्ज में डूबी सरकारों को ओर कर्जदार बना रही इस आदत पर कौन लगाम लगाएगा?
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जवाब है: हम और आप
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बिल्कुल! ऐसी ही छोटी- छोटी जवाबदारियां तय करने से ही तो हम एक अच्छे राष्ट्र बन सकेंगे
तो आइए जुड़िए thesootr के अभियान #sircar से…
आपको क्या करना है?...
- जहां भी सरकारी गाड़ी को ऑफ ड्यूटी देखें
- ड्यूटी टाइम के बाद देखें
- अफसरों की फैमिली के साथ देखें
- या फिर ऐसी जगह देखें, जहां नहीं होना चाहिए तो
जागरूकता के साथऐसी सरकारी गाड़ियों की नंबर प्लेट के साथ फोटो खींचे और वीडियो बनाएं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अच्छे से कैप्शन और #sircar के साथ अपलोड कर दें।
ध्यान रखें...
- ऐसा करते समय आपको
- अफसर, ड्राइवर या उनके परिजनों के साथ लड़ना नहीं है।
- बहस भी नहीं करना है।
- सिर्फ वीडियो या फोटो लेना है।
- हो सके तो ड्राइवर से या किसी दूसरे तरीके से सिर्फ ये पता कर लें कि किस अधिकारी की गाड़ी है और किस काम से आई है।
क्या सच में इससे कुछ बदलेगा...
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बिल्कुल! बदलाव के लिए छोटी- छोटी कोशिशों की ही जरूरत होती है।
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धीरे- धीरे जब सरकार और सरकारी नुमाइंदों को पता चलेगा कि उन पर जनता की नजर है तो बदलाव जरूर आएगा।
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उम्मीद रखिए। यही गणतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है…
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तो वोटर नहीं, नागरिक बनिए…
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सवाल पूछिए
जय हिंद...
द सूत्र अभियान...