छठवीं का बच्चा टॉफियां देकर बोला... नाली ठीक करा दो सर, बदबू आ रही है
ऐसे समझें मामला...
- छठवीं के बच्चे ने CEO को टॉफियां दीं।
- संजय कालोनी में दो माह से भरा गंदा पानी।
- बोर करने से फूटी सीवर लाइन बनी समस्या।
- पहली जनसुनवाई में भी शिकायत हुई थी।
- CEO ने तुरंत निगम अधिकारियों को दिए आदेश।
जब एक नौ साल का बच्चा अपनी जेब में टॉफियां भरकर जनसुनवाई में पहुंचे और अधिकारी की मेज पर रख दे, तो समझिए कि व्यवस्था से उसे भी शिकायत है।
संजय कालोनी के छठवीं के छात्र मानवेंद्र सिंह ने ठीक ऐसा ही किया। उसने जिला पंचायत CEO कमलेश भार्गव को टॉफियां देकर सीवर की बदबू और गंदे पानी की समस्या सुलझाने की गुहार लगाई।
बच्चे की साहसी पहल
मंगलवार को कलेक्टोरेट में जनसुनवाई (Public Hearing) हो रही थी। संजय कालोनी निवासी नौ वर्षीय मानवेंद्र सिंह वहां पहुंचा। उसके हाथ में एक आवेदन और चार टॉफियां थीं। वह सीधे जिला पंचायत CEO कमलेश भार्गव की टेबल पर पहुंचा। उसने टॉफियां मेज पर रखीं और कहा कि श्रीमान, अगर ले-देकर काम होता है तो यह लीजिए। यह दृश्य देख सभी अधिकारी स्तब्ध रह गए।
सीवर लीकेज से परेशान कालोनी
मानवेंद्र ने बताया कि उनकी गली में पंडित चक्की के पास गंदा पानी भरा है। दो महीने पहले पड़ोसी ने बोर कराया था। उससे सीवर लाइन फूट गई और गंदा पानी गली में फैल गया। अब पैदल निकलना भी दूभर हो गया है। स्कूल जाने के लिए उसे रोज इसी गंदगी से गुजरना पड़ता है।
पहले भी की थी शिकायत
मानवेंद्र ने बताया कि वह पांच मई की जनसुनवाई (Jan Sunwai) में भी आया था। उस समय CEO ने नगर निगम की टीम भेजने का आश्वासन दिया था, लेकिन दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी कोई नहीं आया।
हालात जस के तस बने रहे। तब मानवेंद्र ने यह अनोखा तरीका अपनाया। उसकी शिकायत में बचपन की मासूमियत और व्यवस्था के प्रति गहरी निराशा दोनों झलक रही थीं।
अधिकारी हुए सक्रिय
बच्चे के इस अनूठे विरोध (Unique Protest) को देख जिला पंचायत CEO कमलेश भार्गव भी भावुक हो गए। उन्होंने तत्काल नगर निगम के अधिकारियों को फोन किया। समस्या का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए। यह एक बड़ा उदाहरण है कि जब आम नागरिक- चाहे वो बच्चा हो आवाज उठाता है, तो व्यवस्था को हिलना पड़ता है।
स्वच्छता और नागरिक अधिकार
सीवर लाइन की समस्या (Sewer Line Problem) सिर्फ संजय कालोनी की नहीं है। देश के अनेक शहरों में इस तरह की लापरवाही देखी जाती है। नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है। मानवेंद्र जैसे बच्चों की पहल समाज को यह याद दिलाती है कि अधिकार मांगने के लिए उम्र की जरूरत नहीं होती। जनसुनवाई जैसी व्यवस्था इसीलिए बनाई गई है।
बाल जागरूकता की मिसाल
मानवेंद्र का यह कदम बाल जागरूकता (Child Awareness) की एक प्रेरक मिसाल है। उसने न सिर्फ अपनी समस्या रखी, बल्कि व्यवस्था की कमजोरी पर भी कटाक्ष किया। टॉफियां देना प्रतीकात्मक था। इसका अर्थ था कि हम भी जानते हैं कि यहां कैसे काम होता है। यह साहस और समझदारी किसी भी बड़े की सोच से कम नहीं थी।
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