सोम ग्रुप की फिर बढ़ी मुश्किलें, ईओडब्ल्यू ने की एक और नई शिकायत
समझें क्या है पूरा मामला...
- सोम ग्रुप के खिलाफ EOW ने नई शिकायत भेजी है।
- इस शिकायत को पुरानी शिकायत से जोड़ा गया है।
- मामला वाणिज्यिक कर विभाग को जांच के लिए भेजा गया है।
- शिकायत में 1000 करोड़ रुपए से अधिक वसूली की मांग है।
- फिलहाल कंपनी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
भोपाल में शराब कारोबार से जुड़े सोम ग्रुप की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW यानी Economic Offences Wing) ने कंपनी के खिलाफ नई शिकायत भेजी है। यह शिकायत सीधे वाणिज्यिक कर विभाग को भेजी गई है।
सोम ग्रुप में दो कंपनियां शामिल हैं। पहली मेसर्स सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और दूसरी मेसर्स सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड है। दोनों कंपनियों के संचालकों पर पहले से कई आरोप लगे हैं। अब जांच एजेंसी ने मामला और आगे बढ़ा दिया है।
नई शिकायत में क्या हुआ
EOW को सोम ग्रुप के खिलाफ एक नई शिकायत मिली थी। इस शिकायत का क्रमांक 451/26 रखा गया है। एजेंसी ने इसे पुरानी शिकायत से जोड़ दिया है। पुरानी शिकायत का क्रमांक 833/26 है। यह शिकायत पहले से जांच एजेंसी के पास लंबित थी। दोनों शिकायतों को अब साथ में देखा जाएगा।
EOW ने दोनों मामलों की फाइल विभागीय परीक्षण के लिए भेजी है। यह फाइल प्रमुख सचिव, वाणिज्यिक कर विभाग को सौंपी गई है। अब आगे की जांच इसी विभाग के हाथ में है।
क्या थी शिकायत
शिकायत में सोम डिस्टिलरीज से बड़ी रकम वसूलने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा वसूली मांगी है। यह आरोप बेहद गंभीर बताया जा रहा है।
आरोप है कि कंपनी ने दो हजार 203 फर्जी आबकारी परमिटों का इस्तेमाल किया। इन परमिटों के जरिए शराब का अवैध परिवहन किया गया। इससे सरकार को 920 करोड़ 66 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ, ऐसा दावा है।
शिकायत में कुछ और गंभीर आरोप भी शामिल हैं। इसमें 39 बाल मजदूरों को गैरकानूनी तरीके से काम पर रखने का आरोप है। साथ ही 33 करोड़ 53 लाख रुपए की जीएसटी (GST यानी Goods and Services Tax) चोरी का आरोप भी लगाया गया है।
शिकायत में रोके गए वैट (VAT यानी Value Added Tax) का जिक्र भी है। इसके अलावा अंतरराज्यीय तस्करी जैसे उल्लंघनों का भी खुलासा किया गया है। कुल मिलाकर आरोपों की सूची काफी लंबी है।
EOW के पत्र में क्या लिखा
EOW ने पत्र के जरिए अपनी बात साफ रखी है। एजेंसी ने कहा है कि पहले वाणिज्यिक कर विभाग मामले की जांच करे। यदि जांच में गड़बड़ी बड़ी लगती है, तो मामला वापस भेजा जाए।
नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। विभाग की अनुशंसा के साथ फाइल दोबारा EOW के पास आ सकती है। इसके बाद ही आगे कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।
फिलहाल कंपनी के खिलाफ कोई भी एफआईआर (FIR यानी First Information Report) दर्ज नहीं हुई है। EOW की आगे की कानूनी कार्रवाई विभाग की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। यानी अभी मामला शुरुआती चरण में ही है।
पहले से विवादों में कंपनी
सोम ग्रुप पहले से भी कई विवादों में घिरा रहा है। कंपनी का शराब लाइसेंस भी विवादों में रहा है। आबकारी विभाग की निविदा को लेकर मामला अदालत में भी चल रहा है। जबलपुर हाईकोर्ट में इस पर लगातार सुनवाई हो रही है।
कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्द फैसला देने को कहा था। वहीं, हाईकोर्ट ने माना कि इतने कम समय में फैसला देना मुश्किल है। अदालत ने 831 पन्नों की एक संशोधित याचिका भी स्वीकार की है।
निविदा प्रक्रिया के नौ सफल बोलीदाताओं को भी इस केस में पक्षकार बनाया गया है। इससे पहले भी कंपनी का आबकारी लाइसेंस रद्द हो चुका है। यानी सोम ग्रुप के खिलाफ मामले कई मोर्चों पर चल रहे हैं।
आगे क्या होगा असर
अब सबकी नजर वाणिज्यिक कर विभाग की जांच पर है। यदि विभाग ने गड़बड़ी की पुष्टि की, तो मामला फिर EOW के पास जाएगा। इसके बाद कानूनी कार्रवाई और तेज हो सकती है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो कंपनी पर बड़ी वसूली हो सकती है। आबकारी और कर विभाग की तरफ से भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। यह मामला शराब कारोबार के नियमों पर भी असर डाल सकता है।
सोम ग्रुप का यह मामला अकेला नहीं है। कंपनी के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। हर बार जांच एजेंसियां नए सिरे से पड़ताल में जुटी हैं।
राजस्व चोरी और फर्जी परमिट जैसे आरोप गंभीर श्रेणी में आते हैं। ऐसे मामलों में अक्सर कई विभाग मिलकर जांच करते हैं। आबकारी, वाणिज्यिक कर और EOW तीनों का जुड़ना इसे बड़ा मामला बनाता है।
बाल मजदूरों के गैरकानूनी नियोजन का आरोप भी अलग से गंभीर है। श्रम कानूनों के तहत यह गंभीर अपराध माना जाता है। जांच में आरोप सही निकलने पर अलग कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल पूरा मामला दस्तावेजी जांच के दौर में है। कोई भी अंतिम फैसला विभागीय रिपोर्ट के बाद ही आएगा। तब तक कंपनी और शिकायतकर्ता दोनों का इंतजार जारी रहेगा।
आने वाले दिनों में इस मामले पर और अपडेट सामने आ सकते हैं। वाणिज्यिक कर विभाग की जांच रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। जैसे ही नई जानकारी मिलेगी, वैसे ही उसे साझा किया जाएगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम लोगों के पैसे और सरकारी राजस्व से जुड़ी है। अगर फर्जी परमिट और टैक्स चोरी के आरोप सही निकलते हैं, तो इसका नुकसान सीधे जनता को होता है। सरकारी खजाने में कमी का असर विकास कार्यों पर भी पड़ता है। बाल मजदूरों के गैरकानूनी नियोजन का आरोप संविधान में दिए गए बाल अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच जरूरी है ताकि सच सामने आ सके। फिलहाल कंपनी पर कोई FIR दर्ज नहीं हुई है, इसलिए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। कानून के मुताबिक हर पक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है। यह खबर सरकारी विभागों की जवाबदेही और नियमों के पालन को दिखाती है।
FAQ
- सोम ग्रुप के खिलाफ EOW ने क्या शिकायत भेजी है?
EOW ने सोम ग्रुप के खिलाफ मिली नई शिकायत क्रमांक 451/26 को पुरानी शिकायत क्रमांक 833/26 के साथ जोड़ दिया है। यह पूरा मामला विभागीय परीक्षण के लिए वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा गया है। शिकायत में 1,000 करोड़ रुपए से अधिक वसूली की मांग की गई है। - सोम डिस्टिलरीज पर कौन-कौन से आरोप लगे हैं?
कंपनी पर 2,203 फर्जी आबकारी परमिटों से अवैध शराब परिवहन का आरोप है, जिससे 920.66 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान बताया गया है। इसके अलावा 39 बाल मजदूरों के गैरकानूनी नियोजन, 33.53 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी, रोके गए वैट और अंतरराज्यीय तस्करी के आरोप भी शामिल हैं।
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