चार जजों से दूर हुआ सोम डिस्टिलरीज केस, राहत नहीं मिली तो अब चीफ जस्टिस की बेंच में अपील
News in Short
- जस्टिस विवेक अग्रवाल ने अंतरिम राहत से किया इनकार
- पहले तीन जजों के सामने नहीं रखा जा सका मामला, अब डिविजन बेंच में होगी सुनवाई
- सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से अंतरिम राहत नहीं मिली।
- जस्टिस विवेक अग्रवाल ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
- राहत से इनकार के बाद कंपनी ने तुरंत डिविजन बेंच में अपील दायर की।
- पहले जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस संदीप एन. भट्ट सुनवाई से अलग हो चुके हैं।
- अब मामला चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में सोमवार को सुना जाएगा।
News In Detail
विवादों में घिरी सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस निलंबन मामला अब एक असाधारण कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कंपनी को फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
राहत न मिलने के तुरंत बाद कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दी है। अब यह मामला सोमवार को चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
खास बात यह है कि इस पूरे प्रकरण में अब तक चार न्यायाधीशों की बेंच के सामने मामला नहीं रखा जा सकता, जिससे यह मामला हाईकोर्ट में एक अनोखा उदाहरण बन गया है।
नकली परमिट से अवैध शराब का परिवहन
लाइसेंस निलंबन से जुड़े सोम डिस्टलरी के मामले में पहले तो लगातार जज अपने आप को इस मामले की सुनवाई से अलग कर रहे थे। अब जब जस्टिस से विवेक अग्रवाल ने इस मामले की सुनवाई की और सोम को कोई राहत नहीं मिली तो वह इस आदेश के खिलाफ अपील दायर कर चुका है।
दरअसल 4 फरवरी 2026 को राज्य के आबकारी विभाग ने सोम डिस्टिलरीज के सेहतगंज और रोजराजक (जिला रायसेन) स्थित दो लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। विभाग ने वर्ष 2023 के उस मामले को आधार बनाया था जिसमें आरोप था कि कंपनी से जुड़े लोगों ने नकली परमिट के जरिए अवैध शराब का परिवहन किया था।
इस मामले में देपालपुर की सत्र अदालत ने कंपनी से जुड़े कुछ कर्मचारियों को दोषी ठहराते हुए सजा भी सुनाई थी। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए सोम डिस्टिलरीज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और लाइसेंस निलंबन पर रोक की मांग की थी।
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आखिरकार जस्टिस विवेक अग्रवाल ने सुना मामला
सोम डिस्टिलरीज की याचिका पहले जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच में लगी थी, लेकिन उन्होंने बिना कारण बताए खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। इसके बाद मामला जस्टिस संदीप भट्ट की बेंच में पहुंचा, जहां भी प्रकरण आगे नहीं बढ़ सका और बेंच के समक्ष इसे सूचीबद्ध न करने का उल्लेख सामने आया।
इसके बाद आखिरकार यह मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच में आया, जहां सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
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कोर्ट ने क्यों नहीं दी थी तत्काल राहत
सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने अदालत को बताया कि लाइसेंस निलंबन के कारण कंपनी भविष्य में होने वाली सरकारी निविदाओं में भाग लेने से वंचित हो सकती है। उनका तर्क था कि यदि इस समय राहत नहीं दी गई तो कंपनी को अपूरणीय नुकसान होगा।
हालांकि अदालत ने कहा कि इस स्तर पर राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि भविष्य में याचिकाकर्ता सफल होते हैं तो उन्हें आर्थिक क्षतिपूर्ति दी जा सकती है, इसलिए फिलहाल राहत देने का आधार नहीं बनता।
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अब मामला पहुंचा चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में
सिंगल बेंच से राहत न मिलने के बाद सोम डिस्टिलरीज ने तुरंत इस आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दी है। अब यह मामला चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। कानूनी हलकों में इस अपील को लेकर काफी उत्सुकता है, क्योंकि अब डिविजन बेंच यह तय करेगी कि कंपनी को अंतरिम राहत मिलती है या नहीं।
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चार जजों की बेंच से दूर हुआ मामला
इस पूरे प्रकरण की एक और असामान्य स्थिति यह है कि अब यह मामला हाईकोर्ट के चार जजों के सामने नहीं रखा जा सकता। याचिका दायर करते समय ही सोम डिस्टिलरीज की ओर से यह अनुरोध किया गया था कि मामले को जस्टिस रामकुमार चौबे की अदालत में सूचीबद्ध न किया जाए।
इसके बाद जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस संदीप एन. भट्ट पहले ही खुद को इस केस से अलग कर चुके हैं। अब जस्टिस विवेक अग्रवाल इस मामले में आदेश दे चुके हैं और उनके आदेश के खिलाफ अपील दायर हो चुकी है, इसलिए अपील भी उनकी बेंच के सामने नहीं जा सकती।
इसी वजह से यह मामला एक ऐसा विरला उदाहरण बन गया है जिसमें चार अलग-अलग न्यायाधीशों की बेंच के सामने इसे नहीं रखा जा सकता। अब सबकी नजर चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में होने वाली सुनवाई पर टिकी है।