सोम डिस्टिलरीज को सुप्रीम राहत: संशोधन के लिए 3 दिन की मोहलत, 2 हफ्ते में फैसला
समझें क्या है पूरा मामला...
- सोम डिस्टिलरीज के शराब लाइसेंस और निविदा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया।
- कोर्ट ने हाई कोर्ट को सभी मुद्दों पर साथ सुनवाई करने को कहा।
- पहले कुछ राहतों का मामला सिंगल बेंच को भेजा गया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश में संशोधन कर दिया है।
- अब पूरे मामले पर डिवीजन बेंच ही फैसला सुनाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
शराब लाइसेंस नवीनीकरण और आबकारी विभाग की निविदा से जुड़े सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच को निर्देश दिया है कि वह सभी मुद्दों पर एक साथ सुनवाई करे। शीर्ष अदालत का कहना है कि इससे मामले में एक समेकित फैसला आ सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के पुराने आदेश में भी संशोधन किया है।
यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने दिया। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की मुख्य रूप से दो शिकायतें हैं। दोनों शिकायतें आपस में जुड़ी हुई हैं। इसी वजह से दोनों पर एक साथ सुनवाई जरूरी बताई गई है।
क्या था विवाद
मामले की जड़ में दो अलग आदेश हैं। पहला आदेश 18 जून 2026 का है। इस आदेश में याचिकाकर्ता के विभिन्न शराब लाइसेंस नवीनीकरण के आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। दूसरा आदेश 12 जून 2026 को आबकारी आयुक्त ने जारी किया था। यह आदेश निविदा आमंत्रण सूचना यानी एनआईटी (Notice Inviting Tender) से जुड़ा था। इस एनआईटी में शर्त रखी गई थी कि आवेदन के लिए वैध शराब लाइसेंस होना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता ने इन दोनों शर्तों को एक ही रिट याचिका में चुनौती दी थी। यह याचिका क्रमांक 22400/2026 के तहत दाखिल हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों शिकायतें एक ही याचिका में साथ उठाई गई थीं। इसलिए दोनों का फैसला भी साथ होना चाहिए। यह याचिका सिविल अपील के जरिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
रोस्टर व्यवस्था से उलझन
अदालत ने बताया कि हाई कोर्ट में रोस्टर व्यवस्था की वजह से पेच फंसा। निविदा से जुड़े मामलों की सुनवाई डिवीजन बेंच के पास जाती है। वहीं लाइसेंस नवीनीकरण से जुड़े मामले सिंगल बेंच के समक्ष सूचीबद्ध होते हैं। इसी वजह से एक ही याचिका के दो हिस्से अलग अलग बेंच में बंट गए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे उचित नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि मामले की प्रकृति को देखते हुए एक साथ सुनवाई जरूरी थी।
शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश के पैरा-16 में संशोधन किया है। अब राहत क्रमांक पांच, छह और सात पर भी डिवीजन बेंच ही सुनवाई करेगी। पहले यह जिम्मेदारी सिंगल बेंच को दी गई थी।
हाई कोर्ट में पहले क्या हुआ
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 23 जून 2026 को अपना आदेश दिया था। उस आदेश में बेंच ने राहत क्रमांक एक, दो, तीन और चार में दखल देने से मना कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता के पास वैध शराब लाइसेंस नहीं है। इसी वजह से वह एनआईटी में आवेदन करने का पात्र नहीं था। इसके साथ ही बेंच ने राहत क्रमांक पांच, छह और सात पर फैसले के लिए मामला सिंगल बेंच को भेज दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस हिस्से को भी वापस डिवीजन बेंच के पास भेज दिया है।
यह मामला क्यों अहम है
यह विवाद सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। यह शराब कारोबार से जुड़े नियमों और निविदा प्रक्रिया से भी जुड़ा है। आबकारी विभाग हर साल शराब लाइसेंस और दुकानों की निविदा जारी करता है। इसमें शर्तें साफ और सबके लिए एक जैसी होनी चाहिए। अगर लाइसेंस और निविदा से जुड़े मामले अलग अलग बेंच में बंटते हैं, तो फैसलों में तालमेल बिगड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इसी उलझन को सुलझाने की कोशिश है। इससे भविष्य में भी ऐसे जुड़े हुए मामलों की सुनवाई का तरीका साफ हो सकता है।
अब आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट संभव हो तो दो सप्ताह के भीतर फैसला सुनाए। याचिकाकर्ता को तीन दिन के भीतर अपनी रिट याचिका में संशोधन करने की अनुमति भी दी गई है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सभी पक्ष हाई कोर्ट में अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र होंगे। इस आदेश से याचिकाकर्ता और आबकारी विभाग दोनों के लिए स्थिति साफ हो गई है।
अब पूरे मामले पर एक ही बेंच फैसला सुनाएगी। इससे कानूनी उलझन कम होने की उम्मीद है। पहले अलग अलग बेंच में सुनवाई से समय भी ज्यादा लग रहा था। अब एक साथ सुनवाई होने से मामला जल्दी निपट सकता है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्क डिवीजन बेंच के सामने रखेंगे। मामले पर अगली सुनवाई का इंतजार सभी पक्षों को रहेगा। आबकारी विभाग की निविदा प्रक्रिया पर भी इस फैसले का असर पड़ सकता है। कारोबार से जुड़े लोग भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
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