33 साल बाद MP में लौटेगी सोन चिरैया, राजस्थान से आएगा गोडावण
मध्य प्रदेश के ग्वालियर से लगभग 33 साल पहले गायब हो चुका सोन चिरैया यानी गोडावण पक्षी को अब फिर वापस लाया जाएगा। वन विभाग ने राजस्थान के सैम कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर से पक्षियों के जोड़े लाने का प्रस्ताव तैयार किया है।
यह पक्षी देश में अत्यंत संकटग्रस्त प्रजाति है और पूरे देश में सिर्फ लगभग 150 बचे हैं। ग्वालियर के सोन चिरैया सेंचुरी में इसे फिर बसाने की योजना है। इसके लिए पहले वहां घास के मैदान विकसित किए जाएंगे।
33 साल पहले क्यों गायब हुआ गोडावण
सोन चिरैया यानी गोडावण कभी ग्वालियर के जंगलों में बहुतायत में था। लेकिन धीरे-धीरे इसकी संख्या घटती गई। आखिरी बार यह पक्षी MP में करीब 33 साल पहले देखा गया था।
पूरे देश में अब केवल 150 के करीब गोडावण बचे हैं। इनमें से 135 पक्षी सिर्फ राजस्थान में हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में मुट्ठीभर ही बचे हैं।
राजस्थान में भी इनकी संख्या पहले छह हजार थी जो अब घटकर 135 रह गई है। यह पक्षी घास के मैदानों में रहता है। इसलिए घास की कटाई, बिजली के तार और शिकार इसकी घटती संख्या के मुख्य कारण हैं।
ग्वालियर में कहां बसाया जाएगा गोडावण
ग्वालियर वन प्रभाग के उप वन मंडलाधिकारी (एसडीओ) मनोज कुमार ने बताया कि ग्वालियर क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से इस पक्षी का प्राकृतिक आवास रहा है। इसलिए यहीं इसे दोबारा बसाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
योजना के तहत सबसे पहले बाराई गांव और पनिहार के आसपास के इलाकों में घास के मैदान विकसित किए जाएंगे। इससे पक्षी लाए जाने के बाद उनके बसने में आसानी होगी। ग्वालियर में सोन चिरैया सैंक्चुअरी पहले से मौजूद है। यह उसी सैंक्चुअरी के इलाके में होगा जहां यह पक्षी पहले रहता था।
राजस्थान के सैम सेंटर से आएंगे पक्षी
राजस्थान के जैसलमेर स्थित सैम कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण की संख्या बढ़ रही है। वन विभाग के अधिकारी इस सेंटर का दौरा करेंगे और वहां संरक्षण प्रक्रिया तथा आवास का अध्ययन करेंगे। इस ब्रीडिंग सेंटर में अंडों को कृत्रिम तरीके से सेने और फोड़ने का काम होता है। मार्च में वहां दो नए चूजे भी निकले।
एसडीओ मनोज कुमार ने बताया कि राजस्थान से केवल अंडे लाना फायदेमंद नहीं होगा। इसलिए चूजे और वयस्क नर-मादा पक्षियों को लाया जाएगा।
कैसे बढ़ेगी गोडावण की संख्या MP में
एसडीओ ने बताया कि पक्षी लाने के बाद यहां उनके प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ावा दिया जाएगा। अगर सब ठीक रहा तो धीरे-धीरे यहां गोडावण की संख्या बढ़ने लगेगी।
अधिकारियों ने बताया कि इस पक्षी के लिए आसपास का वातावरण और आवास बेहद जरूरी है। यह पक्षी जमीन पर रहता है और दो से ढाई फुट ऊंची घास के बीच बसेरा करता है। ग्वालियर की घास इसके जीवित रहने के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।
क्यों है यह पक्षी इतना खास
गोडावण को सोन चिरैया भी कहते हैं। यह राजस्थान का राज्य पक्षी है। इसे दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में गिना जाता है।
यह पक्षी घास के मैदानों का प्रतीक है। जहां यह पक्षी रहता है वहां के पारिस्थितिक तंत्र की सेहत अच्छी मानी जाती है। इसकी आंखों में सामने देखने की क्षमता कमजोर होती है इसलिए बिजली के तारों से टकराकर अक्सर इनकी मौत हो जाती है।
MP और राजस्थान का क्या है कनेक्शन
यह योजना दोनों राज्यों के बीच वन्यजीव संरक्षण में सहयोग का नया उदाहरण बन सकती है। राजस्थान में चीता की तर्ज पर अब MP गोडावण को भी वापस लाने की कोशिश कर रहा है।
ग्वालियर में पहले से ही सोन चिरैया सैंक्चुअरी मौजूद है। लेकिन वहां यह पक्षी नहीं है। अब वन विभाग उस जगह को फिर से आबाद करने की तैयारी में है।
इस वन्यजीव कार्ययोजना के मेन बिंदु इस प्रकार हैं-
- आंध्र प्रदेश की मांग पर मध्य प्रदेश अपने यहां से तीन बाघिनें वहां के जंगलों को समृद्ध करने के लिए भेजेगा।
- इसके बदले में आंध्र प्रदेश से भारतीय जंगली कुत्ते (ढोल) और अन्य प्रजातियों के वन्यजीव मध्य प्रदेश लाए जाएंगे।
- संगठित वन अपराधों से निपटने के लिए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर एक विशेष टास्क फोर्स का गठन होगा।
- वनों और वन्यजीवों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए वन मुख्यालय में एक अत्याधुनिक कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर बनेगा।
- गांधी सागर अभयारण्य में अगले महीने चीतों का एक जोड़ा छोड़ा जाएगा, वर्तमान में कूनो में 32 शावकों समेत 52 चीते हैं।
FAQ
- गोडावण या सोन चिरैया क्या है और यह MP से कब गायब हुआ?
गोडावण को सोन चिरैया भी कहते हैं। यह राजस्थान का राज्य पक्षी है और दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है। यह MP से करीब 33 साल पहले यानी 1990 के दशक की शुरुआत में गायब हो गया था। - MP में गोडावण को कहां बसाया जाएगा?
ग्वालियर के सोन चिरैया सैंक्चुअरी में इसे फिर बसाने की योजना है। इसके लिए बाराई गांव और पनिहार के आसपास पहले घास के मैदान विकसित किए जाएंगे। पक्षी राजस्थान के सैम कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर से लाए जाएंगे। - देश में अभी कितने गोडावण बचे हैं?
पूरे देश में इस समय केवल 150 के करीब गोडावण बचे हैं। इनमें से 135 अकेले राजस्थान में हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में मिलाकर बेहद कम संख्या रह गई है।
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