एमपी छात्र संघ चुनाव पर हाईकोर्ट दो टूक, बहाने नहीं तारीख बताओ, दो हफ्ते में मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में साल 2017 से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं।
- छात्र नेता और अधिवक्ता अदनान अंसारी ने चुनाव कराने के लिए याचिका दायर की।
- सरकार लगातार जवाब देने के लिए समय मांगती रही।
- हाई कोर्ट ने अब दो हफ्ते में चुनाव की रूपरेखा मांगी है।
- कोर्ट ने साफ किया कि केवल आश्वासन के आधार पर मामला खत्म नहीं होगा।
मध्य प्रदेश में आठ साल से बंद छात्र संघ चुनाव अब फिर चर्चा में हैं। जबलपुर हाई कोर्ट ने सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि अब बहाने नहीं चलेंगे। सरकार को दो हफ्ते के भीतर एकेडमिक कैलेंडर के साथ छात्र संघ चुनाव की तारीख भी बतानी होगी। इस आदेश के बाद राज्य में छात्र राजनीति फिर शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है।
छात्र संघ चुनाव आठ साल से क्यों बंद हैं
मध्यप्रदेश में छात्र संघ चुनाव में आखिरी बार साल 2017 में छात्र संघ चुनाव हुए थे। इसके बाद पूरे राज्य में चुनाव बंद हो गए। कई साल गुजर गए, लेकिन चुनाव दोबारा नहीं कराए गए। इससे कॉलेजों में छात्र प्रतिनिधित्व भी प्रभावित हुआ।
इसी मुद्दे को लेकर जबलपुर के छात्र नेता और अधिवक्ता अदनान अंसारी ने साल 2024 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने मांग की कि प्रदेश में छात्र संघ चुनाव फिर शुरू कराए जाएं।
सरकार समय मांगती रही, सुनवाई आगे बढ़ती रही
याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार और उच्च शिक्षा विभाग बार बार समय मांगते रहे। जुलाई 2025 की सुनवाई में भी सरकार की ओर से कहा गया कि स्टूडेंट बॉडी के गठन पर निर्देश लेने हैं। इसके बाद भी कई तारीखों पर जवाब देने के बजाय समय ही मांगा जाता रहा।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इससे मामला लगातार लंबा खिंचता रहा। चुनाव कराने को लेकर कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया।
हाई कोर्ट ने पूछा, आखिर चुनाव क्यों नहीं हुए
बुधवार 15 जुलाई को एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिविजनल बेंच ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि 2017 के बाद पूरे प्रदेश में छात्र संघ चुनाव नहीं हुए।
उन्होंने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का भी हवाला दिया। कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह से आठ हफ्तों के भीतर छात्र संघ चुनाव होने चाहिए।
सरकार ने कोविड और नई शिक्षा नीति का दिया कारण
सरकार और उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया कि साल 2020 में कोविड महामारी के कारण चुनाव नहीं हो सके। इसके बाद नई शिक्षा नीति लागू हुई। कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम शुरू हुआ। इसी दौरान छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
सरकार ने यह भी बताया कि अभी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। नया एकेडमिक कैलेंडर तैयार किया जा रहा है। लगभग दो हफ्ते में यह काम पूरा हो जाएगा।
कोर्ट ने कहा, केवल आश्वासन से मामला खत्म नहीं होगा
सरकार ने कोर्ट से याचिका समाप्त करने की मांग भी की। लेकिन हाई कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल आश्वासन के आधार पर याचिका खत्म नहीं की जा सकती। डिविजनल बेंच ने सरकार और उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि दो हफ्ते के भीतर 2026-27 का एकेडमिक कैलेंडर पेश किया जाए। उसी में छात्र संघ चुनाव और स्टूडेंट बॉडी के गठन की पूरी जानकारी भी दी जाए।
कोर्ट ने पूछा, नए नेता कहां से आएंगे
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी भी की। कोर्ट ने पूछा कि यदि छात्र संघ चुनाव नहीं होंगे तो नए और प्रतिभावान राजनेता कहां से आएंगे। आपको बता दें कि पूर्व चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा भी पहले इसी तरह की चिंता जता चुके हैं। उन्होंने भी कहा था कि छात्र राजनीति लोकतांत्रिक नेतृत्व तैयार करने का अहम माध्यम है। जस्टिस संजीव सचदेवा ने तो यह भी टिप्पणी की थी कि क्या आप केंद्र की राजनीति में मध्य प्रदेश को पीछे रखना चाहते हैं।
अब क्या हो सकता है आगे
हाई कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब सरकार पर तय समय में जवाब देना जरूरी होगा। यदि दो हफ्ते में एकेडमिक कैलेंडर पेश होता है, तो उसके साथ छात्र संघ चुनाव की संभावित तारीख भी सामने आ सकती है।
इस आदेश ने उन छात्रों की उम्मीद बढ़ा दी है, जो कई वर्षों से छात्र संघ चुनाव दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। अब अगली सुनवाई में सरकार की कार्ययोजना सबसे अहम रहेगी।
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