प्रदेश प्रभारी से शिकायत की तो पूर्व मंत्री पांसे ने अपने ही ब्लॉक अध्यक्ष को धमकाया
समझें क्या है पूरा मामला
- बैतूल में कांग्रेस के संगठन कार्यक्रम के दौरान विवाद हुआ।
- विजय पारधी ने प्रदेश प्रभारी के सामने अपनी शिकायत रखी।
- प्रदेश प्रभारी ने पारधी को मंच पर शॉल पहनाकर सम्मानित किया।
- बाद में पारधी की गर्दन पकड़ने और धमकाने का आरोप लगा।
- पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे समेत पांच लोगों पर एफआईआर हुई।
बैतूल कांग्रेस का अंदरूनी विवाद पुलिस तक पहुंच गया है। पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर (First Information Report) दर्ज हुई है। मामला कांग्रेस के संगठन सृजन कार्यक्रम से जुड़ा है।
कार्यक्रम बैतूल की जैन दादावाड़ी में आयोजित हुआ था। इसमें कांग्रेस के कई प्रदेश और जिला स्तरीय नेता पहुंचे थे। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय कार्यकर्ताओं की बात सुनना था। इस दौरान कांग्रेस नेता विजय पारधी ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से शिकायत की। प्रदेश प्रभारी ने बात सुनकर पारधी को मंच पर बुलाया। इसके बाद पारधी को शॉल पहनाकर सम्मानित भी किया गया।
आरोप है कि यह घटनाक्रम पांसे समर्थकों को पसंद नहीं आया। इसके बाद कार्यक्रम में तीखी बहस शुरू हो गई। पारधी की गर्दन पकड़ने और धमकाने का आरोप भी लगा।
प्रदेश प्रभारी से शिकायत भारी पड़ी
कांग्रेस के संगठन सृजन कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की बातें सुनी जा रही थीं। स्थानीय संगठन की स्थिति पर भी चर्चा हो रही थी। इसी दौरान विजय पारधी ने अपनी शिकायत रखी।
पारधी ने प्रदेश प्रभारी को स्थानीय संगठन की समस्याएं बताईं। उन्होंने कुछ नेताओं के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। प्रदेश प्रभारी ने उनकी शिकायत को गंभीरता से सुना। इसके बाद पारधी को मंच पर बुलाया गया। प्रदेश प्रभारी ने उन्हें शॉल पहनाकर सम्मानित किया। बताया गया कि इसी घटनाक्रम के बाद विवाद बढ़ा।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूर्व मंत्री पांसे के समर्थक नाराज हो गए। उन्होंने शिकायत को अपने नेता के खिलाफ माना। इसके बाद पारधी को रोकने की कोशिश हुई।
गर्दन पकड़ने का आरोप
विजय पारधी ने पुलिस को घटना की शिकायत दी है। उन्होंने कुछ लोगों पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। शिकायत में गर्दन पकड़ने का आरोप भी शामिल है। पारधी के अनुसार, विवाद के दौरान उन्हें धमकाया गया। उन्हें शिकायत करने के कारण निशाना बनाया गया। मौके पर कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में लोगों के बीच तीखी बहस दिखाई देती है। कुछ लोग पारधी को पीछे हटाते नजर आते हैं। हालांकि वायरल वीडियो में पूरी घटना दिखाई नहीं देती। विवाद से पहले की बातचीत भी स्पष्ट नहीं है। पुलिस मूल वीडियो की जांच कर सकती है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बयान भी अहम होंगे। जांच के दौरान प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी ली जा सकती है। इससे हर आरोपी की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
‘यहीं गाड़ देंगे’ की धमकी
शिकायतकर्ता ने जान से मारने जैसी धमकी का आरोप लगाया है। पारधी के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें डराने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि समर्थकों ने कहा, “तुझे यहीं गाड़ देंगे।” यह कथन फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप का हिस्सा है। पुलिस जांच के बाद इसकी पुष्टि हो सकेगी।
धमकी किस व्यक्ति ने दी, यह जांच में स्पष्ट होगा। वायरल वीडियो की आवाजों का भी मिलान हो सकता है। वहां मौजूद लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। गंभीर धमकी का आरोप साबित होने पर कानूनी कार्रवाई बढ़ सकती है। पुलिस शिकायत और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़ेगी। सभी आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
पांसे समेत पांच लोगों पर एफआईआर
पुलिस ने सुखदेव पांसे समेत पांच लोगों पर मामला दर्ज किया है। यह एफआईआर विजय पारधी की शिकायत के आधार पर हुई है। अन्य आरोपियों को पूर्व मंत्री का समर्थक बताया गया है। उनकी अलग-अलग भूमिकाओं की जांच की जाएगी। किसने गर्दन पकड़ी, यह भी जांच का विषय रहेगा। पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे की भूमिका भी पुलिस जांच में देखी जाएगी। कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी और कथित भूमिका की जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है।
वीडियो से गरमाई सियासत
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सियासत तेज हो गई। भाजपा नेताओं और समर्थकों ने कांग्रेस को घेरना शुरू किया। भाजपा पक्ष ने इसे कांग्रेस नेता का अपमान बताया। पारधी की सामाजिक पहचान को लेकर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस से संबंधित नेताओं पर कार्रवाई की मांग हुई। कांग्रेस नेताओं ने वीडियो का पूरा संदर्भ देखने की बात कही। उनका कहना है कि छोटा वीडियो पूरी घटना नहीं बताता।
सुखदेव पांसे का पक्ष आना बाकी
पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। अब उनका विस्तृत पक्ष सामने आना भी जरूरी है। पांसे पहले वायरल वीडियो को गलत संदर्भ में फैलाने की बात कह चुके हैं। उन्होंने भ्रामक प्रचार पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। नई एफआईआर के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस सभी पक्षों के बयान दर्ज करेगी। पांसे और दूसरे आरोपियों को जवाब देने का अधिकार है।
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