राहुल के बाद अब जीतू पटवारी ने भी कोर्ट में मांगी माफी, बोले गलती हो गई, मिली जमानत
Ratan Kumar Mishra | Jul 20, 2026, 18:33 IST
Photograph: (the sootr)
बसपा प्रमुख मायावती पर विवादास्पद टिप्पणी करने के मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ग्वालियर जिला न्यायालय में पेश हुए। बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया की शिकायत पर दर्ज मामले में अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दे दी।
कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सोमवार को ग्वालियर कोर्ट में पेश हुए। मामला 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। बीते लोकसभा चुनाव में भिंड से बसपा प्रत्याशी ने उन पर केस दर्ज कराया था। आरोप है कि पटवारी ने मायावती पर विवादित बयान दिया था। कोर्ट ने सोमवार को उन्हें इस मामले में जमानत दे दी।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सोमवार को ग्वालियर की अदालत पहुंचे। यहां अदालत के समक्ष उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि गलती हो गई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दे दी।
यह विवाद भिंड लोकसभा सीट से जुड़ा है। यहां से बहुजन समाज पार्टी के देवाशीष जरारिया चुनाव लड़ रहे थे। प्रचार के दौरान जीतू पटवारी ने एक मंच से भाषण दिया था। भाषण में उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती पर टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मायावती पैसे लेकर टिकट देती हैं।
इस बयान से बसपा प्रत्याशी नाराज हो गए थे। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए ऐसे बयान अक्सर विवादों में आ जाते हैं। नेताओं के बयान चुनाव के दौरान बड़ी बहस का मुद्दा बन जाते हैं। इसी तरह का मामला जीतू पटवारी के साथ भी सामने आया।
देवाशीष जरारिया ने भिंड के ऊमरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने जीतू पटवारी के खिलाफ अपराध क्रमांक 112/24 के तहत केस दर्ज हुआ। इसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(5) लगाई गई। साथ ही धारा 188 और धारा 171-जी भी शामिल की गई। न्याय दंड संहिता की भी धाराएं जोड़ी गईं।
चुनाव संबंधी मामलों में यह अधिनियम खासतौर पर अहम माना जाता है। धारा 123(5) चुनाव में भ्रष्ट व्यवहार से जुड़ी मानी जाती है। ऐसे मामलों में जांच के बाद कोर्ट में सुनवाई होती है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तय प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई की थी।
इस मामले में कोर्ट ने पहले जमानती वारंट जारी किया था। इसी वारंट के चलते जीतू पटवारी सोमवार को कोर्ट पहुंचे। सुनवाई तृतीय व्यवहार न्यायाधीश सक्षम नरूला की अदालत में हुई। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद जमानत मंजूर कर ली। पटवारी की तरफ से अधिवक्ता चैन सिंह राजपूत ने पैरवी की।
कोर्ट परिसर में इस दौरान कड़ी सुरक्षा भी नजर आई। सुनवाई के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने बयान पर खेद प्रकट किया। दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी बात रखी। इसके बाद न्यायाधीश ने जमानत की शर्तें तय कर दी।
आपत्तिजनक बयान को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी जबलपुर हाईकोर्ट में बीते दिनों माफी मांग चुके है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान को लेकर दिए विवादित बयान को लेकर राहुल गांधी ने खेद जताया था। यह मामला तीन साल तक जबलपुर हाईकोर्ट में चला था।
जून महीने में इस मामले में राहुल गांधी के माफीनामे के बाद आपसी समझौता हो गया था। लेकिन विधानसभा चुनाव से लेकर लगातार तीन साल यह मामला मीडिया की सुर्खियों में बना रहा था।
बसपा और कांग्रेस के बीच मध्यप्रदेश में सियासी समीकरण अहम माने जाते हैं। दोनों दलों के वोट बैंक कई सीटों पर सीधा असर डालते हैं। भिंड जैसी सीटों पर बसपा का प्रभाव लंबे समय से माना जाता रहा है। ऐसे बयानों का असर आगे के चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से यह टिप्पणी और भी संवेदनशील बन गई थी। कई बार गठबंधन और वोट बंटवारे की चर्चा भी इन्हीं समीकरणों से जुड़ी रहती है। ऐसे बयान आगे की सियासी बातचीत को भी प्रभावित कर सकते हैं।
कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है। अब यह सुनवाई 27 जुलाई को होगी। तब तक जीतू पटवारी को जमानत पर छोड़ दिया गया है। यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। चुनावी मामलों में साक्ष्यों के आधार पर आगे की सुनवाई तय होती है। अंतिम फैसला आना अभी बाकी है। तब तक दोनों पक्षों के वकील अपने-अपने सबूत कोर्ट में पेश करेंगे। इस मामले पर मध्यप्रदेश की सियासत की नजर बनी रहेगी।
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सोमवार को ग्वालियर की अदालत पहुंचे। यहां अदालत के समक्ष उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि गलती हो गई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दे दी।
क्या है पूरा विवाद
इस बयान से बसपा प्रत्याशी नाराज हो गए थे। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए ऐसे बयान अक्सर विवादों में आ जाते हैं। नेताओं के बयान चुनाव के दौरान बड़ी बहस का मुद्दा बन जाते हैं। इसी तरह का मामला जीतू पटवारी के साथ भी सामने आया।
एफआईआर में क्या लिखा
चुनाव संबंधी मामलों में यह अधिनियम खासतौर पर अहम माना जाता है। धारा 123(5) चुनाव में भ्रष्ट व्यवहार से जुड़ी मानी जाती है। ऐसे मामलों में जांच के बाद कोर्ट में सुनवाई होती है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तय प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई की थी।
कोर्ट में क्या हुआ
कोर्ट परिसर में इस दौरान कड़ी सुरक्षा भी नजर आई। सुनवाई के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने बयान पर खेद प्रकट किया। दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी बात रखी। इसके बाद न्यायाधीश ने जमानत की शर्तें तय कर दी।
राहुल गांधी भी मांग चुके हैं माफी
जून महीने में इस मामले में राहुल गांधी के माफीनामे के बाद आपसी समझौता हो गया था। लेकिन विधानसभा चुनाव से लेकर लगातार तीन साल यह मामला मीडिया की सुर्खियों में बना रहा था।
कांग्रेस बसपा के रिश्ते
इसी वजह से यह टिप्पणी और भी संवेदनशील बन गई थी। कई बार गठबंधन और वोट बंटवारे की चर्चा भी इन्हीं समीकरणों से जुड़ी रहती है। ऐसे बयान आगे की सियासी बातचीत को भी प्रभावित कर सकते हैं।
अब आगे क्या होगा
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