लोकायुक्त के निशाने पर टीएंडसीपी की रिटायर्ड अफसर सुनीता सिंह, बिल्डर कनेक्शन भी उजागर
News In Short
- टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) की रिटायर्ड्ड जॉइंट डायरेक्टर सुनीता सिंह जांच के घेरे में हैं।
- लोकायुक्त पुलिस को इनपुट मिले हैं कि उन्होंने आय से अधिक संपत्ति बनाई है।
- सुनीता सिंह चार महीने पहले रिटायर्ड हुई हैं।
- अभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, सिर्फ तथ्यों की जांच चल रही है।
- बता दें कि बिल्डरों से कनेक्शन होने के आरोप लगते रहे हैं।
- हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने उनकी संविदा नियुक्ति के प्रस्ताव पर भी रोक लगा दी है।
News In Detail
लोकायुक्त का शिकंजा कसा
भोपाल में एक रिटायर्ड अफसर के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने जांच की दस्तक दे दी है। नाम है सुनीता सिंह, पद था टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में जॉइंट डायरेक्टर। आरोप है कि पद पर रहते हुए उन्होंने अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति बना ली। लोकायुक्त को इस बारे में खास इनपुट मिले थे, जिन पर कार्रवाई अब शुरू हो चुकी है।
यह विभाग शहरों और गांवों की जमीन के उपयोग की योजना बनाता है। नक्शे पास करना, विकास कार्यों की अनुमति देना, इसी विभाग का काम है। ऐसे संवेदनशील पद पर बैठे अधिकारी की संपत्ति हमेशा संदेह के दायरे में आती है।
चार महीने पहले रिटायर, अब कहां हैं सुनीता?
सुनीता सिंह करीब चार महीने पहले जॉइंट डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। खबर है कि फिलहाल वे मध्य प्रदेश से बाहर हैं। बताया जा रहा है कि इलाज के सिलसिले में वे प्रदेश से बाहर गई हैं।
लंबे कार्यकाल में वे विभाग के कई अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़ी रहीं। उनकी संपत्ति के स्रोतों और उसके अनुपात को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यही वजह है कि लोकायुक्त ने इनपुट को गंभीरता से लेते हुए जांच का पहिया घुमाया।
अभी एफआईआर नहीं, पर जांच जारी
अभी तक कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। लोकायुक्त पुलिस फिलहाल तथ्यों का सत्यापन (verification) कर रही है। एजेंसी पहले हर जानकारी की पुष्टि करना चाहती है। ठोस साक्ष्य जुटते ही आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
जांच का यह तरीका लोकायुक्त की सामान्य प्रक्रिया है। पहले इनपुट की पड़ताल, फिर सबूत, और तब एफआईआर। इस मामले में भी यही रास्ता अपनाया जा रहा है।
बिल्डर कनेक्शन और परिवार का बड़ा नाम
यह मामला सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं है। सुनीता सिंह के परिवार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वे गणपति बिल्डर के डायरेक्टर विनोद सिंह की बहन बताई जाती हैं। टीएंडसीपी जैसे विभाग में इस तरह का पारिवारिक जुड़ाव संदेह की बड़ी वजह बन जाता है।
इस विभाग में बिल्डर लॉबी का दबाव हमेशा से रहा है। जमीन के नक्शे, विकास की अनुमतियां और मास्टर प्लान, इन सबमें इस विभाग की भूमिका अहम होती है। ऐसे में परिवार का बिल्डर कनेक्शन सवालों को और गहरा कर देता है। इसके अलावा उनके दामाद मनीष भारद्वाज भोपाल में एसीपी (Assistant Commissioner of Police) के पद पर पदस्थ हैं।
संविदा नियुक्ति पर मुख्य सचिव ने लगाई रोक
रिटायरमेंट के बाद भी सुनीता सिंह का नाम टीएंडसीपी से जुड़ा रहा। विभाग ने भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने की जरूरत बताते हुए उन्हें संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव भेजा था। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस प्रस्ताव को वापस कर दिया।
उन्होंने पूछा कि जब विभाग में अन्य अधिकारी मौजूद हैं, तो इस नियुक्ति की जरूरत क्यों? यह सवाल अपने आप में बड़ा है। अगर यह नियुक्ति होती, तो टीएंडसीपी के इतिहास में पहली बार किसी महिला अधिकारी को इस स्तर पर संविदा नियुक्ति मिलती।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
टीएंडसीपी विभाग में लंबे समय तक पदस्थ रहने के दौरान सुनीता सिंह कई बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ी रहीं। अहम फैसलों में उनकी भूमिका रही। बताया जाता है कि इसी दौरान उनकी संपत्ति में असाधारण बढ़ोतरी देखी गई। यही बात लोकायुक्त के इनपुट का आधार बनी।
संविदा नियुक्ति में बिल्डर लॉबी के दबाव की चर्चा भी सामने आई। शीर्ष स्तर के गोपनीय अधिकार देने की तैयारी थी। लेकिन मुख्य सचिव की सख्ती ने यह योजना रोक दी।
अब आगे क्या होगा?
लोकायुक्त पुलिस तथ्यों की जांच जारी रखेगी। जैसे ही ठोस सबूत मिलेंगे, एफआईआर दर्ज होगी और छापेमारी की कार्रवाई भी हो सकती है। संपत्ति का ब्यौरा खंगाला जाएगा। बैंक खातों, जमीन और अन्य निवेश की जानकारी जुटाई जाएगी।
इस मामले में बिल्डर कनेक्शन और परिवार के प्रभावशाली पदों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल गेंद लोकायुक्त के पाले में है।
ये खबर भी पढ़िए...
MP News: किसान से रेंजर ने मांगे थे एक लाख रुपए, लोकायुक्त ने 50 हजार रुपए लेते पकड़ा, जानें मामला
इंदौर लोकायुक्त की दबिश : PWD के सहायक इंजीनियर, सब इंजीनियर नीमा 90 हजार की घूस लेते धराए