सुप्रीम कोर्ट में मप्र सरकार ने पहली बार 27% OBC पर मांगी राहत, छत्तीसगढ़ का दिया हवाला, फिलहाल आदेश नहीं

Sanjay Gupta | Jul 22, 2025, 15:04 IST
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मध्यप्रदेश सरकार ने पहली बार सुप्रीम कोर्ट में 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए राहत मांगी। 2019 में मध्यप्रदेश में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने का एक्ट पास हुआ था, लेकिन...

मप्र में साल 2019 में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने का एक्ट पास हुआ। लेकिन इसके अनुसार अभी भर्तियां नहीं हो रही हैं। मामला हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।



इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिकाओं पर मंगलवार 22 जुलाई को अहम सुनवाई हुई। इसमें सबसे अहम मप्र शासन का रवैया रहा। पहली बार सरकार ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए राहत मांगी।



यह हुआ सुनवाई के दौरान

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वहीं दूसरे पक्ष ने किया विरोध

वहीं इस पर अनारक्षित की ओर से अधिवक्ता ने आपत्ति ली और कहा कि मप्र और छत्तीसगढ़ दोनों के मामले एक जैसे नहीं हैं। मप्र में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किया गया है और छत्तीसगढ़ में ओबीसी का आरक्षण पूर्ववत है। वहां एसटी आबादी अधिक होने से उनके लिए आरक्षण बढ़ाया गया है। ऐसे में दोनों केस को एक जैसा नहीं बताया जा सकता है। इस पर करीब 20 मिनट तक सुप्रीम कोर्ट में जिरह चली। जिसके बाद इसे बिना किसी आदेश के अगली सुनवाई के लिए आगे बढ़ा दिया गया।



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यह है छत्तीसगढ़ का 58 फीसदी आरक्षण केस

एक मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आरक्षण को 58 फीसदी के तहत भर्ती करने पर अंतरिम राहत दी थी। हालांकि यह राहत अंतरिम है, छत्तीसगढ़ सरकार का पक्ष था कि भर्ती और पदोन्नति दोनों रुकी हैं और इसके चलते मैनपावर की कमी से सरकार जूझ रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह राहत दी थी कि जो प्रक्रिया चल रही है वह इसी 58 फीसदी पर चल सकती है लेकिन यह सभी अंतिम आदेश के अधीन होंगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने 2012 में 58 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी की थी, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि आरक्षण को 50 से बढ़ाकर 58 फीसदी करना असंवैधानिक है। छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने आरक्षण नीति में बदलाव करते हुए 18 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की थी, इसके तहत लोकसेवा (अजा, अजजा एवं पिछड़ा वर्ग का आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा-4 में संशोधन किया गया था। इसके अनुसार अजजा वर्ग को 32 फीसदी, अजा वर्ग को 12 फीसदी और पिछड़ा वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था। इससे कुल आरक्षण 58 फीसदी हो गया था।



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