CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Jitendra Shrivastava | Jul 14, 2026, 23:30 IST
Photograph: (thesootr)
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार किया। सरकार और CBSE से 10 दिन में जवाब मांगा। अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार।
  • कोई भी भाषा सीखना बेकार नहीं, कोर्ट की बड़ी टिप्पणी।
  • CBSE और सरकार से 10 दिन में मांगा जवाब।
  • 29 जुलाई को होगी अगली अहम सुनवाई।
  • छात्रों को अब पढ़नी होंगी दो भारतीय भाषाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE (Central Board of Secondary Education) की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।



कोर्ट ने सरकार और CBSE से 10 दिन में जवाब मांगा है। अब इस मामले में 29 जुलाई को सुनवाई होगी। यह नीति मौजूदा 2026-27 सेशन से लागू हो चुकी है।



क्या है थ्री लैंग्वेज पॉलिसी

नई नीति के तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। यह नियम कक्षा 9 के छात्रों पर 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ है। इसमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होना जरूरी है।



पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा पढ़ते थे। अब यह नियम बदल गया है। विदेशी भाषा अब तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही ली जा सकेगी।



CBSE ने पहले ही किया था बदलाव

CBSE ने 6 जून को इस नीति में एक यूटर्न लिया था। इसके तहत नई गाइडलाइन जारी हुई। इस साल कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी।



कक्षा 7, 8 और 9 के जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे उन्हें जारी रख सकते हैं। हालांकि उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी।



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किसने दायर की याचिका

यह याचिका छात्रा यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने की।



याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नियम बिना तैयारी के लागू कर दिया गया। सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर और मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि 22 भारतीय भाषाओं में से अभी सिर्फ तीन भाषाओं की किताबें ही उपलब्ध हैं।



वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि नई भाषा पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की भी भारी कमी है। उनका तर्क है कि इतने कम समय में स्कूलों के लिए किताबें और शिक्षक जुटाना मुश्किल है।



विदेशी भाषा पूरी तरह बंद नहीं होगी

छात्र अब भी फ्रेंच, जर्मन या जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं। लेकिन उससे पहले उन्हें दो भारतीय भाषाएं पढ़नी अनिवार्य होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या चौथी अतिरिक्त भाषा के तौर पर ही जुड़ेगी।



CBSE ने यह भी साफ किया है कि कक्षा 10 के बोर्ड एग्जाम में तीसरी भाषा यानी R3 की परीक्षा नहीं होगी। ऐसा छात्रों पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए किया गया है।



आगे क्या होगा

अब केंद्र सरकार, CBSE और NCERT इस मामले में अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि आगे क्या आदेश दिया जाए। तब तक थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू ही रहेगी।



NEP 2020 से जुड़ा है यह मामला

यह नीति नई शिक्षा नीति 2020 यानी NEP (National Education Policy) का हिस्सा है। इसे केंद्र सरकार ने 29 जुलाई 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव था।



इससे पहले नीति 1986 में बनी थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। सरकार ने इसे पूरी तरह लागू करने के लिए 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। इसलिए राज्य सरकारों पर इसे पूरी तरह लागू करने की बाध्यता नहीं है।



FAQ

  1. सुप्रीम कोर्ट ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर क्या फैसला दिया?
    सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोई भी भाषा सीखना बेकार नहीं जाता। कोर्ट ने सरकार और CBSE से 10 दिन में जवाब मांगा है।
  2. थ्री लैंग्वेज पॉलिसी में क्या बदलाव हुआ है?
    अब छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। पहले एक भारतीय और एक विदेशी भाषा से काम चल जाता था। यह नियम कक्षा 9 से लागू हुआ है।
  3. अगली सुनवाई कब होगी?
    इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई 2026 को होगी। तब तक केंद्र, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। तब तक नीति लागू रहेगी।

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