देश में पहली बार... टेंपल बॉन्ड, 1100 करोड़ से बदलेंगे एमपी के मंदिर
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ-2028 से पहले मंदिरों का विकास करेगी।
- उज्जैन और आगर-मालवा के 11 प्रमुख मंदिरों पर 1100 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
- देश में पहली बार मंदिरों के लिए टेंपल बॉन्ड जारी किए जाएंगे।
- बजट का इंतजाम बॉन्ड, अर्बन चैलेंज फंड और बैंक लोन से किया जाएगा।
- राज्य स्तरीय तकनीकी समिति ने इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में जुट गई है। उज्जैन और आगर-मालवा के 11 प्रमुख मंदिरों का कायाकल्प किया जाएगा। इन मंदिरों के विकास पर कुल 1100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए देश में पहली बार टेंपल बॉन्ड जारी किए जाएंगे। यह योजना धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से बनाई गई है।
शुक्रवार, 10 जुलाई को राज्य स्तरीय तकनीकी समिति यानी एसएलटीसी (State Level Technical Committee) की पहली बैठक हुई है। इस बैठक में इस पूरी योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। बैठक की अध्यक्षता नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने की। बैठक में विद्युत, वित्त, नगर तथा ग्राम निवेश और जल संसाधन विभाग के बड़े अफसर मौजूद रहे। सभी विभागों ने मिलकर इस योजना पर चर्चा की।
टेंपल बॉन्ड क्या है?
टेंपल बॉन्ड की मदद से 200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। यह बॉन्ड 10 साल की अवधि के लिए जारी होगा। सरकार का दावा है कि यह देश का पहला ऐसा मॉडल है। इसमें निवेशकों को मिलने वाला रिटर्न सीधे मंदिरों की आय से जोड़ा जाएगा। यानी मंदिरों की कमाई से ही बॉन्ड की भरपाई होगी। इसके लिए अलग से कोई राशि सरकार नहीं देगी। बॉन्ड जारी करने की पूरी प्रक्रिया 15 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी।
बजट का पूरा गणित
पूरी परियोजना के लिए बजट का इंतजाम तीन अलग-अलग माध्यमों से किया जाएगा। पहला माध्यम टेंपल बॉन्ड है, जिससे 200 करोड़ रुपए मिलेंगे। दूसरा माध्यम अर्बन चैलेंज फंड है, जिससे 275 करोड़ रुपए की मदद मिलेगी। तीसरा और सबसे बड़ा हिस्सा बैंक लोन से आएगा। बैंकों से करीब 625 करोड़ रुपए कर्ज के रूप में लिए जाएंगे। इस तरह कुल 1100 करोड़ रुपए की व्यवस्था पूरी होगी।
कौन से मंदिर होंगे शामिल
इस योजना के तहत उज्जैन और आगर-मालवा के 11 प्रमुख मंदिरों को संवारा जाएगा। उज्जैन का कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और सांदीपनी आश्रम शामिल हैं। इसके अलावा नवग्रह मंदिर, 84 महादेव मंदिर और अंगारेश्वर महादेव मंदिर भी इस सूची में हैं। भूखी माता मंदिर, गढ़कालिका मंदिर और सिद्धवट मंदिर को भी विकसित किया जाएगा। आगर-मालवा में नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर का भी नवीनीकरण होगा। इन सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं जुटाई जाएंगी।
क्या सुविधाएं बढ़ेंगी
सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन आने वाले हैं। इन्हीं की सुविधा के लिए मंदिरों में कई काम होंगे। मंदिरों में पार्किंग क्षेत्र और पेयजल व्यवस्था बढ़ाई जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए यात्री सुविधा केंद्र भी बनाए जाएंगे। सड़क और मार्ग विकास पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।
इसके साथ ही बेहतर लाइटिंग और हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था भी की जाएगी। इन कामों से स्थानीय स्तर पर होटल कारोबार को फायदा होगा। परिवहन और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
अर्बन चैलेंज फंड की समीक्षा
बैठक में अर्बन चैलेंज फंड की भी समीक्षा की गई। इसके तहत प्रदेश के छह शहरों में नौ परियोजनाओं पर काम होना है। इनमें इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा, बड़वानी और छिंदवाड़ा शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब तीन हजार 156 करोड़ रुपए है। इसमें से 789 करोड़ रुपए अर्बन चैलेंज फंड से मिलेंगे। बैठक में तीन प्रमुख शहरों की जल प्रदाय योजनाओं की समय-सीमा भी तय की गई।
इंदौर में जलापूर्ति का काम
इंदौर में अमृत 2.0 (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation) योजना के तहत बड़ा काम होगा। शहर में जल संवर्धन और पानी की टंकियों का निर्माण किया जाएगा। इस काम में इंदौर के सभी 85 वार्ड शामिल किए गए हैं। बैठक में तय हुआ कि यह पूरा काम दिसंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे शहर में पानी की सप्लाई और बेहतर होगी। रहवासियों को गर्मी के मौसम में भी पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
उज्जैन को पहले से ही धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु महाकाल मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। सिंहस्थ-2028 के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में मंदिरों के आसपास बुनियादी सुविधाओं का मजबूत होना जरूरी माना जा रहा है।
टेंपल बॉन्ड से जुटाई गई राशि मंदिरों में लगेगी
सरकार का कहना है कि टेंपल बॉन्ड से जुटाई गई राशि सीधे मंदिरों के विकास में लगेगी। इससे निर्माण कार्य में देरी की आशंका भी कम रहेगी। अधिकारियों के मुताबिक हर मंदिर के लिए अलग से काम की योजना बनाई जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि तय समय में सारे काम पूरे हो जाएं।
सरकार का मानना है कि यह पूरी योजना प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी। टेंपल बॉन्ड जैसा नया मॉडल आने वाले समय में दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। सिंहस्थ-2028 से पहले मंदिरों का कायाकल्प श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाएगा।
FAQ
- टेंपल बॉन्ड क्या है और इससे कितना पैसा जुटाया जाएगा?
टेंपल बॉन्ड मध्य प्रदेश सरकार का एक नया वित्तीय मॉडल है। इसके जरिए 200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। यह बॉन्ड 10 साल की अवधि के लिए जारी होगा। इसमें निवेशकों को मिलने वाला रिटर्न सीधे मंदिरों की आय से जोड़ा जाएगा। यह देश में इस तरह का पहला मॉडल है। - उज्जैन और आगर-मालवा में कौन-कौन से मंदिर विकसित किए जाएंगे?
उज्जैन में कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनी आश्रम, नवग्रह मंदिर, 84 महादेव मंदिर, अंगारेश्वर महादेव मंदिर, भूखी माता मंदिर, गढ़कालिका मंदिर और सिद्धवट मंदिर शामिल हैं। आगर-मालवा में नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर का भी नवीनीकरण किया जाएगा।
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