SC के आदेश के बाद भी TET परीक्षा अटकी, हाईकोर्ट ने केंद्र और MP सरकार से मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने TET परीक्षा को लेकर आदेश दिया।
- 2028 तक हर साल दो TET परीक्षाएं होंगी।
- 31 दिसंबर से पहले दो परीक्षाएं करानी होंगी।
- हाईकोर्ट ने केंद्र और MP सरकार को नोटिस भेजा।
- मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
TET परीक्षा में देरी पर बढ़ा विवाद
मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तैयारी अधूरी दिख रही है। 31 दिसंबर से पहले दो परीक्षाएं होनी हैं। लेकिन अब तक एक परीक्षा का भी कार्यक्रम जारी नहीं हुआ। इसी बीच मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने किस मामले में जारी किया नोटिस
जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 23(2) के पहले और दूसरे प्रावधान को चुनौती दी गई है। अदालत ने केंद्र सरकार और मध्यप्रदेश शासन को नोटिस जारी किया है। दोनों पक्षों से जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई 31 अगस्त तय हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था
29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा कि 2028 तक हर साल दो बार TET परीक्षा कराई जाए। इस अवधि में सेवारत शिक्षकों को परीक्षा देने का मौका मिलता रहेगा। जब तक तय समय पूरा नहीं होता, शिक्षक दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। इस आदेश का उद्देश्य योग्य शिक्षकों को पर्याप्त अवसर देना बताया गया था।
पहले शिक्षकों को क्यों मिली थी छूट
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर के अनुसार, पहले NCTE की 2010 की अधिसूचना लागू थी। उसके आधार पर कई सेवारत शिक्षकों को TET से छूट मिली थी। इसलिए उस समय कानून को चुनौती देने की जरूरत नहीं पड़ी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति बदल गई। अब एसोसिएशन ने वैधानिक प्रावधानों को चुनौती दी है।
RTE Act की किस धारा पर उठे सवाल
याचिका में RTE Act की धारा 23(2) के पहले और दूसरे प्रावधान को चुनौती दी गई है। एसोसिएशन का कहना है कि यही प्रावधान अब विवाद का कारण बने हैं। उनका मानना है कि इन प्रावधानों की संवैधानिक वैधता की जांच जरूरी है। इसलिए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
पहले और दूसरे प्रावधान का मतलब क्या है
पहले प्रावधान के अनुसार शिक्षक को NCTE की तय योग्यता पांच साल में हासिल करनी होती है। दूसरे प्रावधान में पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग समय सीमा तय की गई है। इसमें चार साल के भीतर आवश्यक योग्यता पूरी करने की बात कही गई है। इसी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।
सेवारत शिक्षकों के लिए क्या राहत मांगी गई
एसोसिएशन ने अंतरिम राहत की मांग भी की है। याचिका में कहा गया है कि अंतिम फैसला आने तक किसी शिक्षक की सेवा समाप्त नहीं की जाए। जिन शिक्षकों ने अभी TET पास नहीं किया है, उन्हें परीक्षा देने का अवसर मिलता रहे। इससे उन्हें अपूरणीय नुकसान से बचाया जा सकेगा।
सबसे बड़ा सवाल अब परीक्षा शेड्यूल पर
सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट है। 31 दिसंबर से पहले दो परीक्षाएं कराना जरूरी माना जा रहा है। लेकिन शिक्षा विभाग अब तक पहली परीक्षा की तारीख भी घोषित नहीं कर पाया। ऐसे में समय पर दोनों परीक्षाएं कराने की चुनौती बढ़ गई है। अब सभी की नजर सरकार के जवाब और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेगी।
आगे क्या होगा
31 अगस्त को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी। अदालत सरकार का पक्ष सुनेगी। इसके बाद अंतरिम राहत पर भी फैसला हो सकता है। वहीं शिक्षा विभाग पर परीक्षा कार्यक्रम घोषित करने का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
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