एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्यप्रदेश भाजपा में 30 सितंबर महज स्वागत और पदभार का दिन नहीं, संगठन में नई व्यवस्था की शुरुआत का संकेत बन सकता है। पार्टी को नया संगठन महामंत्री मिल चुका है। एमपी बीजेपी के नए संगठन महामंत्री चंद्रशेखर बनाए गए है। जबकि प्रदेश प्रभारी विप्लब कुमार देब और रेखा वर्मा सह-प्रभारी बनाए गए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक तीनों की 30 सितंबर को भाजपा कार्यालय में आमद प्रस्तावित है। हालांकि विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम अभी जारी होना बाकी है।
30 सितंबर: संयोग या कसावट का पहला संकेत?
एमपी बीजेपी में एक साथ तीन महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियों के नए चेहरे तय होना अपने आप में बड़ा बदलाव है। अब दिलचस्प यह है कि तीनों की भोपाल में सक्रियता की शुरुआत के लिए 30 सितंबर ही अहम तारीख बनती दिखाई दे रही है।
यह तीनों नेताओं का कोई संयुक्त कार्यक्रम नहीं है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उनके कार्यक्रम और समय अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन तीनों की भाजपा कार्यालय में आमद इसी तारीख को प्रस्तावित है।
इसीलिए 30 सितंबर को केवल औपचारिक पदभार से जोड़कर देखना कहानी का आधा हिस्सा होगा। असली सवाल उसके अगले दिन से शुरू होगा-क्या प्रदेश भाजपा के कामकाज में अब कसावट दिखाई देगी?
आठ महीने बाद मिला संगठन का पूर्णकालिक इंजन
चंद्रशेखर को 24 सितंबर को मध्यप्रदेश भाजपा का प्रदेश महामंत्री (संगठन) नियुक्त किया गया। यह पद हितानंद शर्मा की संघ में वापसी के बाद करीब 236 दिनों से खाली था। चंद्रशेखर का संगठनात्मक केंद्र भोपाल रखा गया है।
यानी लंबे अंतराल के बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ अब पूर्णकालिक संगठन महामंत्री की व्यवस्था फिर सक्रिय हो रही है।
इसका सीधा अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि संगठन की कार्यप्रणाली रातोंरात बदल जाएगी। लेकिन लंबे समय से खाली महत्वपूर्ण पद भरने के बाद जवाबदेही का दायरा जरूर अधिक स्पष्ट होगा।
ऊपर से प्रभारी और सह-प्रभारी भी नए
इसी बीच केंद्रीय भाजपा ने मध्यप्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी पूर्व त्रिपुरा मुख्यमंत्री विप्लब कुमार देब को और सह-प्रभारी की जिम्मेदारी रेखा वर्मा को सौंपी है। नियुक्तियां 23 सितंबर को घोषित की गई थीं।
इस तरह एक सप्ताह के भीतर प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में तीन महत्वपूर्ण नए नाम जुड़ गए-प्रदेश संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी।
तीन चेहरे नए, अब पुराने ढर्रे का क्या?
भाजपा कार्यालय में पदभार ग्रहण करना औपचारिक प्रक्रिया होगी। असली परीक्षा इसके बाद शुरू होगी।
संगठन महामंत्री को प्रदेश के अंदर संगठनात्मक तंत्र और कार्यकर्ताओं के समन्वय पर काम करना है। प्रभारी और सह-प्रभारी केंद्रीय संगठन तथा प्रदेश इकाई के बीच राजनीतिक-संगठनात्मक समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी होंगे।
ऐसे में तीनों पदों पर नई जिम्मेदारियां लगभग एक साथ शुरू होना प्रदेश भाजपा के कामकाज में नई निगरानी और समन्वय व्यवस्था का संकेत देता है। यह संभावित प्रभाव है, घोषित फैसला नहीं।
क्या 30 सितंबर से शुरू होगी रिपोर्ट कार्ड वाली राजनीति?
यही सवाल इस आमद को सामान्य स्वागत कार्यक्रम से अलग करता है। प्रदेश पदाधिकारियों और संगठन से जुड़े लोगों के साथ बैठकें नई टीम को जमीनी स्थिति समझने का शुरुआती अवसर दे सकती हैं। संगठन की कमजोर कड़ियां कहां हैं, समन्वय कहां अटक रहा है और किस स्तर पर अधिक सक्रियता चाहिए-आने वाला दौर इन्हीं सवालों पर नजर रखेगा।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पहले दिन से ही कोई बड़ा फैसला होगा। लेकिन तीन नई जिम्मेदारियों के चेहरे एक ही तारीख पर भोपाल में सक्रिय हो रहे हैं। 30 सितंबर मध्यप्रदेश भाजपा के नए संगठनात्मक अध्याय की शुरुआती तारीख जरूर बन सकती है।
आठ महीने खाली रहा संगठन महामंत्री का पद
संगठन महामंत्री का पद करीब आठ महीने तक पूर्णकालिक नियुक्ति के बिना रहा। अब एक साथ संगठन महामंत्री, प्रभारी और सह-प्रभारी के आने के बाद अपेक्षाएं भी ज्यादा होंगी।
यदि बदलाव केवल चेहरों और स्वागत कार्यक्रमों तक सीमित रहा तो नई नियुक्तियों का असर जमीन पर दिखाई देने में समय लगेगा। इसके उलट यदि बूथ से प्रदेश स्तर तक फीडबैक और जवाबदेही तेज हुई तो 30 सितंबर आगे चलकर महत्वपूर्ण संगठनात्मक मोड़ के रूप में देखा जा सकता है।
फिलहाल तारीख पर नजर रखिए-30 सितंबर। तीन नेता, तीन अलग जिम्मेदारियां और एक ही प्रदेश संगठन। इसके बाद पता चलेगा कि भाजपा में सिर्फ चेहरे बदले हैं या काम करने का तरीका भी।
- 30 सितंबर को मध्यप्रदेश भाजपा में क्या खास होने जा रहा है?
30 सितंबर को मध्यप्रदेश भाजपा में चंद्रशेखर को नया संगठन महामंत्री, विप्लब कुमार देब को प्रभारी और रेखा वर्मा को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। इन तीनों की भाजपा कार्यालय में आमद प्रस्तावित है, जो संगठनात्मक बदलाव का संकेत हो सकता है। - चंद्रशेखर की नियुक्ति के बाद मध्यप्रदेश भाजपा में क्या बदलाव आ सकते हैं?
चंद्रशेखर की नियुक्ति के बाद उम्मीद है कि प्रदेश भाजपा में कार्यप्रणाली में कसावट आएगी, विशेषकर संगठनात्मक तंत्र और कार्यकर्ताओं के समन्वय पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। - 30 सितंबर के बाद भाजपा की संगठनात्मक रणनीति में क्या बदलाव देखने को मिल सकता है?
30 सितंबर के बाद भाजपा की संगठनात्मक रणनीति में समन्वय और जवाबदेही बढ़ने की संभावनाएँ हैं। नए पदाधिकारियों की सक्रियता से संगठन की कमजोरियों और सक्रियता की जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा।