सोशल मीडिया रील्स के चक्कर में बाघों की जान खतरे में, वन विभाग हुआ सख्त
जंगल में बाघ दिखना रोमांचक अनुभव हो सकता है, लेकिन उसे कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर वायरल करने की होड़ अब चिंता का विषय बन गई है। वन विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि बाघ का पीछा करना, टॉर्च की रोशनी डालकर उसे परेशान करना या उसकी लोकेशन सार्वजनिक करना कानूनन अपराध माना जा सकता है। ऐसा करने वालों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया की सनक बन रही जंगलों के लिए खतरा
पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीवों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे हैं। लाइक्स, व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में कई लोग बाघ जैसे संवेदनशील वन्यजीवों के बेहद करीब पहुंच जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल वन्यजीवों की निजता का उल्लंघन नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
पेंच के पास हुई घटना के बाद बढ़ी चिंता
हाल ही में पेंच नेशनल पार्क के बफर क्षेत्र से लगे एक गांव में बाघ दिखाई दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोगों ने बाघ पर टॉर्च की रोशनी डालकर उसका वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वन विभाग ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए लोगों को चेताया है कि भविष्य में ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वन विभाग ने क्यों जारी की चेतावनी?
छिंदवाड़ा पूर्व वनमंडल के डीएफओ स्वरूप दीक्षित के अनुसार, कई लोग वाहवाही और लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से बाघों की मौजूदगी से जुड़े फोटो और वीडियो सार्वजनिक कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की जानकारी से शिकारी भी वन्यजीवों की गतिविधियों का पता लगा सकते हैं, जिससे शिकार की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग ने आम नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों से अपील की है कि वे ऐसे वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें।
बाघ को परेशान करना क्यों पड़ सकता है भारी?
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. अंकित मेश्राम बताते हैं कि बाघ सामान्य परिस्थितियों में शांत स्वभाव का होता है। वह शिकार करने के बाद एकांत और सुरक्षित स्थान पर रहना पसंद करता है। लेकिन यदि उसे बार-बार परेशान किया जाए, तेज रोशनी डाली जाए या उसके बेहद करीब जाने की कोशिश की जाए तो वह आक्रामक व्यवहार भी कर सकता है। ऐसी स्थिति इंसानों और वन्यजीवों, दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
जंगल में बाघ दिख जाए तो क्या करें?
- सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- बाघ का पीछा न करें।
- टॉर्च या फ्लैश लाइट का इस्तेमाल न करें।
- शोर-शराबा या भीड़ इकट्ठा करने से बचें।
- उसकी लोकेशन सोशल मीडिया पर साझा न करें।
- वन विभाग को सूचना देना सबसे बेहतर विकल्प है।
कानून क्या कहता है?
वन विभाग के सख्त नियमों के मुताबिक यह एक गंभीर अपराध है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत इस पर कार्रवाई होती है। जानबूझकर जानवर को परेशान करने पर जेल की हवा खानी पड़ेगी।वीडियो वायरल करने की चाहत आपको सीधे कोर्ट पहुंचा सकती है।
जब शिकार की घटनाएं बढ़ा रही हों चिंता
छिंदवाड़ा जिले में बीते महीनों में बाघों से जुड़े गंभीर मामले सामने आए हैं। हर्रई क्षेत्र के जमुनिया गांव में वन विभाग ने बाघ के अंग बेचने की कथित साजिश रच रहे पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं, तामिया क्षेत्र के छातीआम गांव में भी बाघ के शिकार का मामला सामने आया था। इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।
जंगल तमाशे की जगह नहीं हैं
बाघ का जंगल में दिखना प्रकृति की खूबसूरती का हिस्सा है, मनोरंजन का साधन नहीं। कुछ मिनट की रील या वायरल वीडियो किसी वन्यजीव की सुरक्षा और इंसानी जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो सकते।
जरूरत इस बात की है कि सोशल मीडिया की जिम्मेदारी समझी जाए और जंगलों के असली मालिकों को उनका सुकून वापस लौटाया जाए।
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