टीकमगढ़ में मिली 10 फीट पांडुलिपि, जम्बूद्वीप का नक्शा भी सामने आया

Sandeep Kumar | Jun 22, 2026, 16:18 IST
टीकमगढ़ में मिली 10 फीट पांडुलिपि
मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत 825 प्राचीन पांडुलिपियां मिलीं। इनमें जम्बूद्वीप का हस्तलिखित नक्शा और 10 फीट लंबी पांडुलिपि भी शामिल है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • टीकमगढ़ में 825 पांडुलिपियां मिलीं।
  • एक 10 फीट लंबी पांडुलिपि शामिल है।
  • जम्बूद्वीप का हस्तलिखित नक्शा मिला।
  • पांडुलिपियां जैन ब्रह्मांड विज्ञान से जुड़ीं।
  • ज्योतिष और चिकित्सा ज्ञान भी दर्ज है।

टीकमगढ़ में मिला खजाना

मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में इन दिनों एक खास काम चल रहा है। केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम् मिशन के तहत यहां प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां इकट्ठा की जा रही हैं। अब तक 825 पांडुलिपियां सामने आ चुकी हैं। इन्हें डिजिटल रूप में सहेजा जा रहा है।



ज्ञान भारतम् मिशन की नोडल टीम के अनुपम दीक्षित के मुताबिक, इन पांडुलिपियों का अध्ययन होने के बाद हमारे प्राचीन ऋषियों और विद्वानों का ज्ञान सभी के काम आएगा। भारत ज्ञान मंडप ने इनमें से 234 पांडुलिपियों को जांचकर मंजूरी दे दी है।



जम्बूद्वीप का रहस्यमयी नक्शा

इन पांडुलिपियों में सबसे चौंकाने वाली चीज है एक प्राचीन हस्तलिखित नक्शा। अनुपम दीक्षित बताते हैं कि यह चित्र जैन या भारतीय ब्रह्मांड विज्ञान (Indian Cosmology) से जुड़ा लगता है। इस नक्शे में भरत क्षेत्र, ऐरावत क्षेत्र, विदेह, गंगा, सिंधु, लवण समुद्र और मेरु पर्वत जैसे नाम साफ पढ़े जा सकते हैं। ये सभी जैन आगमों में वर्णित जम्बूद्वीप के हिस्से हैं।



नक्शे की खास बनावट

इस नक्शे के बीचोंबीच एक गोल संरचना बनी है। उसके चारों तरफ पर्वत और अलग-अलग क्षेत्र दिखाए गए हैं। बाहर की ओर समुद्र और द्वीपों की परतें हैं। किनारों पर नदियों और क्षेत्रों के नाम लिखे गए हैं।



दीक्षित के अनुसार यह त्रिलोक या लोकविज्ञान (Cosmography) से जुड़ा कोई प्राचीन जैन चित्र भी हो सकता है। इसकी ये खूबियां जैन परंपरा के जम्बूद्वीप चित्रों से काफी मिलती-जुलती हैं।



कहां-कहां से मिलीं पांडुलिपियां

लाइब्रेरियन विजय मेहरा ने बताया कि ये पांडुलिपियां जीवन के अलग-अलग विषयों पर हैं। जिला पुस्तकालय से 75, दरगुवां जैन मंदिर से 107, खरगापुर जैन मंदिर से 121 और माझ पंचायती जैन मंदिर से 247 पांडुलिपियां मिली हैं।



इसके अलावा बाजार जैन मंदिर से 141, नया जैन मंदिर से 62 और अजनौर जैन मंदिर से 25 पांडुलिपियां भी सामने आई हैं। सुनहरा तालाब माडूमर से 3 शिलालेख भी मिले हैं।



ज्योतिष गणना का पाशा

खरगापुर के जैन मंदिर से एक और खास चीज मिली है। वहां ज्योतिष (Astrology) से जुड़ी एक विशेष पुस्तक मिली है। साथ में एक लकड़ी का पाशा भी है।



विजय मेहरा के अनुसार इस पाशे पर कुछ अंक और अक्षर लिखे हुए हैं। माना जाता है कि इससे ज्योतिष गणना की जाती थी। गहरे अध्ययन के बाद यह ज्योतिष विज्ञान के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।



अब क्या होगा इन पांडुलिपियों का

डिजिटलाइजेशन के बाद देश के विशेषज्ञ इन्हें पढ़ेंगे और समझेंगे। इनमें ज्योतिष के साथ-साथ कई रोगों के उपचार से जुड़ी सामग्री भी है। अनुपम दीक्षित के मुताबिक, यह ज्ञान आने वाले वक्त में पूरे देश के काम आएगा।



FAQ

  1. जम्बूद्वीप क्या है?
    जम्बूद्वीप जैन और हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में वर्णित एक प्राचीन भौगोलिक अवधारणा है। इसमें भरत क्षेत्र, मेरु पर्वत और कई द्वीप-समुद्रों का वर्णन है। यह प्राचीन भारत की ब्रह्मांड रचना की सबसे विस्तृत संकल्पनाओं में से एक है।
  2. ज्ञान भारतम् मिशन क्या है?
    ज्ञान भारतम् मिशन केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत देशभर में बिखरी प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों को खोजा, डिजिटल किया और संरक्षित किया जा रहा है।

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