टीकमगढ़ नगर पालिका को लाखों का चूना लगाया, गफ्फार को गंवानी पड़ी अध्यक्ष की कुर्सी
News in Short
- अब्दुल गफ्फार मलिक को पद से हटाया गया।
- टीकमगढ़ नगर पालिका को 18.89 लाख रुपये का घाटा हुआ।
- 10 कर्मचारियों की नियुक्ति में अनियमितता की गई।
- गफ्फार मलिक का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
- कुर्सी को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच संघर्ष तेज।
News in Detail
BHOPAL.मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ नगर परिषद अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अब्दुल गफ्फार अब पांच साल तक चुनाव भी नहीं पड़ पाएंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 9 गंभीर अनियमितताओं में लिप्त पाए जाने पर यह कार्रवाई की है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सख्ती ने कांग्रेस से एक और नगरीय निकाय से दूर कर दिया है। विभाग ने टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष को आर्थिक एवं प्रशासनिक अनियमितताओं में लिप्त पाए जाने पर उन्हें पद से हटा दिया है। अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक कांग्रेस पार्षदों से चुनकर टीकमगढ़ नगर पालिका के अध्यक्ष बने थे। उन्हें नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप के चलते शो कॉज नोटिस जारी किया था। उनके जवाब से संतुष्ट न होने पर विभाग ने उन्हें नगर पालिका अध्यक्ष के पद से बाहर कर दिया है।
अध्यक्ष रहते नगर पालिका को पहुंचाई क्षति
पप्पू मलिक पर विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के आरोप थे। जिनमें निविदा शर्तों का उल्लंघन, कर्मचारियों की नियुक्ति में लापरवाही और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग शामिल है। उन्होंने पद पर रहते हुए नगर पालिका की दुकानों के आवंटन में सही प्रीमियम की राशि जमा नहीं कराई थी। इससे नपा को 18.89 लाख रुपए का घाटा हुआ। सरकार से पांबदी होने के बावजूद नगर पालिका में 10 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। इस पर नगर पालिका को वेतन भुगतान पर 1.92 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ा था।
संतोषजनक जवाब नहीं देना पड़ा भारी
नगर पालिका की गड़बड़ियों की शिकायत मुख्यालय पहुंचने पर अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव शीलेन्द्र सिंह ने उनसे आर्थिक गड़बड़ी और पद के दुरुपयोग से संबंधित 9 बिंदुओं पर जवाब तलब किया था। कार्रवाई से बचने के लिए अब्दुल गफ्फार ने हाईकोर्ट में अपील की लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। भेजे गए जवाब में भी नपाध्यक्ष अब्दुल गफ्फार विभाग को संतुष्ट नहीं कर पाए थे। यही उन पर भारी पड़ गया।
कुर्सी के लिए उठापटक हुई तेज
पार्षदों से चुनकर पहुंचे नपाध्यक्ष अब्दुल गफ्फार को हटाए जाने के बाद इस कुर्सी को लेकर उठापटक तेज हो गई है। टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पाने के लिए कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच लामबंदी शुरू हो गई है। बीजेपी नेता ने कुर्सी पर काबिज होने के लिए अपने पार्षदों की घेराबंदी और कांग्रेस पार्षदों से जोड़- तोड़ कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस इस झटके से उबरने में ही उलझी नजर आ रही है। कुर्सी गंवाने के बाद अब्दुल गफ्तार ने बीजेपी पर आरोप लगाए हैं। वहीं वे पद दोबारा हासिल करने के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं।
FAQs
अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक को अयोग्य क्यों घोषित किया गया?
अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक को 9 गंभीर अनियमितताओं के कारण अयोग्य घोषित किया गया। इन अनियमितताओं में नियमों का उल्लंघन और नगर परिषद को आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप था।
गफ्फार मलिक ने इस आदेश पर क्या प्रतिक्रिया दी?
गफ्फार मलिक ने इसे राजनीति से प्रेरित आदेश बताया और कहा कि भाजपा कांग्रेस के अध्यक्ष को सहन नहीं कर पा रही थी। उन्होंने इसे विरोधी राजनीतिक ताकतों की साजिश बताया और कानूनी लड़ाई लड़ने की घोषणा की है।
क्या गफ्फार मलिक के खिलाफ केवल वित्तीय अनियमितताएं ही थीं?
नहीं, गफ्फार मलिक पर विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं का आरोप था, जिनमें वित्तीय अनियमितताएं, कर्मचारियों की नियुक्ति में लापरवाही और सरकारी नियमों का उल्लंघन शामिल था।
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