ट्विशा शर्मा सुसाइड केस: सबूत को कार में रखकर घूमते रहे SI, केस डायरी भी लीक
समझें क्या है पूरा मामला...
- एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस में पुलिस जांच की गंभीर लापरवाही सामने आई है।
- आरोपी सास गिरिबाला सिंह को पुलिस डायरी के सीक्रेट दस्तावेज पहले ही मिल रहे थे।
- सब इंस्पेक्टर ने फंदे की रस्सी जब्त तो की लेकिन उसे अपनी कार में ही रखे रहे।
- सास गिरिबाला ने ट्विशा को मानसिक बीमार बताया था।
- सीबीआई ने इसके लिए मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से पूछताछ की है।
ट्विशा शर्मा सुसाइड केस
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस समय सीबीआई (CBI) इस गुत्थी को सुलझाने में लगी है।
सीबीआई की जांच में जो सबसे बड़ी बात सामने आई है। शुरुआत में इस मामले की जांच करने वाली पुलिस ने कई बड़ी लापरवाही की थी।
पुलिस की जांच पर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पुलिस की ढिलाई की वजह से ही आरोपियों को बचने का पूरा मौका मिला।
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केस डायरी के सीक्रेट डाक्यूमेंट्स लीक
इस मामले में हैरानी की बात यह है कि पुलिस की केस डायरी के गुप्त दस्तावेज आरोपियों तक पहुंच चुके थे। ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने जबलपुर हाईकोर्ट में कुछ ऐसे कागजात पेश किए, जिससे साफ पता चलता है कि जांच से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारियां उनके पास पहले से थीं।
इन्हीं कागजातों की मदद से वह समय रहते कोर्ट से अग्रिम जमानत लेने में कामयाब हो गई थीं। हालांकि बाद में 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की इस अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था।
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कानूनी नियम क्या कहता है?
जब यह दस्तावेज लीक हुए उस समय ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को पुलिस ने आरोपी नहीं बनाया था। कानून के मुताबिक जो व्यक्ति आरोपी नहीं है, उसे केस डायरी के अंदर के दस्तावेज देखने या हासिल करने का कोई अधिकार नहीं होता है।
इसके बावजूद उन्होंने जमानत अर्जी के साथ ये कागज कोर्ट में लगा दिए। इससे पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
फंदे की रस्सी को कार में रखा
ट्विशा के परिवार की तरफ से भोपाल कोर्ट में वकील अंकुर पांडे पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस की एक और बड़ी लापरवाही को उजागर किया है।
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रस्सी की जब्ती और लापरवाही की टाइमलाइन
- 13 मई 2026 (सुबह 9:42 बजे): सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने उस फंदे की रस्सी को अपने कब्जे में लिया जिससे ट्विशा का शव लटका था।
- दस्तावेजों में गड़बड़ी: पुलिस के कागजातों में इस बात का कोई साफ जिक्र नहीं है कि उस रस्सी की पहचान आखिर किसने की थी।
- कार में रखी रही रस्सी: एडवोकेट अंकुर पांडे का आरोप है कि इस अहम सबूत को तुरंत एम्स अस्पताल जांच के लिए भेजा जाना चाहिए था। ऐसा करने के बजाय सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने उसे अपनी निजी कार में रख दिया और काफी बाद में जांच के लिए भेजा।
इतनी बड़ी चूक होने के बाद भी सब इंस्पेक्टर पर पुलिस विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके अलावा उसी दिन तीन अन्य जब्ती दस्तावेज भी तैयार हुए थे।
इनमें समर्थ और गिरिबाला का पूरा ब्योरा दर्ज था। इसे आधार बनाकर अब पूरी जांच प्रक्रिया के भेदभाव पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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मनोचिकित्सक से सीबीआई की पूछताछ
इस मामले का एक और पहलू ट्विशा की मानसिक स्थिति से जुड़ा हुआ है। आरोपी सास गिरिबाला सिंह ने भोपाल कोर्ट में दावा किया था कि ट्विशा मानसिक रूप से परेशान थी। उसका मनोरोग से जुड़ा इलाज चल रहा था।
इसी दावे और मेडिकल पेपर्स के दम पर 15 मई को गिरिबाला सिंह को भोपाल कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी।
अब सीबीआई की टीम इन मेडिकल कागजातों की असलियत जानने में जुट गई है। इसी सिलसिले में सीबीआई ने ट्विशा का इलाज करने वाले मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से संपर्क किया और उनसे पूछताछ की।
| सीबीआई ने डॉक्टर से क्या-क्या पूछा? | डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी का जवाब |
| क्या ट्विशा सच में इलाज के लिए आई थी? | डॉक्टर ने सीबीआई से पूछताछ की बात को सही बताया। |
| ट्विशा किस मानसिक समस्या से जूझ रही थी? | डॉक्टर ने कहा कि वह मरीज की निजी बातें शेयर नहीं कर सकते। |
| काउंसलिंग के दौरान उसने अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में क्या बताया था? | मरीज के अधिकारों का हवाला देते हुए डॉक्टर ने निजी बातों का खुलासा करने से इनकार किया। |
अब सीबीआई इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या ट्विशा वाकई किसी मानसिक बीमारी से परेशान थी, या फिर उसके इलाज के इन कागजातों को आरोपियों ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया है।
फिलहाल सीबीआई मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और बाकी कड़ियों को जोड़कर मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है।
FAQ
- ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में पुलिस पर क्या आरोप लगे हैं?
पुलिस पर मुख्य रूप से दो बड़े आरोप लगे हैं। पहला यह कि उन्होंने केस डायरी के बेहद गोपनीय दस्तावेज आरोपियों तक पहुंचने दिए, जिससे उन्हें जमानत मिलने में मदद मिली। दूसरा यह कि सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने मौत में इस्तेमाल हुई फंदे की रस्सी को तुरंत अस्पताल भेजने के बजाय अपनी कार में रख दिया था।