ट्विशा केस: पूर्व जज गिरिबाला अब इस आधार पर मांगेंगी बेल, सुनवाई 10 अगस्त को
समझें क्या है पूरा मामला
- ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल में मौत हुई थी।
- इस मामले में सास गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ पर केस है।
- गिरिबाला की पहले मिली अग्रिम जमानत हाईकोर्ट ने रद्द की थी।
- भोपाल कोर्ट ने 25 जुलाई को नियमित जमानत खारिज की।
- अब गिरिबाला ने हाई कोर्ट में फिर नियमित जमानत मांगी है।
ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने हाई कोर्ट में बेल मांगी है। यह उनका नियमित जमानत के लिए नया आवेदन है। आवेदन मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ में है। इस आवेदन का नंबर MCRC 37723/2026 है। मामला जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच में सूचीबद्ध हुआ है। 10 अगस्त को सुनवाई होना तय है।
इन आधारों पर बेल मांग रही हैं गिरिबाला
जानकारी के अनुसार गिरिबाला ने आवेदन में आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने दहेज मांगने के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया। ट्विशा को प्रताड़ित करने से भी इनकार किया है।
ट्विशा के होने वाले बच्चे के पिता पर सवाल उठाने से भी इनकार किया। गिरीबाला ने गर्भपात के लिए दबाव बनाने का आरोप भी नकारा है। उनके अनुसार आरोप ट्विशा के रिश्तेदारों ने लगाए हैं। गिरीबाला की ओर से इसे पारिवारिक रंजिश से जुड़ा मामला जाएगा।
डॉक्टरों के बयानों को बनाया अहम आधार
नए जमानत आवेदन में डॉक्टरों के बयान अहम बताए गए हैं। आवेदन में एक मनोचिकित्सक सहित दो डॉक्टर का नाम लिया गया है। पहले की ही तरह इस बार भी गिरिबाला की ओर से तर्क दिया जाएगा कि ट्विशा डिप्रेशन से गुजर रही थीं।
आवेदन में दवाओं के सेवन का भी दावा किया गया है। गिरिबाला ने गर्भपात को लेकर अलग दावा किया है। उनका कहना है कि ट्विशा खुद गर्भपात चाहती थीं। इस आधार पर उन्होंने अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाया है।
पितृत्व और गर्भपात के आरोपों को भी चुनौती
गिरिबाला के आवेदन में एक खास तर्क सामने आया है। उन्होंने कहा कि ट्विशा के होने वाले बच्चों के पिता पर सवाल उठाने का प्रमाण नहीं है। उन्होंने गर्भपात के लिए दबाव बनाने से भी इनकार किया। इसके लिए डॉक्टरों के बयानों का हवाला दिया जाएगा। इन बयानों से अभियोजन की कहानी गलत होने का दावा है। गिरिबाला इसे जमानत के पक्ष में अहम आधार बताने वाली है।
7.50 लाख के लेनदेन का भी हवाला
हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होते वक्त गिरिबाला सिंह की ओर से जो तर्क रखे गए थे। वह इस नियमित जमानत में भी रखे जाएंगे।
उनके अनुसार ट्विशा के खाते में 7.50 लाख रु. भेजे गए। इसे दहेज मांग के आरोप के खिलाफ बताया जाएगा।
गिरिबाला के पक्ष के अनुसार दहेज मांगने का कोई सीधा प्रमाण नहीं है। इसके साथ ही ट्विशा के खाते के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया जाना तय है। गिरिबाला के अनुसार मायके से पैसे भेजने का प्रमाण नहीं है। इस आधार पर दहेज आरोपों पर सवाल उठाया जाएगा।
मौत से ठीक पहले क्रूरता का प्रमाण नहीं होने का दावा
जानकारी के अनुसार गिरिबाला ने आवेदन में एक और अहम दावा किया है। उन्होंने कहा कि मौत से ठीक पहले क्रूरता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने दहेज मांग का कोई ताजा प्रमाण नहीं बताया। इसी आधार पर धारा 80 की जरूरतों पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराध की जरूरी बातें पूरी नहीं होतीं। इस दलील को उन्होंने नियमित जमानत का आधार बनाया है।
वॉयस सैंपल को लेकर भी रखा जाएगा पक्ष
गिरिबाला की जमानत की मांग के साथ वॉयस सैंपल का मुद्दा भी उठेगा। गिरिबाला के अनुसार उन्होंने 9 जुलाई को सैंपल दिया था। उन्होंने दोबारा सैंपल देने से इनकार नहीं किया था। उनका दावा है कि उन्होंने तीन घंटे सैंपल दिया। अदालत में दोबारा सैंपल देने की बात रखते हुए गिरिबाला जांच में असहयोग के आरोप को गलत बताने वाली हैं।
सीबीआई के जमानत के विरोध पर तैयारी
सीबीआई ने पहले भी जमानत का विरोध करते हुए आशंका जताई थी। जांच एजेंसी ने साक्ष्य प्रभावित होने की बात कही थी। अब गिरिबाला की ओर से वकील इस आशंका को निराधार साबित करने की कोशिश करेंगे।
तर्क यही रहेगा की मुख्य गवाह दिल्ली में रहते हैं। इसलिए वह गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकतीं। इसके साथ ही भोपाल में स्थायी संपत्ति और अदालत की सभी शर्तें मानने के हवाले से जमानत की मांग की जाएगी।
64 साल की उम्र और न्यायिक सेवा का भी आधार
गिरिबाला की उम्र 64 वर्ष बताई गई है। कोर्ट में उनकी लंबी न्यायिक सेवा का हवाला देते हुए ,जांच के लिए हिरासत को गैर जरूरी साबित करने की कोशिश की जाएगी।
पूरी घटना क्या थी
ट्विशा शर्मा की शादी समर्थ सिंह से हुई थी। यह शादी 9 दिसंबर 2025 को नोएडा में हुई थी। ट्विशा बाद में अपने पति और सास संग भोपाल रहीं। परिवार ने दहेज मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए। गर्भावस्था के बाद पितृत्व को लेकर विवाद का आरोप लगा। गर्भपात के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगा।
12 मई 2026 को ट्विशा की मौत हो गई। उनका शव ससुराल के घर में मिला था। इसके बाद कटारा हिल्स थाने में केस दर्ज हुआ। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई। गिरिबाला और उनके बेटे समर्थ सिंह आरोपी बनाए गए। गिरिबाला ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।
पहले की जमानत और हाई कोर्ट का फैसला
घटना के बाद गिरिबाला को अग्रिम जमानत मिली थी। भोपाल की अदालत ने 15 मई को यह राहत दी थी। राज्य और ट्विशा के पिता ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। 27 मई को जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत का आदेश रद्द कर दिया।
इसके बाद गिरिबाला जांच एजेंसी की हिरासत में गईं। बाद में उन्होंने भोपाल कोर्ट में नियमित जमानत मांगी। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने 25 जुलाई को इसे खारिज किया। कोर्ट ने गंभीर आरोप और जांच को अहम माना। गवाह प्रभावित होने की आशंका भी कोर्ट ने मानी थी। अब इसी के बाद हाई कोर्ट में नया आवेदन आया है।
भोपाल कोर्ट के फैसले के बाद बदला पूरा समीकरण
भोपाल कोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया था। कोर्ट ने केस डायरी में गंभीर सामग्री का जिक्र किया। जांच अभी जारी होने की बात भी आदेश में थी। कोर्ट ने गिरिबाला के प्रभावशाली होने की बात कही। गवाहों पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई।
अब हाई कोर्ट में इन्हीं परिस्थितियों पर बहस होगी। गिरिबाला अपने नए आवेदन में अलग आधार रख रही हैं। वह अब हिरासत जारी रखने की जरूरत पर सवाल उठा रही हैं।
अब 10 अगस्त की सुनवाई पर नजर
गिरिबाला का नया आवेदन अब हाई कोर्ट पहुंच चुका है। 10 अगस्त की सुनवाई जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच में होना तय है। मामला 726 नंबर पर लिस्ट है। सुनवाई में सीबीआई अपना पक्ष रख सकती है। ट्विशा के परिवार की ओर से विरोध संभव है। गिरिबाला की ओर से नए आधार रखे जाएंगे। अदालत इन दलीलों पर विचार कर सकती है। इसके बाद जमानत पर अगला फैसला सामने आएगा।
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