ट्विशा मौत मामला : गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर हाईकोर्ट में सरकार का विरोध

Neel Tiwari | May 27, 2026, 19:13 IST
Giribala-Singh
ट्विशा शर्मा मौत मामले में गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई दौरान सरकार ने आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग नहीं किया।

NEWS IN SHORT

  • सरकार ने कहा- गिरिबाला सिंह ने अग्रिम जमानत की हर शर्त का उल्लंघन किया।
  • कोर्ट में नोटिसों का दिनांकवार रिकॉर्ड पेश किया गया।
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर 9 चोटों का उल्लेख।
  • सीसीटीवी फुटेज और व्हाट्सएप चैट लीक करने का आरोप।
  • हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, अब मामले में CBI को भी पक्षकार बनाया जाएगा।

News In Detail

यह जमानत दी ही नहीं जानी चाहिए थी

ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई में तीखी बहसें और संवेदनशील मुद्दे उठाए गए। सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला सामान्य जमानत का नहीं बल्कि नवविवाहित महिला की संदिग्ध मौत और गंभीर दहेज प्रताड़ना से जुड़ा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वे जमानत रद्द करने की मांग नहीं कर रहे। उनका कहना है कि उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर यह अग्रिम जमानत दी ही नहीं जानी चाहिए थी।



सरकार ने निचली अदालत के आदेश पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आदेश में कई टिप्पणियां केस की मेरिट पर अंतिम निष्कर्ष जैसी हैं। बताया गया कि निचली अदालत ने प्रारंभिक स्तर पर दहेज के लिए दो लाख रुपये मांगने का आरोप प्रथम दृष्टया स्पष्ट नहीं माना। जबकि एफआईआर, गवाहों के बयान और चैट रिकॉर्ड इसके विपरीत संकेत देते हैं। महाधिवक्ता ने कहा कि केवल उम्र, स्थायी पता और आपराधिक रिकॉर्ड न होने पर अग्रिम जमानत दी गई, तो 90 प्रतिशत मामलों में ऐसा करना पड़ेगा।



कोर्ट में पेश किया गया पूरा रिकॉर्ड

सुनवाई में सरकार ने नोटिस और जांच प्रक्रिया का विस्तृत ब्यौरा कोर्ट के सामने रखा। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह ने शुरुआती नोटिस लेने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वे अपने अधिवक्ता के माध्यम से जवाब देंगे। जब अगला नोटिस पुलिस लेकर पहुंची, तो गिरिबाला और सिद्धार्थ घर पर नहीं थे और परिवार के एक रिश्तेदार ने नोटिस लेने से मना किया।



सरकार ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी दो अलग नोटिस भेजे गए, लेकिन गिरिबाला सिंह बयान देने से बचती रहीं। अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी व्हाट्सएप के जरिए पूछताछ में उन्होंने सहयोग नहीं किया। कोर्ट में यह दलील दी गई कि अग्रिम जमानत की शर्त थी कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेगी, जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होगी और साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगी। व्यवहार में इन सभी शर्तों का उल्लंघन हुआ।



सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गिरिबाला सिंह लंबे समय तक न्यायपालिका में रही हैं और कानून की बारीकियों को समझती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ के लिए जानबूझकर शाम का समय तय किया गया ताकि कानूनी प्रावधानों का तकनीकी लाभ लिया जा सके और महिला से पूछताछ सीमित हो।



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नैरेटिव सेट करने की कोशिश

सुनवाई में सरकार ने सबसे गंभीर आरोप सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को लेकर लगाए। बताया गया कि पुलिस ने घर का सीसीटीवी जब्त किया, फिर भी चुनिंदा क्लिप मीडिया और सोशल मीडिया में प्रसारित हुईं। सरकार ने कहा कि इससे पूरे मामले का नैरेटिव प्रभावित करने और जनमत तैयार करने की कोशिश हुई।



अदालत को यह भी बताया गया कि जब सीसीटीवी पुलिस द्वारा सीज था, तो फुटेज आरोपियों के पक्ष तक कैसे पहुंची। इसे साक्ष्यों तक निरंतर पहुंच और संभावित एविडेंस टेंपरिंग का संकेत माना गया। पीड़िता ट्विशा का मोबाइल भी आरोपियों के कब्जे में रहा और उसके व्हाट्सएप चैट तथा कॉल रिकॉर्डिंग चुनिंदा रूप से साझा की गईं।



महाधिवक्ता ने कहा कि गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक करियर में क्रिमिनल मामलों और एविडेंस मेंटेनेंस की ट्रेनिंग ली है। उन्हें घटनास्थल और डिजिटल साक्ष्यों की संवेदनशीलता पता थी। सरकार ने दलील दी कि ऐसे में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता।



पीएम रिपोर्ट और व्हाट्सएप चैट पर सरकार का जोर

सरकार ने सुनवाई में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विवरण प्रस्तुत किया। बताया गया कि ट्विशा के शरीर पर कुल नौ चोटों के निशान थे। चोटें सिर, कोहनी और कलाई जैसी जगहों पर थीं। रिपोर्ट में स्पष्ट था कि ये चोटें मृत्यु से पहले की थीं। अस्पताल ले जाते समय ये चोटें नहीं आई थीं। सरकार ने कहा कि यह तथ्य आत्महत्या की सामान्य थ्योरी पर सवाल उठाता है।



कोर्ट को व्हाट्सएप चैट के कुछ हिस्सों की जानकारी भी दी गई। कई चैट में पति-पत्नी के विवाद का मुख्य कारण सास गिरिबाला सिंह बताया गया। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच प्रारंभिक स्तर पर है और आगे महत्वपूर्ण चैट और डिजिटल साक्ष्य सामने आ सकते हैं।



सरकार ने कहा कि घटना वाली रात 9:41 बजे ट्विशा ने अपनी मां को फोन किया। कॉल में समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी और अचानक कॉल कट गई। परिवार ने 50 मिनट तक संपर्क की कोशिश की, फिर गिरिबाला सिंह ने फोन उठाकर ट्विशा की मौत की जानकारी दी।



हम जांच में पूरा सहयोग करना चाहते हैं

गिरिबाला सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सरकार के आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि गिरिबाला सिंह जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं। उन्होंने जांच अधिकारी को व्हाट्सएप और ईमेल से भी संपर्क किया। बचाव पक्ष ने कहा कि मीडिया में मामला एकतरफा प्रस्तुत किया जा रहा है। जांच प्रभावित करने का आरोप निराधार है।



सरकार ने इन दलीलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को लगातार टालने की कोशिश हुई। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले को प्रभावित करने का प्रयास भी किया गया। सरकार ने कहा कि अग्रिम जमानत मिलने के तुरंत बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस और चुनिंदा वीडियो क्लिप प्रसारित होना संयोग नहीं है।



सुनवाई पूरी, हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

दोनों पक्षों की लंबी और गंभीर दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी गई है, इसलिए दोनों याचिकाओं में सीबीआई को पक्षकार बनाया जाए। अदालत ने इसके लिए एक घंटे में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।



अब पूरे मामले की निगाह हाईकोर्ट के आदेश पर है। आदेश में तय होगा कि गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत बरकरार रहेगी या निरस्त होगी। ट्विशा शर्मा मौत मामला अब सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं रहा बल्कि प्रदेश के सबसे चर्चित कानूनी और सामाजिक मामलों में बदल चुका है।



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