UCC पर सियासत तेज : आदिवासी पहचान को लेकर सिंघार का बड़ा सवाल, सरकार से मांगा साफ रोडमैप
समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति गर्म है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से सीधा सवाल किया है कि क्या यह कानून आदिवासी समाज पर लागू होगा या उन्हें बाहर रखा जाएगा? उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पष्टता नहीं आई, तो यह कानून आदिवासी पहचान, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा बन सकता है।
क्या हैं सिंघार के मुख्य सवाल और मांगें?
- सरकार साफ करे: UCC आदिवासियों पर लागू होगा या नहीं।
- आदिवासी समाज को दायरे से बाहर रखने की गारंटी दी जाए।
- परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
- विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत और खुली चर्चा कराई जाए।
- सभी धर्मों, जनजातियों और अल्पसंख्यकों को विश्वास में लिया जाए।
आदिवासी पहचान पर खतरे की आशंका
उमंग सिंघार का कहना है कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में एक जैसा कानून लागू करना आसान नहीं है। आदिवासी समाज सदियों से अपनी अलग परंपराओं, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान के साथ जीवन जी रहा है। ऐसे में एकरूप कानून थोपना न सिर्फ उनकी परंपराओं का अनादर होगा, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन माना जा सकता है।
संविधान का दिया हवाला
सिंघार ने अनुच्छेद 44 का जिक्र करते हुए कहा कि UCC को संविधान में “नीति निदेशक तत्व” के रूप में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि इसे लागू करने से पहले व्यापक सहमति और संवाद जरूरी है। उनका आरोप है कि सरकार बिना चर्चा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जल्दबाजी में इसे लागू करना चाहती है, जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
आदिवासी अधिकारों पर सीधा असर क्यों?
- 5वीं और 6वीं अनुसूची आदिवासी समुदायों को विशेष संरक्षण देती हैं।
- विवाह, उत्तराधिकार और जमीन से जुड़े उनके अपने पारंपरिक नियम हैं।
- UCC बिना छूट के लागू हुआ तो ये व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।
सिंघार का कहना है कि “समानता” का मतलब सभी को एक जैसा बना देना नहीं, बल्कि हर समुदाय की विशेषता को सम्मान देते हुए न्याय करना है।
“बिना संवाद कानून, समाज में बढ़ाएगा दूरी”
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर न तो आदिवासी संगठनों से बात की गई, न पंचायतों से और न ही अन्य सामाजिक या धार्मिक समूहों से। उनके मुताबिक, बिना सहमति लाया गया कानून समाज में एकता नहीं, बल्कि अलगाव पैदा करेगा।
सरकार को दी सलाह: पहले भरोसा, फिर कानून
सिंघार ने साफ कहा कि सरकार को तुष्टीकरण की राजनीति छोड़कर सभी समुदायों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि UCC का कोई भी मसौदा व्यापक चर्चा और सहमति के बाद ही तैयार किया जाए।
चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में लिया गया फैसला देश की सांस्कृतिक विविधता के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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