MP में UCC: गुजरात मॉडल की तरह आदिवासियों को मिलेगी छूट! मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक
News In Short
MP में UCC से आदिवासियों को छूट मिल सकती है।
जस्टिस देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित।
गुजरात और उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन।
मानसून सत्र जुलाई में विधेयक पेश हो सकता है।
MP बनेगा UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य।
News In Detail
मध्यप्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। गुजरात की तर्ज पर MP में भी आदिवासी वर्ग को UCC से छूट दिए जाने की तैयारी है। जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति गठित की गई है। यह विधेयक जुलाई के मानसून सत्र में पेश हो सकता है।
MP में UCC लागू करने की तैयारी
मध्यप्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। गुजरात की तरह ही प्रदेश में भी आदिवासी वर्ग को UCC से बाहर रखने की योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय की मूल सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना है। मध्यप्रदेश इसे लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बनेगा।
आदिवासियों को क्यों मिलेगी UCC से छूट?
UCC से बाहर रखे जाने पर आदिवासी वर्ग के परंपरागत रीति-रिवाज सुरक्षित रहेंगे। विवाह, विवाह-विच्छेद, विरासत और संपत्ति से जुड़े पारंपरिक आदिवासी नियम (Tribal Customs) लागू रहेंगे। UCC के प्रावधान उन पर लागू नहीं होंगे। यह कदम आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विविधता (Cultural Identity) की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है। गुजरात में पहले से यही व्यवस्था लागू है।
जस्टिस देसाई समिति का गठन
प्रदेश सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई (Justice Ranjana Prasad Desai) की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति बनाई है। इस समिति में विधि के जानकार, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल किए गए हैं। समिति अब जनसुनवाई (Public Hearing) के जरिए लोगों की राय एकत्र करेगी। समिति को 60 दिन के भीतर अपना प्रतिवेदन सरकार को सौंपना होगा।
गुजरात में भी रही है देसाई की भूमिका
यह उल्लेखनीय है कि जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई (Justice Desai) की गुजरात में भी UCC का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मध्यप्रदेश सरकार उनके अनुभव का लाभ उठाना चाहती है। इसीलिए उन्हें इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उनकी अगुवाई में यह समिति एक संतुलित और कानूनी दृष्टि से सशक्त मसौदा तैयार करेगी।
गुजरात-उत्तराखंड मॉडल का अध्ययन
UCC लागू करने से पहले MP सरकार गुजरात और उत्तराखंड मॉडल (Gujarat-Uttarakhand UCC Model) का गहन अध्ययन कराने जा रही है। इसकी जिम्मेदारी पुलिस मुख्यालय (Police Headquarters) को सौंपी गई है। मुख्यालय दोनों राज्यों में लागू प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट देगा। यह अध्ययन मध्यप्रदेश के लिए सबसे उपयुक्त UCC मॉडल तय करने में मदद करेगा।
हर प्रावधान के विधिक पहलू की जांच
सरकार UCC के हर प्रावधान का कानूनी पहलू (Legal Aspects) भी ध्यान से देख रही है। इसीलिए समिति में विधि विशेषज्ञों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों की उपस्थिति से समिति का दृष्टिकोण व्यापक और समावेशी बनेगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि UCC सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप हो।
मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक
मध्यप्रदेश विधानसभा के जुलाई में होने वाले मानसून सत्र (Monsoon Session) में UCC विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। इसी कारण समिति को 60 दिन की समयसीमा दी गई है। समय पर रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार विधानसभा में यह विधेयक ला सकती है। मध्यप्रदेश के बाद UCC लागू करने वाले राज्यों की सूची और लंबी हो सकती है।
UCC क्या है और यह क्यों जरूरी है?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) यानी UCC एक ऐसा कानून है जो देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। इसमें विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक जैसे नियम होते हैं। अभी अलग-अलग धर्मों के अपने पर्सनल लॉ (Personal Law) हैं। UCC का लक्ष्य इन सभी को एक समान कानूनी ढांचे (Legal Framework) में लाना है।
गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड...
आदिवासियों को मिली छूट
गुजरात सरकार ने UCC 2026 में आदिवासी समुदायों को इस कानून से बाहर रखा है। यानी यह कानून उन पर लागू नहीं होगा। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि आदिवासियों की अपनी पुरानी परंपराएं, रीति-रिवाज और शादी के तरीके हैं, जिन्हें सरकार बचाना चाहती है।
आदिवासियों को क्यों छूट दी गई?
गुजरात में आदिवासी लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। इनकी सैकड़ों साल पुरानी अपनी अलग सामाजिक व्यवस्था है। सरकार का कहना है कि UCC का मकसद किसी की संस्कृति को तोड़ना नहीं है, इसलिए आदिवासियों की परंपराओं को कानूनी सुरक्षा दी गई है।
यह कानून क्यों लाया गया?
इस कानून का मुख्य मकसद है कि राज्य के सभी नागरिकों के लिए-
- शादी
- तलाक
- संपत्ति
- गोद लेना
- लिव-इन रिलेशनशिप
इन सभी मामलों में धर्म से परे एक समान नियम हो। सरकार को उम्मीद है कि इससे समाज में बराबरी आएगी और कानूनी उलझनें कम होंगी।
कानून की मुख्य बातें...
शादी का 60 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।
एक से ज्यादा शादी पर पूरी तरह रोक होगी।
लिव-इन रिलेशनशिप का भी रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।
विपक्ष ने इस कानून का विरोध किया है, लेकिन सरकार का कहना है कि आदिवासी समुदायों की पहचान और उनके रीति-रिवाज पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
FAQ
- मध्यप्रदेश में UCC से आदिवासियों को छूट क्यों दी जाएगी?
मध्यप्रदेश सरकार आदिवासी वर्ग की मूल सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत रीति-रिवाजों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उन्हें UCC से बाहर रखने की तैयारी कर रही है। UCC से बाहर रहने पर आदिवासियों के विवाह, तलाक, विरासत और संपत्ति से जुड़े पारंपरिक नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। गुजरात में भी यही व्यवस्था पहले से लागू है और मध्यप्रदेश उसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है।
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