UCC पर आमने-सामने आए रामेश्वर शर्मा और आरिफ मसूद, 5 बीवी 25 बच्चों वाले बयान पर गरमाई सियासत
News In Short
- मध्यप्रदेश में यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
- भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने यूसीसी का खुलकर समर्थन किया है।
- कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा, सरकार मुसलमानों को निशाना बना रही है।
- रामेश्वर शर्मा ने बढ़ती जनसंख्या को देश की बड़ी समस्या बताया है।
- आरिफ मसूद ने कहा कि यूसीसी लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश है।
News In Detail
UCC पर भोपाल में सियासी तूफान
मध्यप्रदेश में यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) को लेकर राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकेतों के बाद यह मुद्दा कानून की सीमा से निकलकर जनसंख्या, धर्म और सरकार की मंशा तक जा पहुंचा है। भोपाल में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के बीच तीखी बयानबाजी सामने आई है।
यूसीसी पर रामेश्वर शर्मा ने क्या कहा?
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने यूसीसी का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और यह एक बड़ी चिंता का विषय है। एक कौम में 5 बीवी और 25 बच्चे पैदा करना संकट खड़ा कर रहा है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने से इस तरह की समस्याओं पर नियंत्रण लगेगा।
शर्मा ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब सबको शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का फायदा एक जैसा मिलता है, तो कानून भी एक जैसा होना चाहिए। उन्होंने हम दो हमारे दो के नारे को याद दिलाते हुए कहा कि सभी को यूसीसी का समर्थन करना चाहिए।
आरिफ मसूद ने किया पलटवार
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने शर्मा की बातों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोग गैस और खाद जैसी बुनियादी जरूरतों से जूझ रहे हैं। इन असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सरकार यूसीसी का मुद्दा उठा रही है। मसूद ने इसे भेदभावपूर्ण बताया और कहा कि यह एक खास समुदाय यानी मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश है।
मसूद ने यह भी कहा कि यदि आदिवासी और दूसरे समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाता है, तो इसे यूनिफॉर्म यानी एकसमान कानून कैसे कहा जाएगा। उनका तर्क था कि जो कानून सबपर एक जैसा लागू नहीं होता, वह समानता का दावा नहीं कर सकता।
पहले भी हो चुकी है भिड़ंत
यह पहली बार नहीं है जब रामेश्वर शर्मा और आरिफ मसूद आमने-सामने आए हों। हिजाब, धार्मिक जुलूस, अतिक्रमण और स्थानीय विवादों जैसे मामलों में भी दोनों नेता पहले टकरा चुके हैं। मसूद अक्सर अल्पसंख्यकों, वक्फ और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर मुखर रहते हैं। वहीं शर्मा जनसंख्या नियंत्रण और यूसीसी जैसे विषयों पर हमेशा आगे रहते हैं।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में दोनों नेताओं की राजनीतिक छवि भी अहम भूमिका निभाती है। दोनों अपने-अपने समर्थकों के बीच मजबूत पहचान रखते हैं।
यूसीसी आखिर है क्या?
यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा कानूनी ढांचा है जो सभी धर्मों के लोगों पर एक जैसे नियम लागू करेगा। इसमें शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामले शामिल हैं। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ (Personal Law) हैं।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जिसने यूसीसी लागू किया है। मध्यप्रदेश में भी इस पर चर्चा जोर पकड़ रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के संकेतों के बाद राजनीतिक दलों में इस पर बहस और तेज हो गई है।
बहस का असर क्या होगा?
यूसीसी पर यह बहस सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है। यह पूरे प्रदेश में एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक सवाल की तरह उठ रही है। जहां एक तरफ भाजपा इसे समानता और राष्ट्रीय एकता से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों पर हमले के तौर पर देख रहा है। आने वाले दिनों में यह विषय और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता दिखेगा।
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