सिंहस्थ से पहले उज्जैन बनेगा ‘EV मॉडल सिटी’, MP में इलेक्ट्रिक मिशन अब ऑन ग्राउंड
मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर अब सिर्फ प्लानिंग नहीं, बल्कि तेजी से ग्राउंड पर बदलाव दिखने लगा है। सबसे बड़ा फोकस उज्जैन है, जिसे सिंहस्थ से पहले ‘EV मॉडल सिटी’ के रूप में तैयार किया जा रहा है। अंदरखाने तैयार हो रहे इस ब्लूप्रिंट में गाड़ियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ पार्किंग, चार्जिंग और सेफ्टी को लेकर बड़ा बदलाव शामिल है।
सिंहस्थ बना ट्रिगर, उज्जैन में पूरा सिस्टम शिफ्ट
उज्जैन को इस प्रोजेक्ट का सेंटर इसलिए बनाया गया है क्योंकि सिंहस्थ के दौरान यहां भारी भीड़ और ट्रैफिक प्रेशर रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के हिसाब से री-डिजाइन करने की तैयारी है, ताकि प्रदूषण कम हो और ट्रांसपोर्ट ज्यादा व्यवस्थित हो।
संख्या नहीं, पूरा इकोसिस्टम बदलने की तैयारी
फिलहाल प्रदेश में करीब 300 ई-व्हीकल्स (बसें) हैं, लेकिन प्लान इन्हें सीधे 3000 तक ले जाने का है। यह सिर्फ संख्या बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश है जहां EV का इस्तेमाल आसान और सामान्य हो जाए।
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ग्राउंड पर क्या बदल रहा है?
सरकारी उपयोग के लिए ई-व्हीकल्स की शुरुआती खरीद हो चुकी है। साथ ही, शहरों के स्तर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्राथमिक विकल्प बनाने की दिशा में काम तेज हुआ है।
राजधानी में भी बड़ा शिफ्ट आने वाला
राजधानी भोपाल में पब्लिक सर्विस के लिए बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लाने की तैयारी है। यह बदलाव आने वाले समय में शहरी परिवहन के पैटर्न को बदल सकता है।
पार्किंग का गेम बदलने वाला फॉर्मूला
नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक पार्किंग में 20% जगह ई-व्हीकल्स के लिए रिजर्व रखने का फॉर्मूला लागू किया जा रहा है। इसी स्पेस में चार्जिंग स्टेशन विकसित होंगे, जहां एक साथ 4–6 गाड़ियां चार्ज हो सकेंगी।
प्राइवेट सेक्टर भी इस बदलाव का हिस्सा
सिर्फ सरकारी स्तर तक सीमित रहने के बजाय, इस मिशन में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है। मकसद है कि शहरों में EV का नेटवर्क तेजी से फैल सके और उपयोग आसान बने। देशभर में दोपहिया ई-व्हीकल्स की संख्या 18 लाख से बढ़कर 24 लाख तक पहुंच चुकी है। मध्यप्रदेश भी सब्सिडी और प्रोत्साहन के जरिए इस रफ्तार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।
महिलाओं के लिए अलग फोकस
इस प्लान में महिलाओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर पार्किंग सुविधा देने का प्रावधान जोड़ा जा रहा है। इससे EV यूजर्स में उनकी भागीदारी बढ़ाने की कोशिश है।
हादसों के बाद अब सेफ्टी पर फोकस
हाल में ई-चार्जिंग से जुड़े हादसों के बाद अब सेफ्टी सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। इंदौर जैसी घटनाओं ने सिस्टम की कमजोरियां उजागर की हैं, खासकर गैर-मानक चार्जिंग किट के इस्तेमाल को लेकर। कॉलोनियों, सोसायटियों और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स में चार्जिंग को लेकर नए गाइडलाइन तैयार हो रहे हैं। इसमें तय मानकों के अनुसार चार्जिंग पॉइंट और उपकरण अनिवार्य किए जा सकते हैं।
कमिश्नर संकेत भोंडवे का फोकस
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे के अनुसार,उज्जैन को सिंहस्थ से पहले EV मॉडल सिटी बनाने का लक्ष्य तय किया गया है और इसके लिए सभी जरूरी मानकों पर तेजी से काम चल रहा है।
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क्यों अहम है ये पूरा प्लान?
यह सिर्फ गाड़ियों का बदलाव नहीं, बल्कि शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा ट्रांजिशन है। ग्रीन ट्रांसपोर्ट, प्रदूषण नियंत्रण और फ्यूचर रेडी सिटी—तीनों को एक साथ जोड़ने की कोशिश है।
एक नजर में पूरी तस्वीर:
- उज्जैन: सिंहस्थ से पहले EV मॉडल सिटी
- 300 से 3000 ई-व्हीकल्स का लक्ष्य
- 20% पार्किंग EV के लिए रिजर्व
- चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार
- सेफ्टी गाइडलाइन सख्त होने वाली
पब्लिक + प्राइवेट दोनों सेक्टर एक्टिव
मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब घोषणा से आगे बढ़कर एक स्पष्ट और आक्रामक एक्शन प्लान में बदल चुकी है। अगर यह मॉडल सफल रहा, तो उज्जैन देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहां EV सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि मुख्य परिवहन व्यवस्था बन जाएगा।
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