उज्जैन जमीन विवाद में CMO का बयान, मोहन यादव परिवार पर लगे आरोप किए खारिज
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- CMO ने मोहन यादव परिवार पर लगे आरोप खारिज किए।
- दिसंबर 2023 के बाद नहीं खरीदी कोई नई जमीन।
- रिपोर्ट में 137 भूखंड, 168 एकड़ खरीद का दावा।
- कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग रखी।
- अखिलेश यादव ने इसे भाजपा की साजिश बताया।
मध्य प्रदेश में उज्जैन जमीन विवाद (Ujjain Land Dispute) ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार पर बड़े आरोप लगे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के बाद विवाद गहराया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। CMO ने साफ कहा है कि पद संभालने के बाद कोई जमीन नहीं खरीदी गई। विपक्ष ने जांच की मांग की है।
CMO ने दी बड़ी सफाई
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को बड़ा आधिकारिक बयान जारी किया। उज्जैन जमीन विवाद (Ujjain Land Dispute) पर सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की। सभी आरोपों को CMO ने सिरे से खारिज कर दिया है।
बयान में कहा गया कि दिसंबर 2023 के बाद कोई जमीन नहीं ली गई। पद संभालने के बाद परिवार ने नई जमीन नहीं खरीदी। मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव के नाम पर भी कोई खरीद नहीं हुई।
CMO का बयान (CMO Statement) सामने आने के बाद चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द विस्तृत बयान जारी करेगी। हर पहलू पर स्थिति पूरी तरह साफ की जाएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने लगाए थे आरोप
इधर भोपाल में भी कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेस की। इसमें एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिजनों ने उज्जैन व आसपास 168 एकड़ भूमि खरीद ली।
आरोप है कि इन खरीदी गई जमीनों के आसपास बड़ी अधोसंरचना परियोजनाएं- जैसे ग्रीनफील्ड हाईवे- आईं और कई मामलों में जमीनें परियोजना प्रभावित क्षेत्रों से सटी हुई हैं।
पटवारी ने खरीदी का ब्योरा दिया और कहा कि चार रियल एस्टेट कंपनियों में सीमा व मोहन की प्रमुख हिस्सेदारी है। उन्होंने पूछा कि क्या योजना पहले आई थी या जमीन पहले खरीदी गई, क्या भूमि उपयोग बदला गया, और क्या मुख्यमंत्री या कैबिनेट ने निजी लाभ के बारे में चर्चा की। पटवारी ने निष्पक्ष जांच और पूरी पारदर्शिता की मांग की।
अखिलेश यादव का अलग दावा
इस बड़े विवाद के बीच अखिलेश यादव का अलग बयान सामने आया। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने अलग ही नजरिया रखा। उन्होंने इसे भाजपा की अंदरूनी साजिश बताकर सबको चौंकाया।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि मोहन यादव को हटाने का बहाना ढूंढा जा रहा है। उनके अनुसार मोहन यादव पहले से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं। इसलिए इन आरोपों में कोई नई बात नहीं है।
अखिलेश ने यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा। दावा किया कि उन्होंने 300 से 600 एकड़ जमीन ली है। अखिलेश ने भाजपा पर मुख्यमंत्री बदलने की कोशिश का आरोप लगाया। हालांकि उन्होंने अपने दावों के सबूत सार्वजनिक नहीं किए।
विवादित जमीन का पूरा ब्योरा
विवादित जमीन का बड़ा हिस्सा खास और संवेदनशील इलाकों में है। करीब 111 एकड़ जमीन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के पास बताई जा रही है। यह इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़ा क्षेत्र है। यह क्षेत्र कई बड़े प्रोजेक्ट्स से सीधे जुड़ा हुआ है।
रिपोर्ट में गोविंद यादव का नाम भी सामने आया है। नीलेश यादव जैसे करीबियों के नाम भी रिपोर्ट में शामिल हैं। इन परियोजनाओं से जमीन की कीमत तेजी से बढ़ने की संभावना है। पूरे मामले पर अब सबकी निगाहें CMO के विस्तृत बयान पर हैं। सरकार जल्द बड़ा आधिकारिक बयान जारी कर सकती है।
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