राम मंदिर विवाद के बीच खुला महाकाल का खजाना, ऐसे होता है एक-एक पैसे का हिसाब

Kaushiki | Jun 24, 2026, 10:30 IST
mahakaal mandir daan
उज्जैन के महाकाल मंदिर में वित्तीय वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है। महाकाल लोक बनने के बाद भक्तों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। राम मंदिर चंदे के विवाद के बीच महाकाल मंदिर की सुरक्षा और पारदर्शिता की चर्चा तेज है।

Ujjain Mahakal Temple Income: इन दिनों देश में अयोध्या राम मंदिर के चंदे के पैसों में कथित घोटाले को लेकर काफी चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया, जिसने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। हालांकि, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूरे हिसाब-किताब को पूरी तरह पारदर्शी बताया है।



इस माहौल ने आम जनता के मन में देश के सभी बड़े और वीआईपी मंदिरों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में लोग अक्सर ये जानना चाहते हैं कि आखिर इन प्रसिद्ध मंदिरों में आने वाले दान के करोड़ों रुपए कहां जाते हैं। उनका इस्तेमाल कैसे होता है।



इसी कड़ी में अब मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के मंदिर को लेकर भी तरह-तरह के सवाल सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच खड़े होने लगे हैं।



भक्त जानना चाहते हैं कि बाबा के खजाने में कितना पैसा आता है। उसे किस तरह जनता और मंदिर की भलाई के लिए खर्च किया जाता है। आइए इस आर्टिकल में हम महाकाल मंदिर की रिकॉर्ड कमाई, उसके खर्च और पारदर्शिता के नियमों को समझें।



Ujjain Mahakal: भर गया महाकाल का खजाना… 1 साल में 112 करोड़ रुपए से अधिक की


महाकाल मंदिर की रिकॉर्ड कमाई

उज्जैन के महाकाल मंदिर में आस्था के साथ ही दान का प्रवाह भी तेजी से बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंदिर समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की कुल आय हुई है।



रिपोर्ट के मुताबिक, इस कुल कमाई में से केवल दान के रूप में मंदिर को 78 करोड़ रुपए मिले हैं। यह बीते छह सालों में बाबा महाकाल के दरबार में आया सबसे बड़ा दान है। पिछले साल की तुलना में इस बार करीब 27 करोड़ रुपए अधिक दान आया है।



दान के पैसों का पूरा ब्योरा

मंदिर समिति ने इस बार हुई पूरी इनकम का ब्योरा जनता के सामने रखा है। मंदिर में स्थापित दान पेटियों से कुल 62 करोड़ रुपए की बड़ी राशि मिली है। इसके अलावा मंदिर के नगद काउंटरों पर भक्तों ने पांच करोड़ 50 लाख रुपए जमा कराए।



ऑनलाइन माध्यम और क्यूआर कोड से भी तीन करोड़ 60 लाख रुपए आए हैं। भक्तों ने मनी ऑर्डर के जरिए भी 1.23 लाख रुपए बाबा के दरबार में भेजे हैं। गुप्त दान के रूप में मंदिर को चार करोड़ 65 लाख रुपए मिले हैं।



लड्डू प्रसाद और आभूषणों से इनकम

बाबा महाकाल का लड्डू प्रसाद भी भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय माना जाता है। इस वित्तीय वर्ष में लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की बड़ी आय हुई है। लड्डू प्रसाद की मांग बढ़ने से मंदिर की रसोई में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं।



इसके अलावा भक्तों ने सोने और चांदी के कई कीमती आभूषण भी दान किए हैं। इन आभूषणों का मूल्य करोड़ों रुपए में आंका गया है। ट्रस्ट के मुताबिक, इन्हें मंदिर के लॉकर में पूरी सुरक्षा के साथ सुरक्षित रखा जाता है।



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महाकाल लोक बनने का बड़ा असर

बता दें कि, पीएम मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को श्री महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद से ही उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल आया है। पहले महाकाल मंदिर में हर दिन करीब 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे।



अब ये रोजाना की संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई है। त्योहारों और सावन के महीने में भक्तों का यह आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। भक्तों की बढ़ती संख्या के कारण ही मंदिर की आय में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है।



दान की गिनती में कड़ी पारदर्शिता

राम मंदिर विवाद के बीच महाकाल मंदिर प्रशासन अपनी पारदर्शिता को लेकर पूरी तरह सतर्क है। असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटर आशीष पलवड़िया ने बताया कि यहां कड़े नियमों का पालन होता है। मंदिर परिसर में इस समय कुल 95 दान पेटियां अलग-अलग जगहों पर रखी गई हैं।



इन सभी पेटियों को हर सप्ताह पूरी सुरक्षा के बीच खोला जाता है। पेटियों को खोलने के बाद सारा पैसा एक विशेष गणना कक्ष में ले जाया जाता है। इस दौरान मंदिर समिति के बड़े अधिकारी वहां मौजूद रहते हैं।



महाकाल मंदिर में दान पेटियां ओवरफ्लो, सोना चांदी और हीरों का लगा अंबार


सिली जेब वाले कपड़ों का नियम

ट्रस्ट के मुताबिक, दान के पैसों की गिनती की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में होती है। पूरी गणना की वीडियो और फोटोग्राफी भी कराई जाती है ताकि कोई गड़बड़ी न हो। पैसे गिनने वाले कर्मचारियों के लिए एक बेहद सख्त और अनोखा नियम बनाया गया है।



इन कर्मचारियों को बिना जेब वाले कपड़े पहनकर ही कमरे में आना होता है। अगर कपड़ों में जेब है, तो उसे पहले से सिल दिया जाता है। इस नियम के कारण कोई भी कर्मचारी पैसे छिपाकर बाहर नहीं ले जा सकता है।



Ujjain Mahakal Temple


मंदिर का खर्च भी हुआ दोगुना

महाकाल लोक के बनने से पहले मंदिर का कुल क्षेत्रफल केवल 2.82 हेक्टेयर का था। भव्य विस्तार के बाद अब यह पूरा परिसर बढ़कर 47 हेक्टेयर का हो चुका है। परिसर बड़ा होने के कारण अब मंदिर में कुल 306 कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।



कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से उनके वेतन का खर्च भी काफी बढ़ गया है। इसके अलावा मंदिर की सुरक्षा, साफ-सफाई और रखरखाव में बड़ी राशि खर्च होती है। नए निर्माण कार्यों और पर्वों की व्यवस्था में भी काफी पैसा लगता है।



जनहित के कार्यों में खर्च होते हैं पैसे

मंदिर समिति केवल व्यवस्थाओं पर ही नहीं बल्कि कई सामाजिक कार्यों पर पैसा खर्च करती है। विशाल अन्नक्षेत्र में हजारों भक्तों को रोज मुफ्त भोजन कराया जाता है। इसके साथ ही मंदिर समिति एक बड़ी गोशाला और धर्मशाला का संचालन भी करती है।



महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी बड़ी रकम खर्च होती है। पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए हुआ करता था। परिसर के विस्तार और नई सुविधाओं के कारण अब यह मासिक खर्च बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।



महाशिवरात्रि, सावन मास और नागपंचमी जैसे बड़े त्योहारों पर खर्च और बढ़ जाता है। इन मौकों पर भक्तों की सुविधा के लिए टेंट, पानी और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाते हैं।



FAQ

  1. वित्तीय वर्ष 2025-26 में उज्जैन महाकाल मंदिर की कुल आय कितनी हुई है?
    वित्तीय वर्ष 2025-26 में उज्जैन के महाकाल मंदिर को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है। इसमें से 78 करोड़ रुपए सिर्फ दान से मिले हैं और लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की कमाई हुई है।
  2. महाकाल मंदिर में दान के पैसों की गिनती के लिए क्या अनोखा नियम है?
    महाकाल मंदिर में दान की गिनती सीसीटीवी की निगरानी में होती है। पैसे गिनने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाले या सिली हुई जेब वाले कपड़े पहनने होते हैं, ताकि किसी भी तरह की चोरी या गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
  3. महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर के मासिक खर्च में कितना बदलाव आया है?
    महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर से बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। इसके रखरखाव, सुरक्षा और अन्नक्षेत्र के कारण मंदिर का मासिक खर्च 2.5 करोड़ से बढ़कर अब 5 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

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