नितिन नवीन के रोड शो में उज्जैन महापौर को रथ से उतारा, कांग्रेस बोली- दलितों का अपमान करती है BJP
समझें क्या है पूरा मामला...
- भाजपा अध्यक्ष के रोड शो में उज्जैन महापौर को रथ से उतारा गया।
- महापौर मुकेश टटवाल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
- भाजपा के किसी पदाधिकारी ने इस मामले में कुछ नहीं कहा।
- कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने इसे दलित अपमान बताया है।
- महापौर ने कहा वे मुख्यमंत्री से भी शिकायत करेंगे।
उज्जैन में भाजपा के रोड शो के दौरान एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दीपोत्सव में शामिल होने पहली बार शहर आए भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो में उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल को सबके सामने अपमान झेलना पड़ा। रथ पर चढ़ने के कुछ देर बाद ही पुलिस ने उन्हें नीचे उतार दिया। इस घटना के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है।
क्या हुआ रोड शो में
सदावल हेलीपैड पर रोड शो शुरू होने से पहले सभी चिह्नित नेता रथ पर सवार हुए। इनके साथ महापौर मुकेश टटवाल भी रथ पर चढ़ गए थे। वहीं, कुछ समय बाद ही पुलिस ने उन्हें रथ से नीचे उतार दिया। यह घटनाक्रम सबके सामने हुआ, जिससे महापौर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।
रथ पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, सांसद अनिल फिरोजिया और नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल सवार नजर आए।
महापौर का पक्ष
इस घटना पर महापौर मुकेश टटवाल ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि भाजपा जिला प्रभारी बजरंग पुरोहित और कार्यक्रम प्रभारी जयपालसिंह चावड़ा उन्हें अपने साथ हेलीपैड ले गए थे। उनके मुताबिक सभी नेता एक साथ रथ पर चढ़े थे। बाद में पुलिस ने सिर्फ उन्हें अकेला नीचे उतार दिया।
महापौर ने कहा कि इससे उनके सम्मान को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने बताया कि वे इस मामले से स्थानीय पदाधिकारियों को पहले ही अवगत करा चुके हैं। महापौर ने यह भी कहा कि वे मुख्यमंत्री को भी इस घटना की जानकारी देंगे और शिकायत करेंगे।
कार्यक्रम प्रभारी का बयान
कार्यक्रम प्रभारी जयपालसिंह चावड़ा ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी है। चावड़ा पूर्व में इंदौर प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके मुताबिक रथ में सवार होने वालों की सूची में महापौर का नाम था। उन्होंने माना कि महापौर उनके साथ रथ पर चढ़े भी थे, लेकिन उन्हें बाद में किसने और क्यों उतारा, इसकी जानकारी खुद उन्हें भी नहीं है। चावड़ा ने कहा कि वे इस मामले पर महापौर से जल्द चर्चा करेंगे।
भाजपा नेताओं की चुप्पी
इस पूरे मामले में भाजपा के बड़े नेताओं की चुप्पी भी चर्चा का विषय बन गई है। महापौर ने पार्टी पदाधिकारियों और नेताओं को घटना से अवगत कराया था। वहीं, न तो भाजपा के किसी पदाधिकारी ने इस पर कुछ कहा और न ही प्रभारी मंत्री ने कोई बयान दिया। रोड शो में रथ पर सवार नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने भी इस बारे में जानकारी होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि महापौर रथ पर चढ़े थे, लेकिन उन्हें उतारे जाने की जानकारी उन्हें नहीं है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
अब इस मामले को कांग्रेस ने राजनीतिक रंग देना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने सोशल मीडिया पर इस मामले को शेयर करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा कि भाजपा ने हमेशा दलितों का अपमान किया है।
कांग्रेस नेता के मुताबिक इस घटना से भी भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता झलकती है। कांग्रेस के इस बयान के बाद यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक न रहकर राजनीतिक विवाद बन गया है।
भाजपा की तरफ से अभी तक कांग्रेस के इस आरोप पर कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। स्थानीय भाजपा नेताओं की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल महापौर के रथ से उतारे जाने का मामला उज्जैन में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ महापौर मुख्यमंत्री तक शिकायत ले जाने की बात कह रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस इसे दलित अपमान से जोड़कर सियासी हमला बोल रही है। भाजपा की चुप्पी के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस पर आगे क्या रुख अपनाती है।
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