उज्जैन के अधिकारी ने थाईलैंड में खाया मगरमच्छ का मांस, पत्नी के साथ वीडियो वायरल, आयुक्त बोले- विदेश जाने की अनुमति नहीं ली

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 24, 2026, 13:10 IST
उज्जैन के अधिकारी ने थाईलैंड में खाया मगरमच्छ का मांस, बिना अनुमति विदेश यात्रा पर उठे सवाल
उज्जैन नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह कथित तौर पर मगरमच्छ का मांस खाते नजर आ रहे हैं। वीडियो थाईलैंड का बताया जा रहा है। इसके साथ लिखा है कि उन्होंने पहली बार मगरमच्छ का मांस चखा। अब उनकी विदेश यात्रा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब उनकी विदेश यात्रा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पत्नी के साथ मगरमच्छ का मांस खाते दिखे अधिकारी

राजकुमार राठौर उज्जैन नगर निगम में भवन अधिकारी हैं। उनके पास जोन क्रमांक 1, 2 और 3 की जिम्मेदारी है। वीडियो में राठौर अपनी पत्नी के साथ कुछ खाते दिख रहे हैं।



इसके कैप्शन में अंग्रेजी में लिखा है, 'Trying crocodile for the first time in Thailand'। इसका मतलब है कि थाईलैंड में पहली बार मगरमच्छ का मांस चखा।



वीडियो सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने उनकी विदेश यात्रा पर सवाल उठाए हैं।



कथित तौर पर वीडियो में मगरमच्छ का मांस खाते दिखे अधिकारी

छुट्टी ली, लेकिन विदेश जाने की अनुमति नहीं

नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने बताया कि राजकुमार राठौर 19 से 23 अक्टूबर तक अवकाश पर थे। हालांकि उन्होंने विदेश यात्रा के लिए विभाग से अनुमति नहीं ली थी।



नियमों के मुताबिक सरकारी कर्मचारी को विदेश जाने से पहले सक्षम अधिकारी से मंजूरी लेनी होती है। इसे Foreign Travel Permission कहा जाता है। केवल छुट्टी लेना विदेश जाने की अनुमति नहीं माना जाता।



आयुक्त के मुताबिक नियमों का उल्लंघन मिलने पर राठौर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।



वेतनवृद्धि और पदोन्नति पर लग सकती है रोक

नगर निगम के अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने भी इस मामले में कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि विभागीय नियमों के तहत अधिकारी को अलग-अलग तरह के दंड दिए जा सकते हैं।



इनमें निंदा, वेतनवृद्धि रोकना और पदोन्नति पर रोक लगाना शामिल है। हालांकि अभी किसी कार्रवाई का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।



महापौर बोले- पहले मामले की पुष्टि कराएंगे

उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस मामले की जानकारी नहीं है। पूरी जानकारी मिलने के बाद वीडियो की सच्चाई की पुष्टि कराई जाएगी।



उन्होंने कहा कि मामले में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इस मामला में राजकुमार राठौर का अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है।



मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या हैं नियम?

मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए आचरण और सेवा संबंधी नियम बनाए गए हैं। मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 में कर्मचारियों के सामान्य व्यवहार और जिम्मेदारियों का जिक्र है।



विदेश यात्रा की अनुमति से जुड़े अलग विभागीय निर्देश भी लागू हो सकते हैं। नगर निगम कर्मचारियों पर कौन-से नियम लागू होंगे, यह उनके पद और सेवा शर्तों पर निर्भर करता है।



इस मामले में प्रशासन की आपत्ति मगरमच्छ का मांस खाने पर नहीं, बल्कि बिना अनुमति विदेश यात्रा करने पर है।



अब संबंधित सेवा नियमों के आधार पर Departmental Action का फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल राठौर के खिलाफ किसी निश्चित दंड की जानकारी सामने नहीं आई है।



क्या थाईलैंड में मगरमच्छ का मांस खाना लीगल है?

थाईलैंड में मगरमच्छ का मांस खाना पूरी तरह जायज है। थाईलैंड दुनिया के सबसे बड़े मगरमच्छ पालने वाले देशों में से एक है। वहां एक हजार से ज्यादा फार्म हैं जहां करीब 12 लाख मगरमच्छ पाले जाते हैं। ये फार्म मुख्य रूप से खाल के लिए चलाए जाते हैं, लेकिन मांस भी इनका बड़ा फायदा है।



मगरमच्छ पालना कानूनी है। लाइसेंस वाले फार्मों में ही ये पाले जाते हैं। कई फार्म अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत रजिस्टर्ड भी हैं। मांस खुले बाजारों, रेस्टोरेंट और ऑनलाइन आसानी से मिल जाता है।



2022 में जब सूअर का मांस बहुत महंगा हो गया था। तब स्वास्थ्य विभाग ने खुद कहा था कि मगरमच्छ का मांस सस्ता और पौष्टिक विकल्प है। विभाग का कहना है कि अगर अच्छे से पकाकर खाया जाए तो ये सुरक्षित है। बस कच्चा या अधपका मत खाना, वरना बैक्टीरिया का खतरा रह सकता है।



ये मांस प्रोटीन से भरपूर और कम चिकनाई वाला होता है। स्वाद चिकन जैसा लगता है। पूंछ वाला हिस्सा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। रेस्टोरेंट में इसे शबू-शबू, स्टिर-फ्राई और लार्ब जैसे व्यंजनों में सर्व किया जाता है।



जंगली मगरमच्छ का शिकार करके खाना गलत है, लेकिन फार्म में पाले गए मगरमच्छ का मांस पूरी तरह कानूनी और आम है। संक्षेप में, थाईलैंड में मगरमच्छ का मांस खाना न सिर्फ जायज है, बल्कि वहां एक सामान्य खाने का विकल्प भी बन चुका है।



क्या भारत में मगरमच्छ का मांस खाना लीगल है?

नहीं, भारत में मगरमच्छ का मांस खाना कानूनी नहीं है।भारत में मगरमच्छ (मगर, घड़ियाल और खारे पानी वाला मगरमच्छ) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में आते हैं। ये सबसे ज्यादा सुरक्षा वाली श्रेणी है।



क्या प्रतिबंध है?

  • मगरमच्छ को मारना, शिकार करना, मांस रखना या बेचना गैर-कानूनी है।
  • ऐसा करने पर 3 से 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
  • जंगली मगरमच्छ का मांस तो बिल्कुल मना है। कई मामलों में वन विभाग ने मांस रखने वालों को गिरफ्तार भी किया है।

फार्म वाले मगरमच्छ के बारे में

कुछ खास लाइसेंस वाले फार्म में मगरमच्छ पालने की अनुमति हो सकती है (मुख्य रूप से खाल के लिए), लेकिन आम लोगों के लिए मांस खरीदना-बेचना या खाना आसान और खुला नहीं है। बाजार में या रेस्तरां में मगरमच्छ का मांस कानूनी रूप से नहीं मिलता।



संक्षेप में: थाईलैंड की तरह भारत में मगरमच्छ का मांस आम और कानूनी नहीं है। यहां ये संरक्षित जानवर है, इसलिए इसे खाना या रखना अपराध माना जाता है।



FAQ

  1. उज्जैन के किस अधिकारी का मगरमच्छ का मांस खाते वीडियो सामने आया है?
    उज्जैन नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर का वीडियो सामने आया है। इसमें वह अपनी पत्नी के साथ मगरमच्छ का मांस खाते दिख रहे हैं।
  2. राजकुमार राठौर का वीडियो कहां का बताया जा रहा है?
    वीडियो थाईलैंड का बताया जा रहा है। इसके कैप्शन में पहली बार मगरमच्छ का मांस चखने की बात लिखी है।
  3. राजकुमार राठौर पर कार्रवाई क्यों हो सकती है?
    बिना अनुमति विदेश जाने पर सरकारी कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है, जिसमें निंदा, वेतनवृद्धि रोकने या पदोन्नति रोकने जैसे दंड शामिल हो सकते हैं।
  4. बिना अनुमति विदेश जाने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
    संबंधित सेवा नियमों के तहत निंदा, वेतनवृद्धि रोकने या पदोन्नति रोकने जैसी कार्रवाई संभव है।
  5. उज्जैन के महापौर ने इस मामले में क्या कहा?
    महापौर मुकेश टटवाल ने वीडियो और पूरे मामले की पुष्टि कराने की बात कही है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर विधिसम्मत कार्रवाई होगी।
Tags:
  • उज्जैन नगर निगम
  • मगरमच्छ का मांस
  • विदेश यात्रा विवाद
  • सरकारी कर्मचारी आचरण नियम
  • मुकेश टटवाल
  • Ujjain Municipal Corporation
  • Foreign Travel Permission
  • Government Employee Rules
  • भवन अधिकारी राजकुमार राठौर
  • नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा