युवा धर्म संसद-2026: उज्जैन में 24 राज्यों से आएंगे युवा, धर्म पर करेंगे मंथन
समझें क्या है पूरा मामला...
- उज्जैन में सितंबरमें युवा धर्म संसद-2026 का आयोजन होगा।
- यह इसका छठा संस्करण है। 24 राज्यों के1700 से ज्यादा युवा गीता भवन मेंजुटेंगे।
- तीन दिनतक धर्म, संस्कृति और आधुनिक चुनौतियोंपर मंथन चलेगा।
- इससे पहले यह आयोजन काशी,अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम्में हो चुका है।
उज्जैन शहरसितंबर में देश की बड़ी वैचारिक चेतना काकेंद्र बनेगा। यहां 24 राज्यों से 1700से ज्यादा युवा एक साथ जुटेंगे।ये युवा धर्म, राष्ट्र, संस्कृति, शिक्षाऔर विज्ञान जैसे विषयों पर बात करेंगे।
साथ ही आज की जिंदगीकी चुनौतियों पर भी मंथन होगा। यह मौकाहोगा युवा धर्म संसद-2026 के छठे संस्करणका।
बता दें कि सेवाज्ञसंस्थानम् इस राष्ट्रीय आयोजन को कराएगा।यह कार्यक्रम 17 से 19सितंबर तक गीता भवन में होगा। इसमेंविद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षाविद्,संत और सामाजिक चिंतक शामिल होंगे। सभीमिलकर देश के भविष्य पर चर्चा करेंगे।
आचार्यमिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज इस आयोजन केसंरक्षक हैं। उनके मार्गदर्शन मेंसेवाज्ञ संस्थानम् इसेआयोजित कर रहा है। शुरुआत 17 सितंबर कोएक प्रदर्शनी से होगी। इसी दिन युवापंचायत भी होगी।
प्रदर्शनी में भारतीय ज्ञान परंपरा
प्रदर्शनी में भारतीयज्ञान परंपरा को दिखाया जाएगा। इसमेंसंस्कृति,दर्शन, शिक्षा और राष्ट्रीय जीवन के पहलूशामिल होंगे। युवा पंचायत में देशभर केयुवाअपने सवाल रख सकेंगे। वे अपने अनुभव औरविचार भी साझा करेंगे। 18 और 19 सितंबरको मुख्यव्याख्यान होंगे। इन सत्रों में विशेषज्ञसीधे युवाओं से बात करेंगे।
इतने बड़ेस्तर पर युवाओं का जुटान अपने आप में खासहै। अलग-अलगराज्यों से आए युवा अपनी संस्कृति और सोचभी साथ लाएंगे। इससे विचारों का दायरा औरबड़ा होगा।आयोजन सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि यह एक जीवंत मंच बनेगा।
भाषण नहीं, सवाल होंगे अहम
इस आयोजनकी खास बात इसका संवाद वाला अंदाज है।युवाओं को सिर्फवक्ताओं की बात सुनने तक सीमित नहीं रखाजाएगा। वे धर्म, आधुनिकता, विज्ञान औरशिक्षा से जुड़े सवालपूछ सकेंगे।
ये सवाल सीधे विद्वानों औरसंतों के सामने रखे जाएंगे। इस तरह यहमंचयुवा पीढ़ी और भारतीय विचारकों के बीचसीधा संवाद बनाएगा।
काशी से उज्जैन तक की यात्रा
युवा धर्म संसदकी यह परंपरा नई नहीं है। यह देश के बड़ेधार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों से होकरगुजरी है। इससे पहले काशी, अयोध्या,मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम् में यहआयोजन हो चुका है। अबछठे संस्करण के लिए उज्जैन को चुना गयाहै।
उज्जैन को चुनने की वजह साफ है। यहशहर सिर्फ आस्थाका केंद्र नहीं है। यह भारत की पुरानीज्ञान परंपरा की अहम भूमि भी रहा है।ज्योतिष, गणित, साहित्य, दर्शन औरसंस्कृत से इसका गहरा नाता रहाहै।
उज्जैन विक्रमादित्य की नगरी रहीहै। यहसिंहस्थ (उज्जैन सिंहस्थ 2028) की भूमि भी है। इस वजह से इसकीसांस्कृतिक पहचान बहुत व्यापक है। यहां24 राज्यों के युवाजुटेंगे। सनातन सोच और आधुनिक सवालों केबीच संवाद होगा। यही इस आयोजन कोखास बनाता है।
मध्यप्रदेश के लिए खास मौका
यह आयोजन मध्यप्रदेश के लिएगर्व की बात है। यह मंच उज्जैन को देशभरके युवाओं से जोड़ेगा। इससेराज्य की सांस्कृतिक पहचान और मजबूतहोगी। महाकाल की नगरी (महाकाल नगरी उज्जैन) अब वैचारिक तीर्थके रूप में भी उभरेगी। इससेस्थानीय पर्यटन और सामाजिक गतिविधियों कोभी बढ़ावा मिल सकता है।
इस तीन दिन केआयोजन से उज्जैन एक बार फिरराष्ट्रीय मंच पर आएगा। शहर के लोग इसबड़े आयोजन का हिस्सा बन सकेंगे। छात्रोंऔर शिक्षकों के लिए भी यह एकबड़ा मौका होगा।
युवाओं से जुड़ाव क्यों जरूरी
आज के दौर में युवाओं केसामने सवालबहुत हैं। लेकिन जवाब देने वाले मंच कमहैं। ज्यादातर बड़े आयोजनों में युवासिर्फश्रोता बनकर रह जाते हैं। युवा धर्म संसदइस कमी को दूर करने की कोशिश करता है।यहां युवाओं को बोलने और सवाल पूछनेका पूरा मौका मिलेगा।
विद्वानों औरसंतों के साथ सीधा संवाद युवाओं की सोचको साफ करेगा। इससे उनके मन मेंउठने वाले भ्रम और शंकाएं भी दूर हो सकतीहैं।
साथ ही यह आयोजन नई पीढ़ी को जड़ोंसेभी जोड़ेगा। परंपरा और आधुनिकता के बीचसंतुलन बनाना आज सबसे बड़ी जरूरत है।
तीनदिनतक चलने वाला यह आयोजन उज्जैन के लिए भीयादगार रहेगा। शहर की गलियों में देशभरसे आएयुवाओं की रौनक दिखेगी। गीता भवन परिसरइन दिनों विचार-विमर्श का केंद्र बनारहेगा। आयोजन खत्म होने के बाद भी इसकाअसर लंबे समय तक रहेगा।
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