नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बोले- सरकार ने भागीरथपुरा रिपोर्ट मैनिपुलेट की, रिटायर्ड जस्टिस पर दबाव डाल महापौर और पार्षद को बचाया

Sanjay Gupta | Oct 02, 2026, 12:50 IST
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा कांड को लेकर अपनी बात रखी।
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर में मीडिया से चर्चा की। इसमें टेंडर फाइल में साइन होने में 66 दिन की देरी पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव को घेरा, लेकिन पूरी रिपोर्ट को कठघरे में खड़ा कर दिया। इसले अलावा सिंघार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।

इस दौरान को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर स्वच्छता के लिए देशभर में पहचाना जाता है। दूसरी ओर यह घटना शहर में नागरिकों के जीवन, सुरक्षित पेयजल, प्रशासनिक जवाबदेही और नगर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सिंघार के साथ पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे व अन्य नेता भी उपस्थित थे।



रिटायर्ड जस्टिस पर था सरकार का दबाव

सिंघार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रिपोर्ट को मैनिपुलेट (हेराफेरी) किया गया है। रिटायर्ड जस्टिस सुशील गुप्ता पर सरकार ने दबाव बनाया कि सिर्फ दो अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दो। महापौर, पार्षद,और हमारे मंत्री को बचाओ। उमंग सिंघार ने कहा कि सीएम से कहना चाहूंगा कि इस तरह न्यायिक व्यवस्था में दखलअंदाजी होगी तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी।



भागीरथपुरा कांड

पोटेशियम क्लोराइड पार्षद ने मिलवाया

उमंग सिंघार ने यह भी कहा कि हर टंकी पर रामकी कंपनी के तीन और निगम के तीन कर्चमारी होते हैं। यह बात भी आई है कि पानी साफ रखने के लिए पोटेशियम क्लोराइड मिलाया जाता है। पार्षद द्वारा कर्मचारियों पर यह अधिक डालने का दबाव डाला गया लेकिन इस पर कोई जांच नहीं हुई। यह जांच का विषय है। इसमें रामकी व निगम के कर्मचारियों से पूछना चाहिए था।



महापौर की साइन में 66 दिन देरी क्यों

कमेटी की रिपोर्ट में है कि साल 2022 में जब भागीरथपुरा (Bhagirath pura kand) के लिए पहला टेंडर हुआ इसमें देरी हुई। अलग-अलग स्तर पर देरी हुई। इसमें एमआईसी में प्रस्ताव 25 नवंबर को पास होने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव की साइन 30 जनवरी को हुई। इसमें 66 दिन लगे।



सिंघार ने कहा कि कमेटी कि रिपोर्ट में है कि महापौर स्तर पर देरी हुई। इसके बाद भी आयोग ने उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की। वहीं यह गंभीर सवाल जरूर उठता है कि फाइल 66 दिनों तक किस स्तर पर और किसके पास लंबित रही। साथ ही इस देरी के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी थी।



उमंग सिंघार ने आगे कहा कि सरकार और नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना की फाइल इतने लंबे समय तक लंबित क्यों रही। उल्लेखनीय है कि कमेटी ने साइन में देरी की बात कही लेकिन इसके लिए महापौर को जिम्मेदार नहीं माना है। कहा कि यह फाइल पुटअप करना प्रशासनिक काम है।



मुआवजा जल्द दिया जाए

इसके बाद सिंघार ने कहा कि अभी तक शासन ने 36 मौतों पर मुआवजा नहीं दिया है। कमेटी ने भी 22 मौतों को दूषित जल से माना है। साथ ही 10 लाख रुपए मुआवजा, पांच लाख रुपए अन्य व साथ ही उपचार के लिए अतिरिक्त मुआवजा राशि तय की है। यह सरकार को जल्द देना चाहिए।



सिंघार बोले- हमने सरकार को चेतया था

सिंघार ने कहा कि हमने सरकार को लगातार गंदे पानी को लेकर चेताया था। दूषित पेयजल, बीमारी और मौतों को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे। इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अपनी पहचान रखता है।



उमंग सिंघार ने आगे कहा कि भागीरथपुरा कांड ने नागरिकों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जीवन के अधिकार में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की मूलभूत आवश्यकता भी शामिल है। इंदौर जैसे बड़े शहरी एवं आर्थिक केंद्र में, पर्याप्त प्रशासनिक संसाधनों के बावजूद ऐसी घटना होना गंभीर चिंता का विषय है।




जल दूषित होने से ही हुई मौत

सिंघार ने कहा कि न्यायिक जांच रिपोर्ट के अनुसार भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जा रहा पेयजल दूषित और मानव उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। जांच में सीवेज के पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया। आयोग ने 36 मौतों का परीक्षण किया। इनमें से 22 मौतों को दूषित पानी से संबंधित माना गया।



नक्शे तक नहीं है निगम और आईडीए के पास

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट में आया कि भागीरथपुरा के नक्शे, ब्लूप्रिंट और इंजीनियरिंग रिकॉर्ड तक नहीं है। ड्रेनेज एवं सीवरेज कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड में भी कमी सामने आई। सरकार को जवाबह देना चाहिए कि महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं थे। रिकॉर्ड के संरक्षण एवं उपलब्धता में हुई लापरवाही की जवाबदेही किसकी तय होगी।



काम में देरी क्यों होती रही

उमंग सिंघार ने सीवरेज के काम में देरी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग ने भागीरथपुरा में सीवेज और गंदे पानी की पाइपलाइन बिछाने में हुई देरी की जांच की है। रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया, फाइलों को आगे बढ़ाने और काम पूरा करने में प्रशासनिक देरी की बात सामने आई है। आयोग ने अलग-अलग स्तर पर हुई देरी और लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय करने की कोशिश की।



चिंटू चौकसे बोले- कई जिम्मेदारों को रिपोर्ट में बख्शा

वहीं शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि जो लोग सौ फीसदी जिम्मेदार थे, उन्हें रिपोर्ट में बचा लिया गया है। इनमें महापौर, तत्कालीन निगमायुक्त, अपर आयुक्त, मंत्री और विधायक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हम हाई कोर्ट में याचिका लगाएंगे। इसमें सबसे बड़े दोषी को क्यों छोड़ा गया, यह सवाल उठाएंगे। साथ ही गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग करेंगे।



चौकसे ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर हमारी भी जिम्मेदारी है। हम लगातार गंदे पानी का मुद्दा उठाते रहे हैं।



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