30 साल के यूपीएससी टॉपर्स का करियर: कोई एंबेसडर बना तो किसी को नहीं मिला बड़ा पद
समझें क्या है पूरा मामला...
- 1995 से 2024 तक के यूपीएससी टॉपर्स का करियर खंगाला गया है।
- 30 सालों में केवल दो टॉपर्स ने सरकारी सेवा बीच में छोड़ी है।
- एक टॉपर राजदूत बने, एक ने विदेश में नौकरी की, तो कोई कलेक्टर नहीं बना।
- दिव्यांग श्रेणी की पहली टॉपर ईरा अभी डिप्टी सेक्रेटरी पद पर हैं।
- पहली दलित महिला टॉपर टीना कलेक्टर बनीं और विवाहित महिला टॉपर रूपा जॉइंट सेक्रेटरी है।
यूपीएससी टॉपर का असली करियर कैसा होता है?
हर साल जब यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का रिजल्ट आता है, तो देश में रैंक-1 पाने वाले का चेहरा हर तरफ छा जाता है। लाखों युवाओं के लिए वह प्रेरणा बन जाता है। उसके इंटरव्यू वायरल होते हैं। नोट्स और रणनीति की चर्चाएं होती हैं। उसे भविष्य का सबसे सफल अफसर माना जाता है।
वहीं, क्या परीक्षा में पहला स्थान पाना करियर में भी सबसे आगे रहने की गारंटी है? एक दिग्गज मीडिया संस्थान ने साल 1995 से 2024 तक के 30 वर्षों के यूपीएससी टॉपर्स का करियर ट्रैक किया है। वहीं इनके नतीजे चौंकाने वाले हैं।
टॉपर करने से करियर की शानदार शुरुआत तो होती है, लेकिन आगे की राह हर किसी के लिए अलग होती है। पोस्टिंग, सर्विस और नेतृत्व क्षमता ही तय करती है कि कौन कहां पहुंचेगा।
कौन-कौन बने रैंक-1 और कहां हैं?
1995 के टॉपर इकबाल धालीवाल तमिलनाडु कैडर के आईएएस हैं। उन्होंने सरकारी सेवा में केवल छह साल काम किया और फिर इस्तीफा देकर अमेरिका चले गए। अभी वह एमआईटी (Massachusetts Institute of Technology) की अब्दुल लतीफ जमील पावर्टी एक्शन लैब के ग्लोबल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं।
1996 के टॉपर सुनील बर्नवाल झारखंड कैडर से हैं और अभी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी में हैं।
1997 के देवेश कुमार हिमाचल प्रदेश में सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचे।
1998 के भावना गर्ग यूपी कैडर में प्रिंसिपल सेक्रेटरी, जेल विभाग में हैं।
1999 के टॉपर सौरभ बाबू यूपी में प्रिंसिपल सेक्रेटरी, ग्रामीण विकास विभाग में काम कर रहे हैं।
2000 में महाराष्ट्र से आईं विजयलक्ष्मी बिदारी अभी डिजिशनल कमिश्नर, नागपुर में तैनात हैं।
जब IFS चुना, जब IAS छोड़ा
2001 के टॉपर आलोक रंजन झा ने आईएफएस (Indian Foreign Service) चुना और अभी जाम्बिया में भारत के राजदूत हैं। यह उन चंद टॉपर्स में से एक हैं जो विदेश सेवा में गए हैं।
2002 के अंकुर गर्ग AGMUT (Arunachal Pradesh, Goa, Mizoram and Union Territories) कैडर में सलाहकार और प्रशासक के पद पर दादर नगर हवेली, दमन दीव में हैं।
2003 की रूपा मिश्रा ओडिशा में जॉइंट सेक्रेटरी, आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय तक पहुंचीं। खास बात यह है कि वह पहली विवाहित महिला टॉपर थीं।
2004 के एस. नारायणन तमिलनाडु में कमर्शियल टैक्स कमिश्नर हैं।
टॉपर जो राजनीति में चले गए
2009 के टॉपर शाह फैजल थे। उन्होंने 10 साल की सरकारी नौकरी के बाद इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने कश्मीर में राजनीतिक पार्टी बनाई थी। यह उन दो टॉपर्स में से एक हैं जिन्होंने सेवा बीच में छोड़ी थी। वहीं, बाद में वे फिर से सेवा में लौट आए। अब फैजल AGMUT कैडर में डिप्टी सेक्रेटरी, संस्कृति मंत्रालय में हैं।
2005 की मोना प्रुथी दिल्ली में हरियाणा कैडर की रेजिडेंट कमिश्नर हैं।
दलित और दिव्यांग टॉपर्स की कहानी
2015 की टॉपर आईएएस टीना डाबी राजस्थान में जिला कलेक्टर, टोंक बनीं। वह पहली दलित महिला टॉपर थीं। राजस्थान के टोंक जिले में वह दो कलेक्टर गौरव अग्रवाल और टीना डाबी अलग अलग बैच की रैंक-1 रही हैं।
2014 की ईरा सिंघल AGMUT कैडर में हैं। वह दिव्यांग श्रेणी की पहली टॉपर थीं। अभी वह स्कूली शिक्षा विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर हैं।
दस साल में कहां पहुंचे टॉपर्स?
2010 के एस. दिव्यदर्शिनी तमिलनाडु में आर्थिक मामले विभाग, वित्त मंत्रालय में डायरेक्टर हैं।
2011 के स्नेहा अग्रवाल पंजाब में जॉइंट डेवलपमेंट कमिश्नर, ग्रामीण विकास विभाग में हैं।
2012 के हरिता वी कुमार केरल में महिला एवं बाल विकास विभाग में मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर हैं।
2013 के गौरव अग्रवाल राजस्थान में जिला कलेक्टर, उदयपुर बन चुके हैं।
2006 के मुत्याला राजू रेवू आंध्र में कमिश्नर, राज्य ग्रामीण विकास संस्था में हैं।
2007 के ए. कार्तिक पंजाब में रीजनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (WHO), दिल्ली में तैनात हैं।
2008 की शुभ्रा सक्सेना यूपी में चुनाव आयोग की डायरेक्टर हैं।
नई पीढ़ी के टॉपर कहां हैं?
2016 की नंदिनी के आर कर्नाटक में सीईओ (Chief Executive Officer), मंड्या जिला पंचायत हैं। 2017 के अनुदीप दुरिशेट्टी तेलंगाना में जिला कलेक्टर, खम्मम हैं। 2018 के कनिष्क कटारिया राजस्थान में कमिश्नर, भरतपुर विकास प्राधिकरण में हैं।
2019 के प्रदीप सिंह मलिक हरियाणा में कमिश्नर, मानेसर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में हैं। 2020 के शुभम कुमार बिहार में सीईओ, नालंदा जिला परिषद हैं। 2021 की श्रुति शर्मा यूपी में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), हापुड़ में तैनात हैं।
2022 की इशिता किशोर यूपी में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, बरेली हैं।
2023 की आदित्य श्रीवास्तव अभी अंडर ट्रेनिंग में हैं।
2024 की शकीर दुबे यूपी में असिस्टेंट कलेक्टर ट्रेनी के तौर पर मुरादाबाद में हैं। 2025 के अनुज अग्निहोत्री अभी कैडर और पद आवंटन की प्रक्रिया में हैं।
झा सिंघल: दस साल में 10 बड़े पदों पर
2014 की टॉपर झा सिंघल का करियर सबसे विविध रहा है। शुरुआती 10 वर्षों में वह अब सचिव, प्रिंसिपल सेक्रेटरी और कमिश्नर जैसे वरिष्ठ पदों तक पहुंच चुकी हैं।
2007 के कार्तिक के बारे में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि करियर की शुरुआत में ही वह डेप्युटेशन पर चले गए थे।
क्या टॉपर्स हमेशा बड़े पद पाते हैं?
इस जांच से एक बात स्पष्ट होती है कि टॉपर होना करियर की अच्छी शुरुआत देता है। वहीं, अंतिम गंतव्य हर अफसर का अलग होता है।
कोई राजदूत बना तो कोई जिला कलेक्टर। किसी ने इस्तीफा दे दिया तो किसी ने राजनीति की राह चुनी। कुछ के नाम मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव जैसे पद जुड़े तो कुछ अभी भी ट्रेनिंग में हैं।
जो लोग मानते हैं कि रैंक-1 मतलब IAS और IAS मतलब कलेक्टर, यह जांच उस धारणा को तोड़ती है। सेवा चयन, कैडर आवंटन और व्यक्तिगत फैसले मिलकर करियर बनाते हैं।
यूपीएससी का मतलब सिर्फ आईएएस नहीं
एक और बड़ी बात जो इस रिपोर्ट से सामने आती है कि यूपीएससी का मतलब सिर्फ आईएएस और सिर्फ कलेक्टर नहीं होता। आलोक रंजन झा जैसे टॉपर ने आईएफएस चुना और राजदूत बने।
कुल मिलाकर यह जांच बताती है कि परीक्षा में पहला नंबर आना सिर्फ एक दरवाजा खोलता है। अंदर क्या बनेगा, वह बाद के फैसलों पर निर्भर करता है।
ये खबरें भी पढ़िए...
यूपीएससी टॉपर्स का रिपोर्ट कार्ड, क्या रैंक-1 होना शानदार करियर की गारंटी ?
UPSC टॉपर बनने का फॉर्मूला! UPSC टॉपर्स के ऑप्शनल सब्जेक्ट, जिसने बदल दी किस्मत
UPSC टॉपर्स के टिप्सः मेंस में शार्ट नोट्स बनाएं, हर इश्यू को एक पेज में लिखने की प्रैक्टिस करें