पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, एमपी हाईकोर्ट का आदेश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह वारंट एक अवमानना याचिका के मामले में जारी हुआ है। कोर्ट ने उन्हें 30 सितंबर को पेश होने का आदेश दिया है। वारंट तामील कराने की जिम्मेदारी पन्ना एसपी को सौंपी गई है। यह पूरा मामला एक रिटायर्ड कर्मचारी की याचिका से जुड़ा है।
अवमानना का पूरा मामला
यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट में पहुंचा था। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने इस पर सुनवाई की। कोर्ट ने पाया कि नोटिस के बावजूद पन्ना कलेक्टर ने परिपालन रिपोर्ट पेश नहीं की। उनकी तरफ से कोई वकील भी पेश नहीं हुआ।
इसी लापरवाही को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। एकलपीठ ने गैर जमानती वारंट जारी करने का फैसला सुनाया। अगली सुनवाई की तारीख 30 सितंबर तय की गई है। कलेक्टर को इस दिन खुद कोर्ट में पेश होना होगा।
अवमानना का मतलब क्या
जब कोई अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करता, तब अवमानना का मामला बनता है। ऐसे मामलों में कोर्ट सख्त कार्रवाई कर सकता है। गैर जमानती वारंट जारी होना एक गंभीर कदम माना जाता है। इससे संबंधित अधिकारी को तय समय पर कोर्ट में पेश होना अनिवार्य हो जाता है।
किसने दायर की थी याचिका
यह अवमानना याचिका रिटायर्ड कर्मचारी जाविन आरा रिजवी ने दायर की थी। वह पहले पन्ना कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन ऑफिसर के तौर पर कार्यरत थीं। वे नियमितीकरण की मांग को लेकर हाईकोर्ट गईं थी।
13 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका का निराकरण किया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि 90 दिनों के भीतर उनके अभ्यावेदन पर फैसला लिया जाए, लेकिन यह आदेश पूरा नहीं हुआ। इसी वजह से अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।
वारंट तामील की जिम्मेदारी किसकी
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि यह वारंट पन्ना पुलिस अधीक्षक (SP – Superintendent of Police) को तामील करवाना होगा। पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि कलेक्टर तय तारीख पर कोर्ट में पेश हों। यह आदेश प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा सकता है। पन्ना जिले में इस खबर की खूब चर्चा हो रही है।
आगे क्या हो सकता है
अब सबकी नजर 30 सितंबर की सुनवाई पर टिकी है। देखना होगा कि आईएएस उषा परमार कोर्ट में पेश होती हैं या नहीं। अगर वह पेश नहीं होतीं, तो कोर्ट और सख्त रुख अपना सकता है। इस मामले का असर प्रदेश के प्रशासनिक अमले पर भी पड़ सकता है।
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