भागीरथपुरा कांड के 9 महीने बाद भोपाल के वादों का क्या हुआ? सुधरी जमीनी हकीकत?
Atul Dwivedi | Sept 22, 2026, 17:41 IST
Photograph: (thesootr)
BHOPAL. भागीरथपुरा कांड के 9 महीने बाद भी पेयजल व्यवस्था पर सवाल हैं। इस कांड के बाद भोपाल नगर निगम ने दावा किया कि व्यवस्था को सुधारा जाएगा। 'द सूत्र' की पड़ताल में कई जगह जमीनी हालात अब भी चिंताजनक मिले।
इंदौर का भागीरथपुरा कांड शायद ही कोई भूला हो। देश के सबसे स्वच्छ शहर में गंदा पानी पीने की वजह से 36 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, हाई कोर्ट की कमेटी ने 24 लोगों की मौत मानी। पर इस कांड के बाद क्या बदला? क्या वाकई जनता को अब पीने के लिए साफ पानी मिल रहा है? जहां से पानी की सप्लाई होती है, क्या वो पाइपलाइन साफ है?
भोपाल नगर निगम ने इस कांड के बाद दावा किया कि नई पाइपलाइन बिछाई जाएंगी। व्यवस्था को सुधारा जाएगा। इस कांड को लगभग 9 महीने बीत चुके हैं, पर क्या कुछ बदला है?
दिसंबर 2025 के मध्य में इंदौर के भागीरथपुरा में लोगों ने नलों से गंदा पानी आने की शिकायत की। 27 दिसंबर 2025 आते आते कई लोग गंदे पानी की चपेट में आए और अस्पताल में भर्ती होने लगे। लोगों को उल्टी, दस्त, डायरिया की शिकायत थी। 36 लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट ने जांच कमेटी बनाई, और सरकार को जमकर फटकारा।
भोपाल में भी पेयजल को लेकर सवाल उठे। ई कोलाई बैक्टीरिया के पानी में मिलने की शिकायत भी सामने आई। लेकिन निगम ने कहा कि दूषित पानी के स्त्रोत बंद किए जा चुके हैं।
निगम का दावा था कि शहर के सभी 21 जोनों में संवेदनशील और पुरानी पाइपलाइनों की पहचान हो गई है। 24.73 करोड़ रुपये की लागत से 66 किलोमीटर से अधिक लंबी, नई पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू करने का भी दावा निगम ने किया।
इंदौर में भागीरथपुरा कांड के लगभग 9 महीने बाद 'द सूत्र' ने भोपाल में जमीनी हकीकत की पड़ताल की। हमने पता लगाया कि क्या वाकई कुछ बदला है या नहीं। हमने छोला रोड पर मौजूद कॉलोनियों की पड़ताल की।
![ground report bhopal]()
हमें वहां आज भी पाइपलाइन के पास गंदगी का अंबार लगा मिला। तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि आज भी हकीकत दावों से दूर है। पेयजल की लाइन के पास ही नाली है, जिसमें सीवेज का पानी बह रहा है।
![ground report bhopal (2)]()
कहीं-कहीं तो नाली से लगी सीसी रोड है। उसके नीचे पानी की पाइपलाइन डाली गई है। उसी से कनेक्शन देकर लोगों के घरों में पानी जा रहा है। एक तस्वीर और सामने आई, जिसमें गंदगी के बीच पीने के पानी की पाइपलाइन डाली गई है। नाली की गंदगी एक तरफ और सीसी रोड में जो गंदगी है वो भी पाइपलाइन के पास पड़ी है।
![ground report bhopal (3)]()
ऐसा नहीं है कि ये तस्वीर सिर्फ एक कॉलोनी की है। भानपुर रोड पर मौजूद कॉलोनियों की भी हमने पड़ताल की। वहां भी हालात ऐसे ही दिखाई दिए।
अगर निगम पानी की पाइपलाइन को गंदगी से दूर कर हा है, तो फिर भानपुर इलाके में नाली के पास ही मेन लाइन क्यों बिछी है? इस पाइपलाइन के पास ही गंदगी का ढेर आपको देखने को मिल जाएगा।
'द सूत्र' की पड़ताल में पता चला कि गंदगी और नाली के बीच, ज्यादातर पीने के पानी की पाइपलाइन पुराने भोपाल क्षेत्र में ज्यादा हैं। यहां बसे कई घर सालों पुराने हैं। निगम को जहां जगह मिली वहीं पाइपलाइन डाल दी गई। फिर चाहे पास में नाली ही क्यों न हो।
अब प्रदेश में पानी और सीवर लाइनों की जांच रोबोटिक तकनीक से की जाएगी। जीआईएस मैपिंग में प्रदेश में 2.5 लाख से ज्यादा ऐसे पॉइंट सामने आए हैं, जहां पेयजल और सीवर लाइनें क्रॉस कर रही हैं।
इनमें इंदौर में 30 हजार से ज्यादा और भोपाल में 20 हजार से ज्यादा पॉइंट हैं। इस जांच पर करीब ₹1.5 करोड़ खर्च होंगे। रोबोट लीकेज, टूट-फूट और अवैध कनेक्शन की पहचान करेंगे।
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भोपाल नगर निगम ने इस कांड के बाद दावा किया कि नई पाइपलाइन बिछाई जाएंगी। व्यवस्था को सुधारा जाएगा। इस कांड को लगभग 9 महीने बीत चुके हैं, पर क्या कुछ बदला है?
भागीरथपुरा में क्या हुआ था?
भोपाल नगर निगम के दावे
निगम का दावा था कि शहर के सभी 21 जोनों में संवेदनशील और पुरानी पाइपलाइनों की पहचान हो गई है। 24.73 करोड़ रुपये की लागत से 66 किलोमीटर से अधिक लंबी, नई पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू करने का भी दावा निगम ने किया।
जमीनी हकीकत क्या?
ground report bhopal
हमें वहां आज भी पाइपलाइन के पास गंदगी का अंबार लगा मिला। तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि आज भी हकीकत दावों से दूर है। पेयजल की लाइन के पास ही नाली है, जिसमें सीवेज का पानी बह रहा है।
ground report bhopal (2)
कहीं-कहीं तो नाली से लगी सीसी रोड है। उसके नीचे पानी की पाइपलाइन डाली गई है। उसी से कनेक्शन देकर लोगों के घरों में पानी जा रहा है। एक तस्वीर और सामने आई, जिसमें गंदगी के बीच पीने के पानी की पाइपलाइन डाली गई है। नाली की गंदगी एक तरफ और सीसी रोड में जो गंदगी है वो भी पाइपलाइन के पास पड़ी है।
ground report bhopal (3)
दूसरी जगह का भी ऐसा हाल
अगर निगम पानी की पाइपलाइन को गंदगी से दूर कर हा है, तो फिर भानपुर इलाके में नाली के पास ही मेन लाइन क्यों बिछी है? इस पाइपलाइन के पास ही गंदगी का ढेर आपको देखने को मिल जाएगा।
'द सूत्र' की पड़ताल में पता चला कि गंदगी और नाली के बीच, ज्यादातर पीने के पानी की पाइपलाइन पुराने भोपाल क्षेत्र में ज्यादा हैं। यहां बसे कई घर सालों पुराने हैं। निगम को जहां जगह मिली वहीं पाइपलाइन डाल दी गई। फिर चाहे पास में नाली ही क्यों न हो।
अब नया दावा क्या?
इनमें इंदौर में 30 हजार से ज्यादा और भोपाल में 20 हजार से ज्यादा पॉइंट हैं। इस जांच पर करीब ₹1.5 करोड़ खर्च होंगे। रोबोट लीकेज, टूट-फूट और अवैध कनेक्शन की पहचान करेंगे।
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