वीडी शर्मा मानहानि केस: पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पक्ष को कोर्ट की फटकार, लगाई एक हजार की कॉस्ट
ऐसे समझें पूरा मामला
- 20 अगस्त को गवाह विजय अठवाल कोर्ट पहुंचे।
- गवाह का प्रतिपरीक्षण नहीं हो सका।
- पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के वकील दूसरे केस में व्यस्त थे।
- कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 सितंबर तय की।
- अगली तारीख पर जिरह जरूरी होने की बात कही गई।
भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में गुरुवार को भाजपा नेता विष्णु दत्त शर्मा से जुड़े मानहानि केस की सुनवाई हुई। खास बात यह रही कि परिवादी पक्ष के गवाह विजय अठवाल कोर्ट पहुंचे, लेकिन उनका प्रतिपरीक्षण यानी जिरह आज भी नहीं हो सकी।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अधिवक्ता के दूसरे मामले में व्यस्त होने के कारण सुनवाई आगे बढ़ानी पड़ी। अब अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
इधर लगातार आगे बढ़ रही सुनवाई को लेकर कोर्ट सख्त नजर आई। गवाह के बार-बार आने और परेशान होने पर कोर्ट ने पूर्व सीएम पक्ष पर एक हजार रुपए की कॉस्ट लगाई। कोर्ट ने अगली तारीख को आवश्यक रूप से जिरह करने ताकीद की है।
₹1000 पर दोनों पक्षों की अलग व्याख्या
सुनवाई के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ₹1000 की राशि को लेकर रही। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के वकील अजय गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इसे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर लगाया गया जुर्माना नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक गवाह की उपस्थिति के बावजूद जिरह नहीं हो सकी, क्योंकि वह दूसरे मामले में व्यस्त थे।
गुप्ता ने बताया कि मामले में गवाहों की प्रक्रिया पहले भी चली है। जुलाई 2025 में गवाह का मुख्य परीक्षण हुआ था। उसके बाद क्रास एग्जामिनेशन के लिए कई तारीखें लगीं, लेकिन गवाह लगातार उपस्थित नहीं हो सका। उनके अनुसार आज गवाह अचानक उपस्थित हुआ, जबकि वे दूसरे मामले में व्यस्त थे, इसलिए जिरह नहीं हो पाई।
विजय अठवाल बोले- मैं लगातार कोर्ट आ रहा हूं
गवाह विजय अठवाल का पक्ष इससे अलग है। अठवाल के मुताबिक वह लगातार अदालत में पेश हो रहे हैं और यह उनकी पांचवीं पेशी थी। उनका कहना है कि वह करीब एक साल पहले अपनी गवाही दे चुके हैं, लेकिन अब तक उनके बयान पर प्रतिपरीक्षण नहीं हुआ।
अठवाल ने कहा कि वह हर महीने कोर्ट की तारीख पर पहुंचते रहे हैं। उनके अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ओर से जिरह के लिए प्रतिनिधि नहीं आने की वजह से मामला आगे बढ़ता रहा। इसी वजह से अदालत ने कॉस्ट के रूप में ₹1000 की राशि देने का निर्देश दिया गया।
वीडी शर्मा के वकील सचिन वर्मा का तर्क
वीडी शर्मा की ओर से अधिवक्ता सचिन वर्मा ने मामले की कानूनी स्थिति पर अलग तस्वीर रखी। उनके मुताबिक विजय अठवाल इस प्रकरण में परिवादी पक्ष के गवाह हैं। आपराधिक मानहानि मामले में रजिस्ट्रेशन के बाद गवाही की प्रक्रिया अलग चरण में आगे बढ़ी।
वर्मा के अनुसार गवाह पहले भी अपना बयान दर्ज करा चुके हैं और कई बार अदालत पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब गवाह पांच बार आ चुका है और प्रतिपरीक्षण नहीं हो पाया, तो अदालत ने ₹1000 कॉस्ट लगाते हुए देने का निर्देश दिया।
अब 28 सितंबर पर क्या होगा?
गुरुवार की सुनवाई का सबसे अहम बिंदु यही है कि अब मामला अगली तारीख पर सीधे गवाह के प्रतिपरीक्षण की ओर बढ़ेगा। 28 सितंबर 2026 को गवाह की जिरह होनी है और कोर्ट ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
यानी फिलहाल ₹1000 की राशि को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर लगाया गया जुर्माना बताना सही नहीं होगा। दोनों पक्षों के वकीलों ने इसकी अलग-अलग परिस्थितियां बताई हैं, जबकि वास्तविक विवाद अब गवाह के प्रतिपरीक्षण पर केंद्रित है।
2018 के आरोप से शुरू हुआ था विवाद
यह मामला 2018 में व्यापमं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा वीडी शर्मा पर लगाए गए कथित आरोपों से जुड़ा मानहानि प्रकरण है। वीडी शर्मा ने इन आरोपों को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की थी।
सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार बाद में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही आगे बढ़ी और 2022 में केस रजिस्टर्ड हो गया।
अब करीब एक दशक पुराने विवाद में अगला अहम पड़ाव 28 सितंबर की सुनवाई होगी, जहां गवाह विजय अठवाल के प्रतिपरीक्षण पर अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
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