विदिशा से जारी वारंट में झलका नवाबी अंदाज, कलेक्टर को देना पड़ी सफाई
विदिशा कलेक्टर कोर्ट से एक जमानती वारंट जारी हुआ है। इसमें एक कालोनाइजर के खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश दिया गया है। वारंट की भाषा को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि भाषा पुराने अंदाज की और हुक्म देने वाली है। मामले पर अब खुद कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने सफाई दी है।
किस मामले में जारी हुआ वारंट
यह जमानती वारंट न्यायालय कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट विदिशा से जारी हुआ है। यह पुलिस थाना सिविल लाइन विदिशा के नाम भेजा गया है। वारंट राजेंद्र रघुवंशी उर्फ बंटी के खिलाफ जारी हुआ है। वे सुभाष नगर विदिशा के रहने वाले बताए गए हैं। उन्हें न्यू शिवानंद सिटी कालोनी का कालोनाइजर बताया गया है।
आरोप है कि उन्होंने अनाधिकृत कालोनी बनाई है। इसी वजह से उनके खिलाफ यह वारंट जारी हुआ। वारंट में उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया है। साथ ही उन्हें अदालत में पेश करने को कहा गया है।
वारंट में क्या शर्तें रखी गईं
वारंट में जमानत की शर्तें भी साफ लिखी गई हैं। अगर आरोपी खुद दस हजार रुपए का मुचलका भरे तो राहत मिल सकती है। इसके अलावा एक या दो जमानतदार भी रखे जा सकते हैं। हर जमानतदार को दस हजार रुपए रुपए की जमानत देनी होगी।
वारंट के मुताबिक आरोपी को 6 जुलाई 2026 को अदालत में हाजिर होना है। जब तक अदालत हाजिरी से छूट न दे, तब तक यह नियम लागू रहेगा। वारंट पर 12 जून 2026 की तारीख दर्ज है। इस पर कार्यपालक दंडाधिकारी के हस्ताक्षर और अदालत की मोहर भी लगी है।
भाषा को लेकर क्यों उठे सवाल
वारंट में कुछ शब्दों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। लोगों ने कहा कि भाषा हुक्म देने वाले अंदाज में लिखी गई है। वारंट में लिखा है कि आरोपी को पकड़कर पेश करो। साथ ही यह भी लिखा है कि ऐसा करने से न चूकें।
कुछ यूजर्स ने इस भाषा को पुराने दौर की नवाबी शैली जैसा बताया। उनका कहना था कि यह अंदाज आम बोलचाल से बहुत अलग है। सोशल मीडिया पर यह वारंट तेजी से शेयर होने लगा। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक भाषा में बदलाव की जरूरत बताया।
कलेक्टर ने दी सफाई
मामला बढ़ता देख विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता (आईएएस अंशुल गुप्ता) ने खुद इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने thesootr को बताया कि यह पत्र विदिशा से ही डिप्टी कलेक्टर ने जारी किया है। उन्होंने कहा कि इसकी भाषा सिविल कोर्ट की तरह लिखी गई है।
कलेक्टर गुप्ता ने आगे कहा कि उन्होंने इस भाषा को तुरंत बदलने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने भाषा बदलकर नया पत्र जारी करने को भी कहा है। इस बयान के बाद विवाद पर प्रशासन की तरफ से स्पष्टता आई है।
आगे क्या हो सकता है
प्रशासन की तरफ से नई भाषा में पत्र जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे आगे ऐसे दस्तावेजों की भाषा में बदलाव देखने को मिल सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों की भाषा सरल होनी चाहिए। इससे आम जनता को समझने में आसानी होगी।
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