मंत्रालय में भटक रही मंत्री विजय शाह केस की फाइल, फैसला जल्द
News in Short
- सुप्रीम कोर्ट ने 2 सप्ताह में निर्णय का आदेश दिया, मियाद 2 फरवरी को पूरी।
- शाह केस की नस्ती होम और जीएडी के बीच घूमती रही, स्पष्ट निर्देश नहीं।
- सरकार के सामने तीन विकल्प रिवीजन, अनुमति, या इंकार।
- एसआईटी ने 19 अगस्त को ही अभियोजन अनुमति मांगी थी, जवाब लंबित।
- कोर्ट ने शाह की माफी को रिकॉर्ड पर न मानते हुए सख्ती दिखाई।
News in Detail
मंत्री विजय शाह से जुड़े प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट की सख्त समय-सीमा ने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अभियोजन की अनुमति पर निर्णय लेने के लिए अब महज 48 घंटे बचे हैं। लेकिन शाह केस की नस्ती मंत्रालय में होम और सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के बीच घूमती रही। जिम्मेदारी गृह विभाग की मानी जा रही है, पर शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश न मिलने के कारण अफसरों ने चुप्पी साध रखी है।
सोमवार तक लेना है फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी को एमपी सरकार को दो सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया था। यह मियाद 2 फरवरी को पूरी हो रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार तीन विकल्पों पर विचार कर रही है। रिवीजन याचिका,अभियोजन की अनुमति या इससे इंकार। ऐन वक्त के लिए रिवीजन अपील का मसौदा भी तैयार रखा गया है।
जानकारों का कहना है कि रिवीजन से कुछ समय की राहत मिल सकती है,पर कोर्ट के अब तक के रुख को देखते हुए बड़ी राहत की संभावना कम है। यदि सरकार अभियोजन की अनुमति देती है तो विपक्ष नैतिक आधार पर शाह के इस्तीफे की मांग तेज कर सकता है। वहीं, अनुमति से इंकार करने पर सुप्रीम कोर्ट कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः हस्तक्षेप कर सकता है।
कर्नल सोफिया को लेकर विवादित बोल
यह मामला उस विवादित टिप्पणी से जुड़ा है,जो शाह ने गत जुलाई में महू में ऑपरेशन सिंदूर में शामिल कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की थी। हाईकोर्ट जबलपुर के निर्देश पर इंदौर पुलिस ने आपराधिक प्रकरण दर्ज किया। सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर रोक से इनकार करते हुए तीन आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी गठित की।
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एसआईटी ने कहा नहीं मिली मंजूरी
गत 19 जनवरी को शाह प्रकरण में सुनवाई के दौरान एसआईटी ने बताया कि उसने बीएनएस की धारा 196 के तहत 19 अगस्त को सरकार से अभियोजन अनुमति मांगी थी। जिस पर अब तक निर्णय नहीं हुआ। कोर्ट ने देरी पर असंतोष जताते हुए दो सप्ताह की समय-सीमा तय की। सुनवाई के दौरान शाह की ओर से पेश माफी को भी कोर्ट ने पर्याप्त नहीं माना और कहा कि रिकॉर्ड पर औपचारिक माफी नहीं है।
अन्य बयानों पर भी मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट में विजय शाह के दूसरे आपत्तिजनक बयानों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे मामलों में प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर भी एसआईटी एक अलग रिपोर्ट दाखिल करे।