विजय शाह केस: कैबिनेट में फैसला टला, अब SC में एफिडेविट, 31 अगस्त को सुनवाई
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- विजय शाह पर फैसला टला, अब सुप्रीम कोर्ट को जवाब देगी सरकार।
- कैबिनेट में नहीं बनी बात, 31 अगस्त पर टिकीं सबकी निगाहें।
- मंत्री के बयान का मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर।
- एक साल से लटका फैसला, सरकार देगी एफिडेविट में जवाब।
- माफी काम नहीं आई, अब कोर्ट में असली परीक्षा।
मंत्री विजय शाह पर अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं आया। यह मामला कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान से जुड़ा है।
सरकार अब 31 अगस्त की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देगी। एसआईटी पहले ही अभियोजन की अनुमति मांग चुकी है। यह मामला करीब एक साल से लंबित है।
कैबिनेट में नहीं बनी बात
मंगलवार को मध्यप्रदेश कैबिनेट बैठक में एक अहम प्रस्ताव लाने की तैयारी थी। यह प्रस्ताव मंत्री विजय शाह पर अभियोजन स्वीकृति से जुड़ा था। लेकिन आखिरी वक्त पर इसे बैठक के एजेंडे से हटा दिया गया।
अब सरकार सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। 31 अगस्त की सुनवाई से पहले या उसी दौरान सरकार एफिडेविट दाखिल कर सकती है। इसके बाद इस फैसले पर कैबिनेट से अनुसमर्थन कराया जा सकता है।
यह मामला कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान से जुड़ा है। एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(a) (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) के तहत अभियोजन की अनुमति मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्य सरकार को फैसला लेने के निर्देश दे चुका है।
जनवरी से जुलाई तक क्या हुआ
19 जनवरी 2026 की सुनवाई में एक बात साफ हुई थी। एसआईटी अपनी जांच पूरी कर चुकी थी। लेकिन अभियोजन स्वीकृति का फैसला सरकार के पास अटका था। कोर्ट ने तब दो सप्ताह का समय दिया था।
मई में मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सरकार की ओर से कोई फैसला नहीं आया था। कोर्ट ने पुराने आदेश का पालन करने को कहा। साथ ही चार सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी।
23 जुलाई की सुप्रीम कोर्ट की ऑफिस रिपोर्ट में एक और बात सामने आई। 8 मई के आदेश के बावजूद अब तक कोई दस्तावेज दाखिल नहीं हुआ था। इसी देरी को लेकर अब सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
महू में दिया था विवादित बयान
यह पूरा विवाद 11 मई 2025 को शुरू हुआ था। विजय शाह इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम में मौजूद थे। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर टिप्पणी की।
इस बयान के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। विजय शाह ने बाद में तीन बार माफी भी मांगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस माफी पर भी नाराजगी जताई। 19 जनवरी की सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि माफी मांगने में काफी देर हो चुकी है।
सरकार के सामने अब क्या रास्ता
अगर सरकार अभियोजन की स्वीकृति देती है तो यह जानकारी एफिडेविट के जरिए सुप्रीम कोर्ट को दी जाएगी। इसके बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हो सकेगी।
वहीं अगर स्वीकृति नहीं मिलती तो भी मामला पूरी तरह खत्म नहीं होगा। विजय शाह के मंत्री पद से हटने की स्थिति में एसआईटी खुद अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ा सकती है।
उस स्थिति में सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी नहीं रहेगी। अब सबकी नजर 31 अगस्त की सुनवाई पर टिकी है। सरकार का एफिडेविट यह तय करेगा कि यह मामला किस दिशा में जाएगा।
यह पूरा मामला मध्यप्रदेश सरकार और उसके मंत्री विजय शाह से सीधे जुड़ा है। विवादित बयान भी इंदौर जिले के महू में दिया गया था। कैबिनेट का फैसला और आगे की कानूनी प्रक्रिया भी मध्यप्रदेश सरकार के स्तर पर ही तय होगी।
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