मंत्री विजय शाह पर अभियोजन मंजूरी को लेकर आज मोहन कैबिनेट में हो सकती है चर्चा
समझें क्या है पूरा मामला...
- मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर आज कैबिनेट फैसला लेगी।
- अभियोजन मंजूरी मिली तो प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।
- 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होनी है।
- एसआईटी ने बीएनएस की धारा 196 में मंजूरी मांगी है।
- शाह इस मामले में तीन बार माफी मांग चुके हैं।
क्या है पूरा विवाद
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला आज यानी 25 अगस्त को कैबिनेट में आ सकता है। यह मामला कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए एक बयान से जुड़ा है।
शाह ने यह बयान 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा गांव में दिया था। वहां हलमा कार्यक्रम आयोजित हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बात करते हुए शाह ने विवादित टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। करीब एक साल से यह केस लंबित है। आज सरकार को इस पर निर्णायक फैसला लेना है।
कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी
कर्नल सोफिया कुरैशी की उम्र 43 साल है। उनका घर गुजरात में है। उन्होंने बायोकेमिस्ट्री से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उनके पति मेजर ताजुद्दीन कुरैशी हैं। कुरैशी 1999 में महज 17 साल की उम्र में शॉर्ट सर्विस कमीशन से सेना में शामिल हुई थीं।
2006 में उन्होंने कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में हिस्सा लिया था। वे एक्सरसाइज फोर्स-18 प्रोग्राम का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने सेना की तरफ से मीडिया को जानकारी दी थी। इसी दौरान विजय शाह ने उनके बारे में विवादित टिप्पणी कर दी थी।
कौन हैं मंत्री विजय शाह
कुंअर विजय शाह की उम्र 62 साल है। वे पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वे हरसूद विधानसभा सीट से विधायक हैं। शाह की राजनीति की शुरुआत इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज से हुई थी। वे शुरुआत में एबीवीपी (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) से जुड़े थे।
उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव 1990 में लड़ा था। 2023 में उन्होंने आठवां विधानसभा चुनाव लड़ा। वे पहली बार 2003 में मंत्री बने थे। 2023 में वे पांचवीं बार मंत्री बने। शाह आठ बार के विधायक हैं और 20 साल से कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास संस्कृति, पर्यटन, आदिम जाति कल्याण, वन, तकनीकी शिक्षा सहित कई अहम विभाग हैं।
क्या कहा था विजय शाह ने
11 मई 2025 को शाह ने कहा था कि आतंकियों ने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा। उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी ने उनकी बहन को उनके घर भेजा। शाह ने यह भी कहा कि मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते इसलिए समाज की बहन को भेजा। उन्होंने देश के मान-सम्मान और सुहाग के बदले की बात कही थी। इस बयान को लेकर देशभर में नाराजगी फैल गई थी। कई संगठनों ने इसे आपत्तिजनक बताया था। बीजेपी संगठन ने भी शाह को फटकार लगाई थी।
19 जनवरी को मिला था दो हफ्ते का समय
19 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फैसला लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। इसके बावजूद फैसला लंबित रहा। अब कैबिनेट के जरिए इस पर आज निर्णय लिए जाने की तैयारी है। एसआईटी ने बीएनएस की धारा 196(1)(a) के तहत अभियोजन की अनुमति मांगी है।
इस धारा में नफरत फैलाने जैसे कृत्यों पर तीन साल तक कारावास का प्रावधान है। सरकारी सेवक के खिलाफ कार्रवाई से पहले सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। यही वजह है कि मामला अब तक कैबिनेट के फैसले पर अटका हुआ है।
मंजूरी मिली या नहीं, दोनों स्थिति में क्या होगा
अगर कैबिनेट अभियोजन को मंजूरी देती है तो प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र पेश करेगा। वहीं अगर मंजूरी नहीं मिलती है तो भी मामला खत्म नहीं होगा।
ऐसी स्थिति में केस लंबित रहेगा। भविष्य में जैसे ही शाह मंत्री पद से हटेंगे, एसआईटी बिना पूर्व अनुमति के कार्रवाई कर सकेगी। यानी कानूनी प्रक्रिया दोनों ही स्थिति में जारी रहने वाली है। इसी वजह से 31 अगस्त की सुनवाई से पहले आज का कैबिनेट फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
तीन बार मांग चुके हैं माफी
विवाद बढ़ने के बाद शाह ने कई बार माफी मांगी। 13 मई 2025 को उन्होंने कहा कि सोफिया बहन ने देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि गलती से कुछ गलत निकल गया तो दस बार माफी मांगने को तैयार हैं। 14 मई 2025 को उन्होंने कहा कि वे शर्मिंदा और दुखी हैं।
उन्होंने कहा कि सोफिया कुरैशी ने राष्ट्रधर्म निभाते हुए जाति और समाज से ऊपर उठकर काम किया है। 23 मई 2025 को उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि उनके शब्दों से समुदाय और धर्म को दुख पहुंचा। उन्होंने इसे भाषाई भूल बताया और भारतीय सेना व कर्नल सोफिया कुरैशी से माफी मांगी।
पहले भी जा चुका है मंत्री पद
यह पहला मौका नहीं है जब शाह की टिप्पणी विवाद का कारण बनी हो। 2013 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी। इस विवाद के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। सितंबर 2022 में उन्होंने राहुल गांधी के अविवाहित होने पर भी टिप्पणी की थी।
खंडवा की एक सभा में उन्होंने यह बयान दिया था। नवंबर 2023 में बालाघाट में शूटिंग कर रहीं अभिनेत्री विद्या बालन से जुड़ा विवाद भी सामने आया था। विद्या बालन ने रात में मिलने से इनकार किया था। इसके बाद शाह ने वन विभाग के जरिए फिल्म की शूटिंग रुकवा दी थी।
पूरे केस की टाइमलाइन
11 मई को शाह ने महू में विवादित बयान दिया था। 13 मई को उन्होंने माफी मांगी और बीजेपी संगठन ने फटकार लगाई। 14 मई को हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर एफआईआर (First Information Report) का आदेश दिया। इसी दिन शाह सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे लेकिन सुनवाई नहीं हुई। रात 11 बजे इंदौर के मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज हुई।
15 मई को हाईकोर्ट ने एफआईआर की भाषा पर नाराजगी जताई। 16 मई को हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। 17 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और अगली तारीख 19 मई मिली। 19 मई को कोर्ट ने मंत्री की माफी खारिज कर दी और एसआईटी गठन का आदेश दिया। इसी दिन डीजीपी ने एसआईटी का गठन किया। 28 मई को दूसरी सुनवाई हुई जिसमें स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई।
FAQ
- विजय शाह पर क्या आरोप है?
विजय शाह पर आरोप है कि उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया। यह बयान उन्होंने 11 मई 2025 को इंदौर के महू में दिया था। इस पर हाईकोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने SIT बनाई थी। - कर्नल सोफिया कुरैशी कौन हैं?
कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की सीनियर अधिकारी हैं। वे गुजरात के वडोदरा की रहने वाली हैं। उन्होंने 1999 में सेना जॉइन की थी और फिलहाल सिग्नल कोर में तैनात हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया ब्रीफिंग से वे चर्चा में आईं।
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