एमपी व्यापमं-2011 : 14 साल बाद 12 दोषियों को पांच-पांच साल की सजा, परीक्षा में बैठाए थे डमी कैंडिडेट्स

Rahul Dave | Dec 27, 2025, 23:28 IST
Photograph: (the sootr)
व्यापमं-2011 घोटाले में 14 साल बाद न्याय मिला। सीबीआई कोर्ट ने 12 दोषियों को 5-5 साल की जेल दी है। इन लोगों ने 'डमी कैंडिडेट्स' बनकर परीक्षा की पवित्रता को ठेस पहुंचाई थी। अब परीक्षा में धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम।

INDORE. व्यापमं घोटाला 2011 में मध्य प्रदेश में हुई एक बड़ी परीक्षा धोखाधड़ी का मामला था। इस घोटाले में हजारों उम्मीदवारों ने फर्जी तरीके से परीक्षा दी थी। एक दशक से भी ज्यादा समय बाद, सीबीआई की विशेष अदालत ने 12 दोषियों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। इन दोषियों ने असली उम्मीदवारों के स्थान पर डमी कैंडिडेट्स के रूप में परीक्षा दी थी।



फर्जी जानकारी देकर परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया

अदालत में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इन 12 लोगों ने असली अभ्यर्थियों के स्थान पर बैठकर परीक्षा दी। पहचान छिपाने, फोटो व दस्तावेजों में हेरफेर और फर्जी जानकारी के सहारे परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया गया। इसके बाद परीक्षा भी दे दी।



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एमपी का व्यापम घोटाला में सजा को ऐसे समझें

  • 2011 व्यापमं घोटाले में 12 दोषियों को पांच-पांच साल की सजा मिली, जिन्होंने डमी कैंडिडेट्स के रूप में परीक्षा दी थी।
  • दोषियों ने फर्जी दस्तावेज़ों और पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दी।
  • सीबीआई ने जांच के दौरान फिंगरप्रिंट मिलान, हस्तलेखन परीक्षण और दस्तावेज़ी साक्ष्य का सहारा लिया।
  • करीब 14 साल लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने फैसला सुनाया और दोषियों को सजा दी।
  • यह फैसला प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ाने में अहम साबित होगा।

सीबीआई को सौंपी गई थी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई। एजेंसी ने आधुनिक तकनीकी साधनों का सहारा लिया—फिंगरप्रिंट मिलान, हस्तलेखन परीक्षण और दस्तावेजी साक्ष्यों के जरिए आरोपियों की भूमिका को पुख्ता किया। इन्हीं ठोस प्रमाणों के आधार पर अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई।



14 साल तक चला मुकदमा

करीब 14 वर्षों तक चले इस मुकदमे में कई गवाह पेश हुए, तकनीकी रिपोर्ट्स की बारीकी से जांच हुई और बचाव पक्ष के तर्कों पर भी विस्तार से सुनवाई हुई। अंतत: अदालत ने सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन कर दोष सिद्ध पाया और शनिवार को फैसला सुनाया।



अहम न्यायिक फैसला

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में अहम है। इससे भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगेगा और परीक्षा तंत्र में भरोसा मजबूत होगा।



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व्यापमं घोटाले के संदर्भ में अहम कड़ी

व्यापमं घोटाले से जुड़े अनेक मामलों में यह निर्णय एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। यह साबित करता है कि जांच एजेंसियों की मेहनत और न्यायालय की सख्ती मिलकर बड़े से बड़े मामलों में भी जवाबदेही तय कर सकती है।



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