वेयरहाउसों में होगा क्षमता से सवा गुना स्टोरेज : किराए से निजी वेयरहाउसों को नफा
News in Short
- MPWLC का आदेश: गोदामों में 120% तक भंडारण की अनुमति।
- रबी 2026-27 के गेहूं- दलहन पर लागू, 25 जिलों में आदेश।
- निजी- शासकीय- BOT गोदामों में क्षमता से 20% ज्यादा भरेंगे।
- अफसर दे रहे परिवहन के खर्च में कटौती की दलील।
- क्षमता से ज्यादा स्टोरेज से वेयर हाउस में अनाज सड़ने का अंदेशा।
News in Detail
मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन ने अनाज भंडारण का नया फॉर्मूला निकाला है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में 25 जिलों के गोदामों में क्षमता से 20% ज्यादा गेहूं और दलहन भरने की अनुमति दे दी गई है। यानी 100 टन क्षमता वाले गोदाम में 120 टन अनाज रखा जाएगा।
आदेश 05 मई 2026 को जारी हुआ। प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा के हस्ताक्षर से सभी कलेक्टरों को भेजा गया। तर्क दिया गया कि शॉर्टफॉल रोकने और परिवहन खर्च बचाने के लिए यह जरूरी है। पर सवाल उठ रहा है कि ठूंस-ठूंस कर भरे अनाज की गुणवत्ता कौन देखेगा?
25 जिलों के लिए बदला नियम
MPWLC ने 05 मई 2026 को आदेश जारी किया है। जिसके तहत रबी सीजन 2026-27 में गेहूं एवं दलहन के भंडारण हेतु गोदामों में क्षमता से सवा गुना यानी 120 से 130 प्रतिशत तक स्टोरेज किया जाना है। यह आदेश गुना, अशोकनगर, दतिया, रतलाम, आगर मालवा, मंदसौर, नीमच, उज्जैन, इंदौर, धार, अलीराजपुर, खरगोन, राजगढ़, दमोह, पन्ना, बालाघाट, डिंडौरी, कटनी, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और उमरिया जिलों के वेयर हाउसों के लिए है। इनमें सरकारी के अलावा निजी क्षेत्र के वेयर हाउस भी शामिल हैं।
इन गोदामों के लिए नई व्यवस्था
निजी गोदाम-120% तक भंडारण।
संयुक्त भागीदारी योजना वाले निजी गोदाम-120% तक अनुमति।
शासकीय और BOT गोदाम-120% तक भंडारण ।
क्षमता से ज्यादा स्टोरेज के तर्क
वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के आदेश के अनुसार गेहूं-दलहन की आवक ज्यादा है। इससे भंडारण में शॉर्टफॉल की स्थिति बन रही है। इसका मतलब ये है कि प्रदेश के वेयर हाउसों की भंडारण क्षमता इसके लिए कम पड़ सकती है। भंडारण सुनिश्चित करने और इसमें होने वाला परिवहन भाड़ा घटाने के लिए क्षमता से ज्यादा स्टोरेज के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश से गड़बड़ाएंगे मानक
वेयर हाउस में अनाज के भंडारण के लिए पूर्व से व्यवस्था तय है। इसके लिए अनाज की बोरियां रखने के लिए स्टेक का आकार निर्धारित है। हर स्टेक का मानक आकार 30 फीट x 20फीट तय है।वेयर हाउस में दीवार से स्टेक की दूरी 2.5 से 3 फीट जबकि दो स्टेक के बीच यह दूरी 2 से 2.5 फीट निर्धारित है। मेन गेट पर 4 से 5 फीट का गलियारा रखना भी जरूरी है। जिससे अनाज की बोरियां हवा और रोशनी के संपर्क में रहे और उनमें सीलन और कीट न पनप पाएं।
अनाज खराब होने का अंदेशा
वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के नए आदेश से गोदामों में अनाज को सुरक्षित रखने वाले मानकों पर बुरा असर पड़ेगा। निर्धारित से अधिक मात्रा में अनाज की शिफ्टिंग, कीट नियंत्रण और नमी- सीलन को संभालना मुश्किल हो जाएगा। इससे गोदामों में अनाज खराब होने की आशंका भी बढ़ेगी। ऐस में हजारों मीट्रिक टन अनाज के सड़ने की स्थित न केवल कॉर्पोरेशन बल्कि प्रदेश सरकार को भी करोड़ों रुपए का नुकसान करा सकती है।
वेयर हाउसों को होगा फायदा
मध्यप्रदेश में 2600 से ज्यादा वेयर हाउस हैं। इनमें निजी क्षेत्र के वेयर हाउस ही 2000 के करीब हैं। कॉर्पोरेशन के आदेश ने जहां अनाज सड़ने का जोखिम बढ़ा है, वहीं निजी वेयर हाउस मालिक खुश हैं। क्षमता से अधिक अनाज के भंडारण से इन वेयर हाउस मालिकों को पहले की मुकाबले ज्यादा किराया मिलेगा। यानी सीधे तौर पर वेयर हाउसों की कमाई भी 20 से 30 फीसदी तक बढ़ जाएगी।
सरकार के सिर पर होगी जिम्मेदारी
एमपी वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के इस आदेश के बाद दलहन को लेकर सबसे ज्यादा सवाल खड़े हो रहे हैं। गोदामों में सीलन के कारण अनाज सड़ने पर नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी। इसकी भरपाई कौन करेगा यह भी पूछा जा रहा है। कॉर्पोरेशन द्वारा सरकारी खरीद के अनाज को अनुबंध के आधार पर वेयर हाउसों में रखा जाता है। एफसीआई द्वारा इस अनाज को तय मानकों के आधार पर ही खरीदता है। भंडारण की अमानक स्थिति पर एफसीआई भुगतान रोक सकता है।
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