मनरेगा मस्टरोल के नाम पर रिश्वतखोरी, जूनियर असिस्टेंट ACB के शिकंजे में
News In Short
- धौलपुर में जूनियर असिस्टेंट 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
- जूनियर असिस्टेंट रमेश कुमार को ACB ने रंगे हाथों किया गिरफ्तार।
- आरोपी ने मनरेगा मस्टरोल जारी करने के बदले मांगी थी रिश्वत।
- ACB ने परिवादी की शिकायत का सत्यापन कर कार्रवाई की।
- आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज।
News In Detail
राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) का शिकंजा सरकारी दफ्तरों में बैठे घूसखोरों पर लगातार कसता जा रहा है। ताजा मामला धौलपुर जिले की बसेड़ी पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रतनपुर का है।
यहां एसीबी की टीम ने एक कनिष्ठ सहायक (जूनियर असिस्टेंट) को 25,000 रुपए की रिश्वत राशि के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
मस्टरोल जारी करने की एवज में सौदा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी कनिष्ठ सहायक रमेश कुमार रतनपुर ग्राम पंचायत में पदस्थ है। परिवादी ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि ग्राम पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मस्टरोल जारी करने और उसे आगे बढ़ाने की एवज में आरोपी रमेश कुमार उससे 26,000 रुपए की रिश्वत की मांग कर रहा है।
गोपनीय सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसीबी मुख्यालय ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। दिनांक 01 जून 2026 को शिकायत का गोपनीय सत्यापन कराया गया, जिसमें कनिष्ठ सहायक द्वारा रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि पूरी तरह सही पाई गई।
शिकायत का सत्यापन होने के बाद एसीबी भरतपुर रेंज के डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। आज दिनांक 03 जून 2026 को डीएसपी ज्ञानचन्द के नेतृत्व में एसीबी की टीम ने रतनपुर में जाल बिछाया। रणनीति के तहत, जैसे ही परिवादी ने आरोपी रमेश कुमार को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 25,000 रुपये सौंपे, सादा वर्दी में मुस्तैद टीम ने उसे दबोच लिया।
पैंट की जेब से बरामद हुई घूस की रकम
गिरफ्तारी के बाद जब एसीबी की टीम ने आरोपी कनिष्ठ सहायक की तलाशी ली, तो घूस में ली गई 25,000 रुपए की पूरी राशि उसकी पैंट की जेब से बरामद हो गई।
यह पूरी कार्रवाई एसीबी की महानिरीक्षक पुलिस (IG) मती एस परिमला के दिशा-निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। एसीबी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अधिकारी अब अन्य पहलुओं पर गहन अनुसंधान में जुट गए हैं।
FAQ
- मनरेगा मस्टरोल क्या होता है?
मनरेगा मस्टरोल मनरेगा योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों की आधिकारिक डिजिटल/कागजी उपस्थिति पंजी और भुगतान का सबसे मुख्य दस्तावेज है। साधारण शब्दों में, यह वह सरकारी रिकॉर्ड है जो यह साबित करता है कि किस मजदूर ने किस तारीख को, किस सरकारी काम पर कितने दिन काम किया है। - मनरेगा का नया नाम क्या है?
VB-G RAM G (विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन - ग्रामीण) भारत सरकार का बिल्कुल नया कानून है, जिसे मनरेगा (MGNREGA) की जगह लागू किया गया है।
ये भी पढ़ें:-
बॉर्डर से ड्रग्स सप्लाई का बड़ा नेटवर्क, आतंकी संगठनों की भूमिका आई सामने
1 जुलाई से बंद हाे जाएगा सरिस्का, आखिरी दिनों में पर्यटकों की संख्या बढ़ी
पंचायत चुनाव को लेकर आयोग एक्टिव, आरक्षण आंकड़ों की फिर मांग
सांवलिया सेठ मंदिर में भक्त का अनोखा चढ़ावा, जिसे देख सब हो गए हैरान